ताक्सास साउथ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के साइंसदान मक नाईट के अनुसार तकरीबन १००० रसायनों की चूहों पर आज़माइश के बाद एक दवा पी७सी३ तैयार की गई है .यह बुढापे के रोग को रास्तें में ही रोक लेगी .रोग की व्यक्तित्व को तहस नहस करने वाली अवस्था को आने से मुल्तवी रखेगी .बस रोजाना एक गोली लेने सेयह दिमागी कोशिका (न्युरोंस )की मौत को रोक देगी .न्युरोंस की संख्या में भी इजाफा करेगी .याददाश्त को पुख्ता बनाएगी (शोर्ट टर्म मेमोरी लोस ही तो होता है इस रोग में ,दिमाग के सिकुड़ने से जो कोशिका अप -विकास की वजह से ही तो होता है ।).
रोग की अंतिम अवस्था में रोगी चलना फिरना ,बोलना यहाँ तक की निगलना भी भूल जाता है .अपने सगे संबंधियों को पहचान ने के काबिल भी नहीं रह्जाता है ।
आज़माइश के दौरान इस दवा को दिमाग के उस हिस्से में कोशिका वृद्धि दर्ज़ करने में कारगर देखा गया जिसका सम्बन्ध याददाश्त से गहरे ताल्लुक रखता है .न्युरोंस ना सिर्फ पैदा हुए फंक्शन भी ठीक से संपन्न किया .चूहों में न्युरोंस बन नहीं रहे थे .आज़माइश के बाद बन ना संपन्न हुआ ।
एक अन्य प्रयोग में दवा ने बुढ़ाते चूहों में स्मृति ह्रास (मेमोरी लोस )को थाम लिया .भूल -भुलैयां (मेज़ ) से यह आराम से बाहर निकल आये ।
इस दवा से ही प्राप्त किया गया एक यौगिक (ए कम्पाउंड दीरा -ईव्द फ्रॉम दिस ड्रग ) और भी असरकारी पाया गया .
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