सोमवार, 25 सितंबर 2017

बीएचयू में षडयंत्रकारी तत्वों का जमघट

बीएचयू में षडयंत्रकारी तत्वों का जमघट

प्रधानमन्त्री अभी हवाईजहाज में बैठे ही थे ,मार्क्सवाद के बौद्धिक गुलामों में जिनके सरदार येचारी सीताराम बने हुए हैं ,सपाई के छटे हुए षड्यंत्रकारी तत्व ,पाकिस्तान विचार के स्थानीय जेहादी तत्व जिनमें अपने को सबसे पहले मुसलमान मानने शान से बतलाने वाले लोग ,ममताई लफंडर आईएसआई के स्लीपर सेल के लोग,हाय ये तो कुछ भी नहीं हुआ कह के  हाथ मलके चुप नहीं बैठे उन्होंने अपनी लीला दिखला दी।

 मुद्दा था एक केम्पस छात्रा  के  साथ कथित बदसुलूकी दूसरी का अपने को खुद ही घायल कर लेना और तीसरी का सर मुंडा लेना। प्रधानमन्त्री कि यद्यपि यह कांस्टीटूएंसी है लेकिन प्रधानमन्त्री का काम गली -गली घूमके इन षड्यंत्रों को सूघ लेना नहीं होता है वह आये और अपना सकारात्मक काम अंजाम देकर चले गए।

योगी आदित्य नाथ खुद क्योंकि षड्यंत्रकारी नहीं रहे हैं मुलायमतत्वों की तरह ,वह अंदर खाने पल रही इस साजिश की टोह नहीं ले सके। यूनिवर्सिटी के वाइसचांसलर ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए कहा है जो हुआ वह खेद जनक है लेकिन मुझे घटना को ठीक से समझने तो दो।वह भी हतप्रभ हैं। 

अजीब बात है हालांकि शरदयादव के लोग  वहां इम्प्लांट नहीं किये गए थे लेकिन ये ज़नाब घटना की निंदा करने वालों में सबसे आगे रहे।

अब ये भारतधर्मी समाज का काम है वह आमजान को बतलाये बीएचयू को जेएनयू में बदलने की साजिश करने वाले कौन -कौन से कन्हैया तत्व हैं जो मौके का फायदा उठा रहे हैं। बीएचयू एक बड़ा कैंपस है यहां हैदराबादी ओवेसी -पाकिस्तान सोच के लोग भी पढ़ने की आड़ में घुस आये हैं ,सीधे -सीधे पाकिस्तान सोच के लोग भी ,ममता की नज़र पूजा - मूर्ती विसर्जन से पहले ऐसे दंगे करवाने की बनी हुई है ताकि अपनी सोच को वह ठीक ठहरा सकें। इन्होने हाईकोर्ट के आदेश को नहीं माना सुप्रीम कोर्ट इसलिए नहीं गईं कि और फ़ज़ीहत होगी लिहाज़ा अपनी सोच को जायज सिद्ध करने करवाने के लिए वह हिन्दुस्तान में जगह -जगह दंगे प्रायोजित करवाने की ताक  में हैं उनके लोग भी बीएचयू पहुंचे पहुंचाए गए हैं।  यकीन मानिये बहुत जल्दी इन की बखिया उधड़ेगी लेकिन भारतधर्मी समाज को इस वेला देश- विरोधी  पाकिस्तान और आईएसआई समर्थक सोच के लोगों पर बराबर निगाह जमाये रखनी है। जैश्रीकृष्णा।  

कौन सी बातें महाधमनी वाल्व अवरोध या संकरेपन की बीमारी एओटिकवाल्व स्टेनोसिस के होने की जोखिम को ,संभावना को पैदा करती हैं,बढ़ा देती है :

कौन सी बातें महाधमनी वाल्व अवरोध या संकरेपन की बीमारी एओटिकवाल्व स्टेनोसिस   के होने की जोखिम को ,संभावना को पैदा करती हैं,बढ़ा देती है  :

(१) बढ़ती उम्र खासकर सत्तर -अस्सी के पेटे  में आये लोगों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। 

(२ )जन्मजात हृदय से ताल्लुक  रखने वाली चिकित्सीय स्थितियां (विकृतियां जैसे वाल्वों की संरचना सामान्य से अलग होना ट्राइकस्पिड वाल्व एओटिक का दो पल्ले या लीफलेट्स लिए बायकस्पिड रह जाना  )

(३)ऐसे संक्रमणों का पूर्ववृतान्त (हिस्ट्री )जो हृदय को असरग्रस्त करने का माद्दा या क्षमता रखते हों। 

(४)हृदय तथा रक्तवाहिकाओं से संबंधित (कार्डिओ -वसक्यलर)जोखिम को बढ़ाने वाली कंडीशनों जीवनशैली रोग यथा मधुमेह ,खून में घुली हुई चर्बी की  ज्यादा मात्रा (हाई -कॉलस्ट्रॉल )तथा हाई -ब्लड प्रेशर का मौजूद होना  

(५ )दीर्घावधि चले आये पुराने (लाइलाज )किडनी रोग का रहना ,रहे आना 

(६ )छाती विकिरण चिकित्सा का पूर्व -वृत्तांत 

सन्दर्भ -सामिग्री :http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/aortic-stenosis/symptoms-causes/dxc-20344145


भौतिक -विज्ञानों के झरोखे से

भौतिक -विज्ञानों के झरोखे से :क्या है उष्णकटिबंधी चक्रवातीय तूफानों की एक भयावह किस्म- "हरिकैन" (Hurricane )?कैसे होता है इनका नामकरण संस्कार ?

आम फेहम साधरण -जन की भाषा में कहें तो हरिकेन एक भयावह अंधड़ -तूफ़ान ही है  जिसे भूगोल -विज्ञान के माहिर उष्णकटिबंधी चक्रवात ही कहते हैं। हरिकेन अक्सर उष्णकटिबंधी और उप -उष्णकटि -बंधी जलराशि के ऊपर ही समुन्द्र के ऊपर उठते- बनते- पैदा होते हैं। इनकी फ़िज़िक्स के बारे में बात फिर कभी करेंगे।पूरा भौतिकी शास्त्र है इनका।

माहिरों के अनुसार जब किसी तूफ़ान की घूर्णन -गति  (Storm's Maximum Sustained Wind )प्रतिघंटा चौहत्तर मील को न सिर्फ छूले बल्कि लगातार उस अवधि में कायम भी रहे तब उसे हरिकेन का दर्ज़ा मिल जाता है। चीते से  ज्यादा तेज़ है ये बवंडर सी बलखाती नर्तनशील चाल जो इमारतों और वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है।

सागरों के उष्ण जल के ऊपर बनते - पैदा होते ये तूफ़ान। उष्ण कटिबंधी इलाके इनके प्राकृत आवास कहे जा सकते हैं। कभी कभार तटीय इलाके का भू -क्षेत्र भी इनकी चपेट में आता है। बस देखते ही देखते जैसे समुन्दर विशाल जलराशि की एक दीवार बन भूक्षेत्र की ओर  दौड़ पड़ता है। इसे स्टॉर्म सर्ज (Storm Surge )कहा जाता है। वर्तमान में प्युटो- रीको (उत्तरी अमरीका के नियंत्रण में एक द्वीप )ये तबाही झेल रहा है। बस जैसे एक जल प्रलय होने को है तटबंध टूटने को हैं , ऐसी प्रतीति कराती है यह कुदरत की विनाश  लीला।

जैसे रिख्टर -पैमाने पे भूकंप की शक्ति का आकलन प्रसूत ऊर्जा के आधार और उससे होने वाली तबाही ,उस स्थान की भू -स्थल आकृति जिसका ज़ायज़ा दिलवाती चलती है , आकलन करती है  इस तबाही का , वैसे ही यहां इन भयावह समुदी तूफानों की शक्ति और विनाश लीला का आकलन (Saffir Simpson Wind Scale )सफ़ीर सिम्प्सन पवन पैमाने पर किया जाता है। जैसे जलजले से निसृत ऊर्जा से होने वाली तबाही का आकलन (१-१० )अंकों तक रिख्टर पैमाने तथा १ से लेकर १२ तक मरकेली पैमाने पर किया जाता है वैसे ही यहां इन भयावह चक्रवातों के मामले में १ से लेकर पांच अंक   रखे गए हैं जिसे अंकीय रेटिंग कह सकते हैं।इनका शक्तिमान कह सकते हैं।

कम -दाब वाला एक  मौसमी घूर्णनतंत्र होता  है उष्ण कटिबंधी चक्रवात। इसके तहत संघठित गर्जनमेघ (organised thunderstorms )आते हैं। लेकिन अलग -अलग पवनराशियों को अलग अलग रखने वाला कोई क्षेत्र या सीमा (Fronts )यहां नहीं होती है।

सन्दर्भ के लिए देखें सेतु :(https://oceanservice.noaa.gov/facts/hurricane.html)

राष्ट्रीय समुद्री (सागरीय )एवं वायुमंडलीय प्रशासन तथा संबद्ध राष्ट्रीय हरिकेन केंद्र के अनुसार इन विनाशकारी तूफानों का प्रसव एक जून से लेकर ३० नवंबर तक आधिकारिक तौर पर आकलित ,अनुमित ,किया गया है दीगर है कि इस अवधि के  बाहर -भीतर भी ये तूफ़ान उठ सकते हैं। कुदरत के खेल का केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।निश्चय  कुछ नहीं।

हरिकेन का नामकरण और पुरोहिताई  :विश्व मौसम संगठन करता यह काम। इस पर नेशनल हरिकेन सेंटर का कोई नियंत्रण नहीं रहता है। पूर्व में प्रशांत और अब अंधमहासागरीय क्षेत्र में भी पैदा होने वाले भयावह तूफानों के लिए कुछ नर और मादा ,स्त्रियों और मर्दों के नाम छः साल के एक आवधिक चक्र के बाद बारी -बारी  से रखे जाते हैं।

किसी कहतें हैं चक्रवात ?

यह एक लार्ज स्केल बड़े पैमाने का आंधी -तूफ़ान तंत्र(स्टाम ) होता है जहां पवनें एक केंद्र के गिर्द उत्तरी गोलार्द्ध में वामावर्त दिशा में यानी घड़ी  की सुइयों के विपरीत दिशा में   घूर्णन करती हैं तथा दक्षिणी गोल में दक्षिणावर्त। 
आम भाषा में इसे ही चक्रवात या बवंडर (गोल -गोल वृताकार घूमती तेज़ हवा वाली आंधी हवा का बिगूला कह दिया जाता है। यह बहुत खराब मौसम का संकेत करता है जिसमें बेहद की  वर्षा या तेज़ आंधी का भी इशारा रहता है।  

बहुत तेज़ बर्फीला तूफ़ान "Blizzard "कहा जाता है। टाइफून (Typhoon )उष्ण - कटिबंधी प्रचंड विध्वंसकारी  अंधड़ तूफ़ान (Violent Tropical Storm )को कहा जाता है ये आमतौर पर बेहद की शक्ति और ऊर्जा लिए अपनी विनाश लीला का क्षेत्र पश्चिमी प्रशांत तथा भारतीय समुन्द्रों (Indian Oceans)को बनाते हैं। 

हरिकेन एक ऐसा उग्र -अंधड़ तूफ़ान है जो अपने साथ मूसलाधार बारिश तथा अतिवेगवान पवनों से मार करता है। इसमें पवनों की चाल ११९ किलोमीटर प्रतिघंटे के पार चली जाती है। Beaufort Scale पर इसका ताकत और परिमान १२ या इससे और भी अधिक आंका जाता था। 

वर्तमान में जिस हरिकेन ने प्युर्तो-रीको (उत्तरी अमरीकी द्वीप )को अपना निशाना बनाया है उसे "सफ़ीर सिम्प्सन स्केल" पर विनाशलीला के तहत ३. ० आंका गया है। 

टारनेडो :यह भी एक प्रकार का घूर्णनशील उग्र बवंडर होता है। इसकी आकृति फनेल आकृति के बादल जैसी, हाथी की सूंड सी रहती है जिसमे भयंकर घूर्णन करती हवाएं चक्कर काटती हुई आगे बढ़ती है। गनीमत है इनका मार्ग स्थल के ओर बढ़ते हुए संकरा ही रहता है एक सीमित क्षेत्र ही इस column of swirling wind से पैदा  तबाही  का  साक्षी बनता है। एक प्रचंड तूफानी तंत्र इसकी कोख में रहता है जिसके साये में जिसके तले (नीचे )यह आगे बढ़ता रहता है। 

यह हवा या पानी का ऐसा बवंडर (भंवर )होता है ,वातावर्त या जलावर्न होता है जो चपेट में आई चीज़ों को अपने केंद्र की और खींच -घसीट के ले आता है। और मज़े से उसे लिए आगे बढ़ जाता है। चंद मिनिटों की अवधि में केहर ढ़ा देता है. इसका वाटेक्स (Vortex )घूर्णन वायु या जल राशि रहती है यही वायु या जल की  घूर्णन शील भंवर - राशि तबाही मचाती है। तरह मिनिट से पहले इनकी चेतावनी प्रसारित नहीं की जा सकती। तबाही मचाके ये चलते बनते हैं चंद सेकिंड  से लेकर कई घंटा तक हो सकती है इनकी आक्रामक मुद्रा  इनकी यथा समय भविष्य वाणी का समय केवल तरह  मिनिट रहता है। इससे पहले कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। 
देखें सेतु :
https://www.youtube.com/watch?v=wlwyA-5iafg

टाइडल वेव या सुनामी (बंदरगाह पर पहुँचने विनाशकारी बेहद लम्बी दीर्घ लम्बाई वेव -लेंथ समुद्री तरंग ,यहां Tsu-सु का अर्थ बंदरगाह आउट Nami का अर्थ तरंग है ):यह ऐसी लम्बी समुद्री तरंग  है जो समुद्री तल में जल के नीचे Sub-duction Earth Quake से पैदा होती है जब एक प्लेट दूसरी पर चढ़के सरकती है तब पैदा होती है यह तरंग जो जल के नीचे तो शान्त भाव आगे बढ़ती है लेकिन तट की और पहुँचते -पहुँचते इसकी लम्बाई बेहद बढ़ जाती है और इसके ध्वंसात्मक प्रभाव भुगतने पड़ते हैं। 

इस सभी प्राकृत आपदाओं की फ़िज़िक्स की  चर्चा हम आगामी विज्ञानों के झरोखे के तहत "क्या और कैसे ?"में आगामी आलेखों में करेंगें। 

https://www.youtube.com/watch?v=W0LskBe_QfA

सन्दर्भ के लिए  
ये सेतु  भी देखें : (१ )(https://www.google.com/search?q=how+names+are+given+to+hurricanes&rlz=1CAACAP_enUS646US647&oq=how+names+are+given+to+hurricanes)

(२ )https://oceanservice.noaa.gov/facts/storm-names.html

रविवार, 24 सितंबर 2017

कहो दिल खोलके जो भी कहो अपनों से कहना है

अभी से थक के बैठे हो अभी तो दूर जाना है ,

वही किस्से  पुराने हैं उन्हें क्या आज़माना है।

वो अपनी राह जाते हैं तुम्हें अपनी पे रहना है ,

तुम्हें क्या उनसे लेना है तुम्हे क्या उनको देना है।

न कुछ उनसे है अब कहना न कुछ उनसे  सुनना है।

कहो  दिल खोलके जो भी कहो अपनों से कहना है। 

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

जेहादी तत्वों के पोषक देश भंजकों अपनी मूल धारा में लौटो

 रोहंग्या जेहादी तत्वों के समर्थन में उतरे मान्य रक्तरंगियों (लेफ्टीयों ,वामियों ),सोनिया के बौद्धिक गुलाम सम्मान के योग्य पिठ्ठुओं एक बात समझ लो। यदि यह देश आज़ाद हुआ तो उस नेहरू वंश की वजह से नहीं जिसके लाडले नेहरू ने उन अंग्रेज़ों की परम्परा को ही आगे बढ़ाया था जो भारत -द्वेष पर ही आधारित थी। नेहरु का मन विलायती ,काया मुसलमान  और.... खैर छोड़िये .. बात सांस्कृतिक धारा की हो रही थी उसी पर लौटते हैं।

भारत को आज़ादी उस सांस्कृतिक धारा ने ही दिलवाई थी जो परम्परा से शक्ति की उपासक थी । यह आकस्मिक नहीं है कि राष्ट्रगान और वन्देमातरम का प्रसव उस बंगाल की  धरती पर ही हुआ जो परम्परा से शक्ति की, माँ दुर्गा की उपासक थी। उसी परम्परा को तिलांजलि दे खुद को दीदी कहलवाने वाली नेत्री ममता आज मूर्ती विसर्जन को एक दिन आगे खिसकाने की बात करती है क्योंकि मुसलमानों का २७ फीसद वोट फ्लोटिंग वोट है यह उस सांस्कृतिक धारा के साथ भी जा सकता है जो गांधी की आत्मा में वास करती थी जो मरते वक्त भी "हे राम "से संयुक्त रहे। 

सुयोग्य लेफ्टीयों तुम्हारे बीच सबसे ज्यादा बेरिस्टर रहे हैं कमोबेश तुम्हारा नाता बंगाल से गहरा रहा है जहां से आये प्रणव दा राष्ट्रपति के रूप में अपने आखिरी दिन विदा वेला में भारत के प्रधानमन्त्री मोदी से ये कहलवा लेते हैं "भले माननीय राष्ट्रपति मेरी कई बातों से सहमत न थे लकिन उन्होंने अपने पिता समान नेह से मुझे कभी वंचित नहीं रखा।" यही है भारत राष्ट्र की सांस्कृतिक धारा जो एक तरफ राजा राम के गुण गाती है , मानस- मंदिर में (वाराणसी ) पूजा करती है ,शिव के तांडव और सदा शिव रूप (मंगलकारी )को भी नहीं भूलती।

जेहादी तत्वों के पोषक देश भंजकों अपनी मूल धारा में लौटो -भले मार्क्सवाद की बौद्धिक गुलामी करो लेकिन जेहादी रोहंग्या के साथ मत फिरो गली- कूचों में ,जेहादी तत्वों को यहां से दफह होना ही होगा ,तुम काहे बुरे बनते हो ?

ये देश तुम्हारा सम्मान करेगा।इसकी रगों में बहने वाले खून को पहचानो।  भारत धर्मी समाज  तुम्हें भी गले लगाएगा।
जैश्रीकृष्णा जयश्रीराम जयहिंद के सेना प्रणाम। 

क्या और कैसे ? क्या है महाधमनी वाल्व का संकरा पड़ना।यानी Aortic Valve Stenosis ?

क्या और कैसे ?

क्या है महाधमनी वाल्व का संकरा पड़ना।यानी Aortic Valve Stenosis ?

 क्यों हो जाता है यह हृद रोशनदान नैरो ?

उम्र बढ़ने के साथ -साथ साठ के दशक के पार  के अक्सर हमारे हृदय के चार रोशनदानों में से यह महारोशनदान (Aortic Valve ) संकरा होके खून के संचरण में रुकावट पैदा करने लगता है क्योंकि यह पूरी तरह अब खुल नहीं पाता है फलत:ब्लड सर्कुलेशन के कारण वाल्व के बंद होने से पैदा लुब-डुब साउंड में  भी बदलाव आता है जिसकी वजह बनता है हृदय के आसपास प्रवाह में पैदा होने वाला विक्षोभ। यह साउंड अब एक सरसराहट जैसी (Whooshing,Svishing जैसी  लगने  लगती है जैसे तेज़ी से बहती हवा सनसनाहट पैदा करे आवेग से बहता पानी सरसराहट पैदा करे। इस स्थिति को ही एआटिक वाल्व स्टेनोसिस (Aortic Valve Stenosis)कहा गया है। तथा इस असामान्य ध्वनि को जो इस स्थिति में वाल्व के बंद होने से पैदा हो रही है हार्ट -मर्मर कहा जाता है।

इसकी शिनाख्त हृद रोग का माहिर छाती की  पड़ताल स्टेथोस्कोप से करके आसानी से कर लेता  है। बस हो गया रोगनिदान।

अब क्योंकि रक्तप्रवाह में विक्षोभ पैदा होने लगता है इसलिए हृदय से बा -रास्ता मुख्यधमनी (Aorta )आगे शेष शरीर को रक्त पहुंचाने के लिए हृदय को अब अपेक्षाकृत ज्यादा काम करना पड़ता है। इस स्थिति में हृदय की कुल रक्त उलीचने पम्प करने (सिस्टोलिक स्ट्रोक )की क्षमता भी घटने लगती है। इसका दुष्प्रभाव हमारी हृद्पेशी (कार्डिएक मसल )को भुगतना पड़ सकता है। पेशी की मोटाई भी बढ़ सकती है वाल्व के आसपास कैल्शियम भी जमा हो सकता है। इसे ही केलिफिकेशन आफ एओटा कहा जा सकता है। यह भी रोग की एक वजह बन सकता है।

शिनाख्त न होने पर हृद पेशी को होने वाला नुक्सान बढ़ सकता है इलाज़ के अभाव में अनेक लक्षण जो अब तक मूक थे मुखरित होने लगते हैं। जबकि रोगनिदान समय से होने पर वाल्व की मरम्मत के अलावा दवाओं से भी इस स्थिति में आराम आ सकता है।अन्य पेचीला लक्षणों से जैसे री-जर्जी -टेशन (आगे बढ़ते हुए रक्त का महाधमनी में वापस लौटने लगना ) से बचाव हो जाता है।

सन्दर्भ -सामिग्री :http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/aortic-stenosis/home/ovc-20343384


चिकित्सा झरोखा :"क्या और कैसे ?"

चिकित्सा झरोखा :"क्या और कैसे ?"

क्या है महाधमनी वाल्व का संकरा पड़ना।यानी Aortic Valve Stenosis ?

 क्यों हो जाता है यह हृद रोशनदान नैरो ?

उम्र बढ़ने के साथ -साथ साठ के दशक के पार  के अक्सर हमारे हृदय के चार रोशनदानों में से यह महारोशनदान (Aortic Valve ) संकरा होके खून के संचरण में रुकावट पैदा करने लगता है क्योंकि यह पूरी तरह अब खुल नहीं पाता है फलत:ब्लड सर्कुलेशन के कारण वाल्व के बंद होने से पैदा लुब-डुब साउंड में  भी बदलाव आता है जिसकी वजह बनता है हृदय के आसपास प्रवाह में पैदा होने वाला विक्षोभ। यह साउंड अब एक सरसराहट जैसी (Whooshing,Svishing जैसी  लगने  लगती है जैसे तेज़ी से बहती हवा सनसनाहट पैदा करे आवेग से बहता पानी सरसराहट पैदा करे। इस स्थिति को ही एआटिक वाल्व स्टेनोसिस (Aortic Valve Stenosis)कहा गया है। तथा इस असामान्य ध्वनि को जो इस स्थिति में वाल्व के बंद होने से पैदा हो रही है हार्ट -मर्मर कहा जाता है।

इसकी शिनाख्त हृद रोग का माहिर छाती की  पड़ताल स्टेथोस्कोप से करके आसानी से कर लेता  है। बस हो गया रोगनिदान।

अब क्योंकि रक्तप्रवाह में विक्षोभ पैदा होने लगता है इसलिए हृदय से बा -रास्ता मुख्यधमनी (Aorta )आगे शेष शरीर को रक्त पहुंचाने के लिए हृदय को अब अपेक्षाकृत ज्यादा काम करना पड़ता है। इस स्थिति में हृदय की कुल रक्त उलीचने पम्प करने (सिस्टोलिक स्ट्रोक )की क्षमता भी घटने लगती है। इसका दुष्प्रभाव हमारी हृद्पेशी (कार्डिएक मसल )को भुगतना पड़ सकता है। पेशी की मोटाई भी बढ़ सकती है वाल्व के आसपास कैल्शियम भी जमा हो सकता है। इसे ही केलिफिकेशन आफ एओटा कहा जा सकता है। यह भी रोग की एक वजह बन सकता है।

शिनाख्त न होने पर हृद पेशी को होने वाला नुक्सान बढ़ सकता है इलाज़ के अभाव में अनेक लक्षण जो अब तक मूक थे मुखरित होने लगते हैं। जबकि रोगनिदान समय से होने पर वाल्व की मरम्मत के अलावा दवाओं से भी इस स्थिति में आराम आ सकता है।अन्य पेचीला लक्षणों से जैसे री-जर्जी -टेशन (आगे बढ़ते हुए रक्त का महाधमनी में वापस लौटने लगना ) से बचाव हो जाता है।

सन्दर्भ -सामिग्री :http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/aortic-stenosis/home/ovc-20343384