शनिवार, 21 मार्च 2020

चीं चीं च्यं च्यं बोले तो ट्वीट्स : सोनिया जी मुंह लटकाये रहतीं हैं ,इन्हें शाहीन बाग़ जाकर बैठना चाहिए ,उनकी दादियां वहीँ हैं

बीस मार्च दो हज़ार बीस में निर्भया काण्ड बर्बर अपराधियों को फांसी पर चढ़ते देखा। संयोग ही सही पर यह हैरान ज़रूर करता है ,२०. ०३. २०२० ने कमलनाथ सरकार का पतन देखा।

विचित्र बात है ,कांग्रेस के एक सांसद अधीर रंजन चौधरी जब कुछ भी कहते हैं ,बाहों से ज्यादा कहते हैं ,जब वह अपनी बाहों को फैला लेते हैं ,उनके पीछे के कांग्रेसी चेहरे चौपट हो जाते हैं।

सोनिया जी मुंह लटकाये रहतीं हैं ,इन्हें शाहीन बाग़ जाकर बैठना चाहिए ,उनकी दादियां वहीँ हैं।
शीर्षक :  चीं चीं  च्यं च्यं बोले तो ट्वीट्स


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शनिवार, 14 मार्च 2020

कोरोना का एक दुखद पहलू चीन और अमरीका के बीच वाक्युद्ध है

कोरौना -रोधी- दादियां !कोरोना पर कौन रोता है ?

 कोरोना का एक दुखद पहलू चीन और अमरीका के बीच वाक्युद्ध है जहां अमरीका इस कोरोना परिवार के एक और वायरस को वुहान अभिनव कोरोना  कहने से नहीं चूक रहा है वहीँ  चीन इसकी वहां दस्तक के लिए अमरीकी सैनिकों को बतला रहा है। यह आरोप -प्रत्यारोप का नहीं कोविड २०१९ विश्वमारी को एक स्तर पर मिले जुले प्रयासों से थामने का नाज़ुक वक्त है। 


coronavirus


coronavirus
कोरोना रोधी दादियों की बात करते हैं 

यह आकस्मिक नहीं हैं और न ही एक  मिथ  ,शाहीन बाग़ की दादियां और इतर मोतरमायें तमाम आबालवृद्ध गत तकरीबन तीन महोनों से स्वस्थ हैं बावजूद मौसम  की बदमिज़ाजी के तुनकमिज़ाजी के, मार्च का महीना भी इसका अपवाद नहीं हैं। ऊँट मौसम  का किस करवट बैठेगा इसका कोई निश्चय नहीं। बहरसूरत भारतीय -सांइसदानों का एक तबका ऐसा मानने लगा है ,कोरोना का यदि कोई पुख्ता इलाज़ निकलेगा तो यह कोरोना रोधी- शख्शियत की काया और मानसिक सबलता और उत्प्रेरण से ही निकलेगा।

कहते हैं गोरों एक ऐसी नस्ल भी है जो एचआईवीएड्स रोधी है। इस पर ह्यूमेन इम्यूनो डिफीशियन्सी वायरस का कोई बस नहीं चलता। सारा फिरंगी अंदाज़ इनका एक तरफ और चुस्त- दुरुस्त प्रतिरक्षण व्ववस्था एक तरफ। इसे हलके में लेने की भूल न करें। 

कोरोना प्रतिरोध की बात दूर  की कौड़ी फेंक न समझा जाए। यह किसी फेंकू की कलम नहीं सांइसदान की है। इसे परखा जाए। 

 बहर -सूरत यह दीगर है के ये दादियां हाथ मिलाना तो दूर नमस्ते भी नहीं करतीं हैं। नमाज़ कहते हैं नमः से ही बना है ऐसा कुछ लोगों का मानना है , विसर्ग हटाने पर स के नीचे  हलन्त लगा दीजिये बस इसी नमस् से नमज्  होता हुआ नमाज़ बना हैं। नमाज़ ज़रूर ये अता करतीं हैं। कौन जाने अल्लाहताला की याद ही इन्हें आदिनांक हर बला से बचाए रही हो।भगवान् परमेश्वर अल्लाह वाहगुरु इन्हें लम्बी उम्र दे।  


विशेष :कोरोना के लक्षण दीखते ही अस्पताल का रुख न करें अपने कुनबाई डॉक्टर से परामर्श करें। 

जो भी मास्क उपलब्ध है वह लगा लें ,भले टिशू पेपर से आपने खुद बनाया हो ताकी आपसे किसी और तक न पहुंचे छूतहा है यह रोग। 

  यदि खांसी है ,बुखार है बदन -और सिर दर्द है नाक बहने लगी है ,तो सांस में तकलीफ होने का इंतज़ार  न करें ये मरदूद लोवर  रिस्पायरेटरी ट्रेक्ट पर ज़ोरदार धावा बोल देता है जबकि अमूमन सर्दी जुकाम (  नज़ला ) अपर रेस्पायरेटरी ट्रेक्ट तक ही वार करता है।यहां मुकाबला रेस्पायरेटरी डिस्ट्रेस से होता है।
डायबिटीज़ के साथ -साथ हायपरटेंशन (उच्च रक्तचाप के साथ मधुमेह की दुरभि संधि )फेफड़ों की अल्विओलीज (एअर सेक्स )पर भारी पड़ती है।  फेफड़े को होने वाली नुकसानी भी जानलेवा साबित होती है। थ्री डायमेंशनल एक्स रे साफ बतला देता है -फेफडों  में बलगम ही बलगम है सांस लेने   छोड़ने के  लिए बलगम ने जगह ही नहीं छोड़ी  है।

संकल्प यानी हौसला और प्रतिरोधक क्षमता दोनों ही बढ़ाता है 'शाहीन बाग़'। तीन सालों से पाकिस्तान   में भी कामकाजी महिलाएं अपने हक़ -हकूकों के लिए मार्च निकालती हैं मार्च के महीने में। अब ये दादियां देखें एक 'शाहीन- बाग़' यहां भी हो।  
अब जबकि यह नै महामारी दुनिया भर में पांच हज़ार से ज्यादा लोगों को लील चुकी है १३० से ज्यादा मुल्कों को अपने लपेटे में ले चुकी है एक लाख तीस हज़ार से ऊपर लोगों को संक्रमण कर चुकी है बचाव में ही बचाव है। यह गफलत और दहशत का नहीं सावधानी का वक्त है जन-जन  की भागेदारी चाहिए। 
    
जानकारी ही बचाव है इस काम में सदी के महानायक माननीय अमिताभ बच्चन की एक अवधि  भाषा  में लिखी कविता को यहां देना एक दम से सटीक होगा :

बिन हाथ धोई के ,केहू के भैया छुओ न :अमिताभ बच्चन 

बहुतेरे इलाज़ बतावें ,जन जनमानस सब केकर नाहीं 

कौन बताये इ सब केयू कहिस कालौंज़ी   पीसौ ,

केयू आंवला रस,केयू  कहस घर में बैठो ,हिलो न  ठस से मस,

ईर कहेन औ बीर कहेन ,की ऐसा कुछ भी  करो ना,

बिन साबुन से हाथ धौई के ,केहू के भैया छुओ ना 

हम कहा चलो हमउ कर देत हैं ,जइसन बोलईं  सब आवय देयो ,

कोरोना -फिरौना ,ठेंगुआ दिखाऊब तब। 

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च । हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः



यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च ।

 हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः


मरा हुआ धर्म मारने वाले का नाश ,और रक्षित किया हुआ धर्म रक्षक की रक्षा करता है इसलिए धर्म का हनन कभी न करना ,इसलिए कि मरा हुआ धर्म कभी हमको न मार डाले।

जो पुरुष धर्म का नाश करता है ,उसी का नाश धर्म कर देता है ,और जो धर्म की रक्षा करता है ,उसकी धर्म भी रक्षा करता है। इसलिए मारा हुआ धर्म कभी हमको न मार डाले इस भय से धर्म का हनन अर्थात  त्याग कभी न करना चाहिए।

यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च ।

 हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः

‘‘जिस सभा में अधर्म से धर्म, असत्य से सत्य, सब सभासदों के देखते हुए मारा जाता है, उस सभा में सब मृतक के समान हैं, जानों उनमें कोई भी नहीं जीता ।’’
महाभारत का  भीष्म पर्व -भरी सभा  में जिसमें नामचीन भीष्म पितामह ,धृतराष्ट्र ,आदिक------ पाँचों पांडव -----मौजूद थे धूर्त और ज़िद्दी मूढ़ -मति दुर्योधन और कर्ण के मातहत दुश्शासन द्रौपदी का चीरहरण करता है यह तो भला हो अपने कन्हैयाँ का वस्त्र अवतार बन के आ गए द्रौपदी की आर्त : पुकार सुनके -और दुश्शासन थक हार के गिर पड़ा 


यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च । हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः । 

महाभारत का वह प्रसंग जिसमें दौपदी का चीरहरण धृतराष्ट्र और भीष्मपितामह आदिक की मौजूदगी में दुःशासन करने की असफल कोशिश करता असफल इसलिए कृष्ण आर्त : द्रौपदी की पुकार सुन उनकी   हिफाज़त अदृश्य बने रहकर करते है। 
गीता में कृष्ण अर्जुन से मुखातिब होते हुए कहते हैं -अर्जुन तू क्षत्री है क्षत्री का धर्म राष्ट्र और कुल की हिफाज़त करना है तू चाहकर भी इसका त्याग नहीं कर सकेगा तेरा स्वभाव तेरी प्रकृति ही तुझे विवश कर देगी इसलिए तू बंधू बांधवों का मोह छोड़ और युद्ध कर। 
ज़ाहिर है धर्म व्यक्ति का अंतर्जात ,अंत :गुण , जन्मजात गुण है। स्वभाव है धारण किया जाता है। 

धारयति इति धर्म :
तेरी कमीज मेरी से उजली क्यों है ?कैसे है ?है ही नहीं ?मेरी कमीज की बात ही और है। 
कुछ इसी अंदाज़ में आज हम मेरा धर्म श्रेष्ठ सबसे ऊपर अव्वल शेष सभी धर्मों से श्रेष्ठ है।दोयम दर्ज़ा हैं शेष धर्म - जो अल्लाह के आगे सिज़दा नहीं करता वह  काफ़िर है। सबकी अपनी मनमानी व्याख्याएं हैं जिनका धर्म की किसी भी मूल किताब (कतेब )से कोई लेना देना नहीं है कहीं भी कुरआन में यह नहीं कहा गया है। वहां भी सभी धर्मों की जो आपसे सहमत नहीं है इज़्ज़त करने की बात कही गई है। 
गुरु ग्रन्थ साहब में भी यही कहा गया है -
एक ओंकार सतनाम ,करता -पुरख, निर्भय निर्वैर 
अकाल मूरत अजूनि सैभंग गुर परसाद 
अर्थात ईश्वर एक है उसमें और उसकी सृष्टि में कोई फर्क नहीं है। ऐसा नहीं है कि सृष्टि का निर्माण करके वह कहीं और बैठ गया है वह इसी में प्रवेश कर गया है। वह निर्भय और निर्वैर है अर्थात न उसे किसी का भय है न किसी से वह वैर भाव वैमनस्य ही रखता है बदला लेने की सोचता है। दूसरा जब कोई है ही नहीं फिर वह किस से भय खायेगा किससे बदला लेगा। उसकी छवि समय सापेक्ष नहीं हैं समय के साथ उसमें बदलाव नहीं आता है.वह हमेशा से है अ -यौनिक है गर्भ में किसी माँ के उलटा नहीं लटकता है मूर्त भी है अमूर्त भी। 
सनातन धर्म भी यही कहता है :
सगुण मीठो खांड़ सो ,निर्गुण कड़वो नीम ,
जाको गुरु जो परस दे ,ताहि प्रेम सो  जीम। 

 इस्लाम में भी यही बात है। अल्लाह एक है। 
मोहम्मद साहब के अब्बाजान  मूर्तियां बना के बेचते थे।देवी देवताओं की मूर्ति। 

बालक मोहम्मद उनका मज़ाक बनाते हुए कहता तुम्हारी ये मूर्तियां जब खुद की हिफाज़त नहीं करती ,कर सकतीं हैं तो औरों को कैसे बचाएंगी। इस्लाम में  हर दिन एक नए देव की पूजा होती थी। ३६५ से ज्यादा देवी देव-गण पूजे जाते थे साल भर । मोहम्मद ने बिगुल बजाया -अल्लाह एक है और कोई  
  दूसरा है ही नहीं। 
There is only one God and no second 
सभी धर्मों की  मूल सीख एक ही है भेदभाव का कारण हमारा खुद को श्रेष्ठ मानने का भाव है. खुद को श्रेष्ठ मानना। अपने मुंह मियाँ मिठ्ठू बनना है। 
'भगवा आतंक' ; 'इस्लामी आतंक'; वगैहरा - वगैहरा सब प्रलाप हैं हमारे बनाये हुए हैं धंधे हैं धंधे - बाज़ी है राजनीतिक धंधे -बाज़ों की।
शायद इसीलिए उमर-ख़ैयाम से अभि-प्रेरित हो हरिवंश राय बच्चन जी लिख गए -
वैर बढ़ाते मंदिर मस्जिद मेल कराती मधु -शाला 
कम ही लोग इस तथ्य से वाकिफ हैं कि बच्चन जी शराब को हाथ भी नहीं लगाते थे। उन्हीं ने लिखा -
कायस्थ कुल में जन्म लिया ,मेरे पुरखों ने इतना ढाला ,
मेरे लोहू के अंदर है पचहत्तर प्रतिशत हाला। 
और यह भी उन्हीं ने लिखा था - 

जहां कहीं मिल बैठे हम तुम ,
वहीँ रही हो ,मधुशाला 
लाल सुरा की धार लपट सी ,कह न इसे देना ज्वाला ,
फेनिल मदिरा है मत इसको कह देना  उर का छाला, 
दर्द नशा है इस मदिरा का ,विगत स्मृतियाँ साकी हैं ,
पीड़ा में आनंद जिसे हो, आये मेरी मधुशाला 
भाई साहब !न कोई साकी (मधुबाला ,बार टेंडर )थी न कोई प्याला। यह तो बिछोड़ा था आत्मा का परमात्मा से ,माशूका का आशिक से। 
संदर्भ :खतरे में रहने दो ,ख़तरा न हटाओ -जब सारे धर्म ही खुद पर ख़तरा महसूस करने लगें ,तो समाधान भी इन खतरों से ही निकलेगा (हिन्दुस्तान हिंदी दैनिक ,नै दिल्ली गुरूवार ०२ जनवरी २०२० ,स्तम्भ : नश्तर ,लेखा राजेंद्र धोड़पकर )पर एक प्रतिक्रिया 
प्रस्तोता :वीरेंद्र शर्मा ,F/0 कमांडर निशांत शर्मा ,२४५/२ ,विक्रम विहार ,शंकर विहार कॉम्प्लेक्स ,दिल्ली -छावनी -११० ०१०         https://www.youtube.com/watch?v=dxtgsq5oVy4

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

नेहरू कांग्रेसियों के द्वारा दो बार हिंदू समाज के संतों की हत्याएं करवाईं गईं ।इंदिराम्मा ने तो देश के संविधान को ही पलीता लगाके आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर दिया। रायसीना हिल से दुम अगले दिन हिलवाई गई। कोशिश तो इनकी बाबा रामदेव के सफाये की भी थी पर वे ईश्वर की कृपा से बच गए

४४० सांसदों वाले ऊपरले और निचले सदनों ने यानी अपर और लोवर हाउस ने जिस नागरिकता संशोधन बिल को पारित किया है उसे प्रियंका वाड्रा देश को तोड़ने वाला कदम बतला रहीं हैं। देश को तोड़ने का काम इनकी अम्मा जी और सुबुद्ध भाईसाहब सरे आम करवा रहें हैं पेट्रोल से (गाड़ियां जलवाकर ),सड़कों पर पथ्थर बाज़ी से हद दर्ज़े की हुल्लड़बाजी से जामिया में दस नंबरियों को घुसवाने का षड्यंत्र इन्हीं लोगों ने रचा है इसकी पटकथा इन्होनें पहले ही लिख ली थी। रायसीना हिल पर दवाब इन्हीं की अगुवाई में डाला गया है। इनकी अम्मा ने आते ही जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार करवाया था। इनकी दादी के पिता श्री द्वारा ये बांट के देश को खाने का काम शुरू हुआ था। जिन्ना जो कभी हिन्दू मुस्लिम एकता के पक्षधर थे इन्हीं की शह पर बाद में देश के सांप्रदायिक आधार पर बांट के आधा आधा खाने पे अड़ गए।अल्लामा इकबाल ने पाक जाने के बाद अपना रूख और भी कड़ा करते हुए लिखा सारा जहां हमारा। उसी का विकृत रूप इस्लामिक बुनियाद परस्ती दहशद गर्दी बनी है। 

   पहले अंग्रेज़ों से मिलकर सिखों को अलग करवाया फिर  ,जैनियों को वृहत्तर दायरे से सनातन धर्म के बाहर निकलवाया यह तो गनीमत रही इन्हें ये इल्म नहीं हुआ के जैनियों में भी स्वेताम्बर और दिगंबर दो अलहदा सम्प्रदाय होते हैं वरना इनके बंटवारे का काम  भी इसी खानदान के हाथों संपन्न होता।कर्नाटक में शैव सम्प्रदाय से  से लिंगायतों को अलग करने  का बेशर्म निर्णय लिया इन लोगों ने। नेहरू कांग्रेसियों के द्वारा दो बार हिंदू समाज के संतों की हत्याएं करवाईं गईं ।इंदिराम्मा ने तो देश के संविधान को ही पलीता लगाके आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर दिया। रायसीना हिल से दुम  अगले दिन हिलवाई गई।  कोशिश  तो इनकी बाबा रामदेव के सफाये की भी थी पर वे ईश्वर की  कृपा से बच गए।
गोधरा करवाने का जेहादियों के साथ किनका तालमेल था ?यह जग जाहिर है। हिन्दू परिवारों को तोड़ने के लिए ऐसे क़ानून बनाये के बहन भाइयों के सहज मेल को नष्ट कर उन्हें संपत्ति अधिकार में उलझा दिया। इन्हीं के प्रताप से परिवारों में लेस्बियन प्रवृत्ति को उभारा गया। साध्वी प्रज्ञा जैसे निरपराध संतों पर ज़ुल्म किया गया। हिन्दुओं के प्रति इनके मन में बेशुमार ,बेहद की  (अनंत) नफ़रत है। कभी प्रधानमन्त्री रहे सरदार मनमोहन सिंह से कहलवाया गया के देश के संशाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है। देश की हिन्दू जनता इनसे इतनी तंग है के उनकी सामूहिक आह शाप बनकर नेहरू कांग्रेसियों पर पड़ेगी। वक्त दूर नहीं है।जब ये ४४ से चार पर आके मानेंगे। 

वक्त दूर नहीं है  

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं।  


पुराणों में जो कहा गया है वह शुद्ध भौतिक विज्ञानों का निचोड़ भी हो सकता है ,सारतत्व भी। ज़रूरी नहीं है वह महज़ मिथ हो और चंद लेफ्टिए मिलकर उसका मज़ाक बनाते  उपहास करते फिरें ।
मसलन अगस्त्य मुनि को 'घटसम्भव' कहा गया है। 'कुंभज' और 'घटयौनि' भी 'कलशज :' भी ; एक ही अभिप्राय है इन  पारिभाषिक नामों का जिसका जन्म घड़े से कलश से हुआ है वही अगस्त्य है सप्तऋषि मंडल का शान से चमकने वाला कैनोपास (Canopus )ही अगस्त्य है जो लुब्धक (sirius)के बाद दूसरा सबसे चमकीला ब्राइट स्टार है।

 गांधारी के बारे में कहा जाता है जब उसे पता चला कुंती एक बच्चे को उससे पहले जन्म देने वाली है (युधिष्ठिर महाराज ज्येष्ठ पांडव उस समय कुंती के गर्भ में ही थे )उसने ईर्ष्या वश अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण के मुष्टि प्रहार से सौ टुकड़े कर दिए यही सौ कौरव बनकर आये। एक ही फर्टिलाइज़्द ह्यूमेन एग के मुष्टि प्रहार से विभाजित टुकड़ों से पनपे पूर्ण कालिक गर्भ काल के बाद।अलबत्ता एक दुशाला भी थी ये सभी पेटर्नल ट्विन्स थे न के आइडेंटल। कौरवों में वरिष्ठ दुर्योधन की एक मात्र बहन का नाम दुशाला था।

आज चर्चा एक और माइल स्टोन की है दुनिया का पहला शिशु कुदरती तौर पर एक नहीं दो दो महिलाओं के गर्भ में पनपने के बाद प्रसवित हुआ है। इंवाइवो फर्टिलाजेशन के ज़रिये।
इन्क्यूबेटर की भूमिका में मात्र अठारह घंटा यह कॉर्पोरल माँ डोना फ्रांसिस  इस्मित के गर्भाशय में रहा। इसके बाद का गर्भकाल जेस्टेशन पीरियड अपनी दूसरी धाय माँ जैस्मीन की कोख में  भुगताया।

यह कमाल का हुनर ब्रितानी वूमेंस फर्टिलिटी क्लिनिक स्विस प्रोद्योगिक कम्पनी अनेकवा ने कर दिखाया है। यहां इनविट्रो फर्टिलाजेशन (परखनली गर्भाधान का सहारा नहीं लिया गया है ). बस एक कैपसूल  में डोना के फीमेलएग (ह्यूमेन एग )का मिलन किसी मर्द के स्पर्म से करवाया गया (स्पर्म बैंक से स्पर्म जुटाया गया )तथा कैप्स्यूल को दोना के गर्भाशय में अठारह घंटा पनपाया गया इंक्यूबेट किया गया। अब क्योंकि डोना पूरे टर्म भ्रूण को रखने को उद्यत नहीं थीं जबकि जेस्मिन इस प्रग्नेंसी को अंजाम तक ले जाना चाहतीं थीं पुन : एम्ब्रियो को अठारह घंटा बाद जेस्मिन के गर्भाशय में रोप दिया गया।इस हुनर के कमाल को आने -वाइवो प्रसीजर (AneVivo Procedure )कहा गया है। हम लंदन की इस क्लिनिक को बधाई देते हुई नवजात शिशु की तंदरुस्ती की दुआ करते है  नाटिंघमशैर की लांस कॉर्पोरल तथा यहीं की मोतरमा जो पेशे से भी नर्स हैं बधाई देते हुए अपना वक्तव्य संपन्न करते हैं। जैश्रीकृष्णा !जयश्रीराम !जै हिंद की सेना प्रणाम !शब्बाख़ैर ! 

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

कहीं बलात्कार एक ला -इलाज़ रोग न बन जाए ?

बड़ी मुश्किल है खोया मेरा दिल है..... कोई इसे ढूंढ के लाओ न .......आखिर ऐसी फ़िल्में किस के मनोरंजन के लिए बन रही हैं जिसमें कथित नायक बे -हद के उत्पीड़न की हद तक जाकर हीरोइन को आतंकित करता है। ....... इन्साफ का तराजू .....कैसा इन्साफ ?कहाँ मिलता है इंसाफ  औरत को ? इस देश में ....कहाँ ?

.औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया ,

जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा दुत्कार दिया .

....कोख  के अंदर भी औरत दफन.कोख के  बाहर भी। घर में भी मेहफ़ूज़ नहीं। कहीं हलाला कहीं रखैल .......   ऊ लाला  ....  ऊलालाला  के  बाद अब और कुछ बचा है दिखाने खोने को ?कला है यह ?

"वह सुबह कभी तो आएगी" -की गुंजाइश ही कहाँ बचती है।

हमारा नागर बोध ,हमारी सिवि-लिटी  किस स्तर को छू रही है। " औरत का अस्मिता इंडेक्स "भारत में नापा जाए -देखा जाए- राष्ट्र कुल के देशों में हम कहाँ हैं ?
रावण जैसे महाबली ने भी सीता के साथ बलात्कार नहीं किया था। आज पिद्दी न पिद्दी के सोरबे एक ज़िंदा औरत के साथ बलात्कार करके क़ानून के गलियारों की आड़ में बरसों रोटियां तोड़ते हैं। पुलिस जो शहर की  हिफाज़त करती है नागर -सेना है उसका खौफ कहाँ हैं।उसकी वर्दी का ?अपनी प्रासंगिता तलाश रही है बे -चारी खाकी वर्दी ?काला कोट बलात्कारियों को बचाने से भी नहीं चूकेगा। ऐसे उकीलों से राम बचाये।

और हम खुद क्या कम हैं ? अपने अंदर पसरी फैली  चौ -तरफा  व्याप्त अतृप्त भोगी मानसिकता को क्या नकार सकने की ईमानदारी बरतेंगे हम लोग ?
'वी हेव ए क्रिमिनल आई 'दिस हेज़ गोट टू बी 'मेटा -मॉर- फोज़-अ -ड 'क्या हुआ हमारे नैतिक आचरण का ?कहीं दोहरी मानसिकता  का तो हम शिकार नहीं हैं हम लोग ?।मी टू ?
बलात्कार यदि एक मानसिक रोग है   .... तो इसे डायग्नोस्टिक स्टेटिस्टिकल मेनुअल ( D.S.M.IV)और इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन आफ मेन्टल डिसऑर्डर्स में जगह मिलनी चाहिए। 

IBHAS (Institute Of Behavioural Health and  Allied Sciences ) ,VIMHANS (Vidya Sagar Institute Of Mental Health and Neurosciences ),NIMHANS (National Institute Of Mental Health and Neuro  Sciences )क्या अपने सांझा प्रयासों से इस रोग की प्रागुक्ति, शिनाख्त वक्त रहते कर सकते हैं ?

 समाज  का एक तबका 'इससे' साफ़ साफ़ ग्रस्त है। इसकी परिव्याप्ति जम्मू कश्मीर लद्दाख से कन्या -कुमारी तक है।कहीं बलात्कार एक ला -इलाज़ रोग न बन जाए ?

ज़ुल्म की मुझपर इन्तिहाँ कर दे ,
मुझ सा बे जुबां ,फिर कोई मिले, न मिले।  

मैं हवाई -जहाज उड़ा सकतीं हूँ। मर्दों का अहम मर्दन करने वाली रणचंडी भी बन सकतीं हूँ  बलात्कार एक ऐसा आतंकवाद है जिसका शिकार सिर्फ और सिर्फ औरत होती है। वह बदला लेगी ज़रूर लेगी खबरदार !

कोई शिव नहीं लेटेगा मेरे पैरों के आगे -मुझे रोकने के लिए -है ही नहीं कोई माई का लाल , काली बन मैं  महिषासुर का वध करने को आतुर हूँ। अब देर नहीं है। एक बार आमरण अनशन करके देख लूँ @Gandhi 150 

https://www.youtube.com/watch?v=jLEOSnLi4Zw
 


शनिवार, 30 नवंबर 2019

ज़हर की पुड़िया और भारतीय लोकतंत्र

ज़हर की पुड़िया और भारतीय लोकतंत्र
"We Will Win Maharashtra Floor Test," Says Sonia Gandhi

सुना है  इन दिनों केंद्रीय सुल्तानों ने भारत की फ़िज़ा में ज़हर घोल दिया है। भारतीय लोकतंत्र विषाक्त हो गया है इस ज़हर को बे -असर करने के लिए एक मल्लिका ने शिवसेना से समझौता किया है। सुना यह भी गया है फडणवीस जी ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया था।
यह तो वही बात हो गई जिसे लोकतंत्र के इम्तिहान में सबसे ज्यादा नंबर मिले वह फस्ट नहीं आया है। इस परीक्षा में  हार जाने वाले तीन फिसड्डी मिलकर कह रहे हैं फ़स्ट हम आएं हैं क्योंकि हमारे कुल तीनों के मिलाकर नंबर ज्यादा हैं।
इस मलिका को विशेष कुछ पता नहीं है अपने आपको 'आज़ाद  'कहने वाला एक 'गुलाम ' जो अपने को नबी भी बतलाता है जो कुछ लिखकर दे देता है यह वही बोल देती है। रही सही कसर एक 'पटेल' पूरी कर देते हैं जो अहमद भी हैं और पटेल भी।
वह  सेकुलर ताकतों का गठ जोड़ कहा जाता है। जहां हारे हुए तीन जुआरी  सेकुलर हो जाते हैं शकुनी  की तरह पासे फेंक कर।  जीते हुए साम्प्रदायिक कहलाते हैं इनकी जुबां में।
आज यह सवाल पहले से ज्यादा मौज़ू हो गया है : भारत में कौन कहाँ कब 'सेकुलर' हो जाए इसका कोई निश्चय नहीं। किसी जेल की चौहद्दी से एक ईंट सरक जाए तो वहां से तीन सेकुलर निकल आते हैं। ज़मानत पे छूटे लोग कल को नीतीश से चुनाव पूर्व गठबंधन करके खुद को सेकुलर घोषित कर सकते हैं। ये ट्रेन में भी सेकुलर कम्पार्ट की बात कहते रहें हैं। मुंह में बीड़ा रखकर यह साहब उकीलों की तरह ज़बान को बिगाड़ कर बोलते हैं चरवाहा विश्वविद्ययालय से यह ज़नाब एम.ए एल.एल.बी वगैरह वगेहरा  हैं।
काम की बात पे लौटते हैं वो 'मलका 'उद्धव साहब के शपथ ग्रहण समारोह में न खुद पहुंची न अपने लौंडे को पहुँचने दिया कल को सरकार गिर जाए तो यह कह सकती है हम तो इसलिए दिल्ली छोड़ के गए ही नहीं थे।हमें पहले से पता था। लेकिन मरता क्या न करता लोकतंत्र को विषाक्त होता हम कैसे देखते ?



बहरसूरत इस मल्लिका का योगदान भारतीय लोकतंत्र को जीवित रखने में अभूत -पूर्व रहा है। उस  मराठा शौर्य को इस विषदंतों ने अपने निश्चय से गिरा दिया है जिसने महारानी लक्ष्मी बाई के साथ मिलकर भारत की चौतरफा हिफाज़त करते अपने जान गंवाई थी जिसके लिए पूरा अखंड भारत मायने रखता था एकल महाराष्ट्र नहीं। सलामत रहे यह रक्तबीज जिसने खुद ही  नेहरुवियन खूंटा उखाड़ फेंका है जो अपने पति के हत्यारों की आँखें निकालने की कौन कहे उन्हें माँ कर देती है। यह इस देश की शौर्य परम्परा वीरांगनाओं की तौहीन है। असली ज़हर की पुड़िया कौन है ?लोग एक  दूसरे से पूछ रहे हैं।