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रविवार, 13 नवंबर 2016

नोटों का मसला अंजाम नहीं आगाज़ है

नोटों का मसला अंजाम नहीं आगाज़ है

मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है ,

वही होता है जो मंजूर खुदा होता है।

ट्रम्प और मोदी ईश्वरीय योजना के तहत उस परिवर्तन का निमित्त बने हैं जो २०३४ तक मेरा युवाभारत देखेगा। पूरा विश्व देखेगा। मोदी के बाद अब जो भी आएगा करना उसे भी वही पड़ेगा जिसके होने के निमित्त मोदी बने हैं।

इस मौके पर स्वप्न दृष्टा भारत माता के गौरव एपीजे साहब की यादें ताज़ा हो उठीं  , २०२० तक जिस बड़े सपने के   होने की जो आशा उन्होंने भारत को एक विश्वशक्ति बनके उभरने की थी उस दिशा में देश आगे बढ़ने लगा है।

साक्षी भाव से प्रेक्षक  बने हम भी इस परिवर्तन को देखेंगे । आजकल ८० -८५ साल तक आदमी जी जाता है। ईश्वरीय विधान इस समय दुनिया में काम कर रहा है उसे ही साकार करने मोदी सोच के लोग आएं हैं।

आप हमें भी लाख गाली दे लें कहेंगे हम वही जो भारत के हित में है। हम भारत वासी तो तुलसी का पता तोड़ते वक्त ,पूजा के निमित्त वेलपत्र लेते वक्त भी इस जीव जगत से भी क्षमा मांगते हैं ,प्रकृति को खुद का हिस्सा मानते आएं हैं वही भारत का सनातन (प्रचलित रूप हिंदु मन ) ही वैश्विक योजना को मूरत देगा।

हमारे पर्वों पर धरती भारत से लेकर  ढ़ाका  तक खून से नहीं रंगती। हमारे लिए जड़ जंगम उसी ईश्वर की अभिव्यक्ति हैं।

इसलिए हम निश्चिन्त हैं :

चिंता ताकि कीजिये जो अनहोनी होय ,

इह मारग  संसार का ,नानक थिर नहीं कोय।

एक प्रतिक्रिया :

https://www.youtube.com/watch?v=h52oPQPi5xI

नोटों का मसला अंजाम नहीं आगाज़ है
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है ,
वही होता है जो मंजूर खुदा होता है।
ट्रम्प और मोदी ईश्वरीय योजना के तहत उस परिवर्तन का निमित्त बने हैं जो २०३४ तक मेरा युवाभारत देखेगा। पूरा विश्व देखेगा। मोदी के बाद अब जो भी आएगा करना उसे भी वही पड़ेगा जिसके होने के निमित्त मोदी बने हैं।
इस मौके पर स्वप्न दृष्टा भारत माता के गौरव एपीजे साहब की यादें ताज़ा हो उठीं , २०२० तक जिस बड़े सपने के होने की जो आशा उन्होंने भारत को एक विश्वशक्ति बनके उभरने की थी उस दिशा में देश आगे बढ़ने लगा है।
साक्षी भाव से प्रेक्षक बने हम भी इस परिवर्तन को देखेंगे । आजकल ८० -८५ साल तक आदमी जी जाता है। ईश्वरीय विधान इस समय दुनिया में काम कर रहा है उसे ही साकार करने मोदी सोच के लोग आएं हैं।
आप हमें भी लाख गाली दे लें कहेंगे हम वही जो भारत के हित में है। हम भारत वासी तो तुलसी का पता तोड़ते वक्त ,पूजा के निमित्त वेलपत्र लेते वक्त भी इस जीव जगत से भी क्षमा मांगते हैं ,प्रकृति को खुद का हिस्सा मानते आएं हैं वही भारत का सनातन (प्रचलित रूप हिंदु मन ) ही वैश्विक योजना को मूरत देगा।
हमारे पर्वों पर धरती भारत से लेकर ढ़ाका तक खून से नहीं रंगती। हमारे लिए जड़ जंगम उसी ईश्वर की अभिव्यक्ति हैं।
इसलिए हम निश्चिन्त हैं :
चिंता ताकि कीजिये जो अनहोनी होय ,
इह मारग संसार का ,नानक थिर नहीं कोय।
एक प्रतिक्रिया :
Prime Minister Narendra Modi lays the foundation stone for New Green Field International Airport &…
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शनिवार, 12 नवंबर 2016

न था कुछ तो खुदा था ,कुछ न होता तो खुदा होता , डुबोया मुझको होने ने ,न होता मैं तो क्या होता।

न था कुछ तो खुदा था ,कुछ न होता तो खुदा होता ,

डुबोया मुझको होने ने ,न होता मैं तो क्या होता।


Diwan-E-Ghalib
Na Tha Kuch To Khuda Tha, Kuch Na Hota To Khuda Hota,
Duboyaa Mujh Ko Hone Ne, Na Hota Main To Kya Hota...
Translation:
1. When there was nothing, then God existed; if nothing existed, then God would exist.
2. 'being' drowned me; if I did not exist, then what would I be?
Meaning:
With what excellence he's given nonexistence priority over existence-- it's beyond praise. He says that when the world had not been born, then there was only the Lord himself. If this world of possibilities had not been engendered, then too there would have been only the Lord himself. Thus my existence, as it manifested itself, established me as a separate body, and that other body, having taken shape, ruined me. If I had not been born, and did not exist, then just think, what would I have been! That is, I would have been God.

बतलाते चलें आपको ये ग़ालिब साहब का आखिरी शैर था ,इस दौर तक आते आते वो ग़ालिब गायब हो चुका था जो कहता था -

हैं और भी दुनिया में सुखनबर बहुत अच्छे ,

कहते हैं के ग़ालिब का है अंदाज़े बयान और। 

यानी अपने को श्रेष्ठ क्या उस दौर का सर्वश्रेष्ठ ,चोटी  का,  शीर्ष शायर मानने का दम्भ साफ़ दिखलाई देता है इस शैर  में। 

(सुखनबर -कवि ,शायर ,तमाम किस्म के लिखाड़ियों के लिए प्रयुक्त होता है। )

उम्र के अंतिम पड़ाव तक आते आते वह ग़ालिब मर चुका था। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ ,वह अस्तित्व और केवल अस्तित्व यानी इज़्नेस ,प्रेज़ेन्स (प्रीज़ेन्ट ),बीइंग होने को जान गए थे ,खुदा और बन्दे के बीच में यह अहम भाव आईनैस ,ही सबसे बड़ी रुकावट है।ये समय से बंधा अतीत ,भविष्य में भटकता मन ,जिसे फाल्स ईगो ने रचा है सबसे बड़ी बाधा हमारे अर्थ-पूर्ण अस्तित्व यानी बीइंग और माइंड जेनरेटिड फाल्स ईगो के बीच।  

तमाम गर्वोक्तियाँ अनकोंशश माइंड की ,फाल्स ईगो की उपज हैं। हर लिख्खाड़ मशहूरी चाहता है। मैं बहुत बड़ा लिखाड़ी हूँ ,खिलाड़ी हूँ ,बिग बोस ,बिग -बी हूँ। इसका नुक्सान यह है आदमी क्लॉक टाइम की गिरिफ्त के आगे बीइंग तक नहीं पहुँच पाटा पाता जो समय मुक्त है। 

मन हमारे अवचेतन मन की पैदावार है ,फसल है ,हमारी एब्सेंस की खबर है। मन अतीत और भविष्य में ही पनाह ढूंढता है। बीइंग की ,प्रीजेंस की अनदेखी करता है। जबकि भविष्य तो इसी अवचेतन से पैदा माइंड का प्रोजेक्शन मात्र है और भविष्य जब भी घटित होगा ,नाउ में ही घटित होगा। और अतीत वह तो हमारी याददाश्त का अल्पांश (ट्रेस आफ अवर मेमोरी )मात्र है ,उसे भी नाउ में रिट्रीवल के तहत जी हाँ नाउ में ही होना आना  पड़ता है। 
उम्र के आखिरी पड़ाव में ग़ालिब समझ गए थे नाउ (प्रेजेंट ,मोमेंट ,बीइंग )ही हमारा अस्तित्व है। मन तो हमारा नौकर है ,हम अपना मन नहीं हैं मन के मालिक हैं। तमाम कर्मेन्द्रियां ,ज्ञानेन्द्रियाँ ,मन और अहंकार के साथ बुद्धि को भी बहका लेतीं हैं ,बुद्धि रुपी सारथी  की लगाम पर मन कब्जा कर लेता है। मन हमेशा या तो अतीत में होता या भविष्य में सुकून ढूंढता है ,सपने सच होने का नखलिस्तान बुनता  है। 

तमाम शास्त्रों ने शरीर को झुठलाया है मुंह खोलकर कहा है -यु आर नाट योर बॉडी। जबकि शरीर हमारे होने की सबसे बाहरी परत है।पहला सच है। इसे समझने के बाद ही अंदर की यात्रा शुरू होगी। 

 इनर  बॉडी यानी अंदर की यात्रा करते ही मन गायब हो जाता है। आप सिर्फ अपने साँसों की धौंकनी में हर सांस की आवाजाही पे ध्यान टिकाइये मन वाष्प बनके उड़ जाएगा। शेष जो बचेगा वह आपका  बीइंग होगा। 

बीइंग समय शून्य है। हमेशा है और हमेशा रहेगा। अतीत और वर्तमान समय से बंधे हुए हैं।बीइंग ही आप हैं ब्रह्म है ,परमात्मा है।  

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

मोदी साहब के इस कदम का हिंदुस्तान ने दिल खोकर स्वागत किया है असुविधा के बावज़ूद लोग अंदर से खुश हैं

संजीव भाई आजका एडिट प्लेटर का विश्लेषण हमारे सामजिक मन की उथल पुथल को संग लिए आया। इस बाबत एक बात उल्लेख्य है सरकार ने BPL लोगों ,अन्य उपेक्षित वर्गों को ज़ीरो केश से एकाउंट्स खोलने की सुविधा दी थी। यही वक्त है जिनकी कोठियां हज़ार पांच सौ के नोटों से भरी पड़ी है वह इस वर्ग का आवाहन करे चांदनी चौक जैसे स्थानों पर जाकर जहां रोज़ रोटियां बांटी जाती हैं। बीस बीस हज़ार इन खाता धारियों को कमसे कम दें। बड़े आशीष मिलेंगे। घर के डोमेस्टिक हेल्प्स का हिंदुस्तान में बे -तरह शोषण होता आया है न उनकी साप्ताहिक छुट्टी न संतोष की पगार। ऊपर से डाट डपट। 

उन्हें दिल खोलकर दें जो असल में इनका घर चला रहीं हैं। आपके ही पड़ोस में ,सटे हुए नीति बाग़ में  भी में कई कई डोमेस्टिक हेल्प 24x7x365 आपको एक घर में मिलेंगे। लोगों के पास अकूत पैसा है। खान मार्किट में दूकानें हैं। तीर्थ यात्रा है यह उनके लिए। 

साथ ही अब तो अघोषित आय घोषित कर पहल करके आगे आएं ,४५%टेक्स दें और शेष राशि को मान्य (वाइट )बनाएं। 

मोदी साहब के इस कदम का हिंदुस्तान ने दिल खोकर स्वागत किया है असुविधा के बावज़ूद लोग अंदर से खुश हैं। रही बात ट्रम्प और अमरीका की ये तो भारत ही है जो ट्रम्प जैसी जवान बोलने वालों ,कट्टर पंथियों की गोद  में खेलने वालों रक्तरंगी लेफ्टियों को पचाता आया है ,बदजुबानी के लिए विख्यात मायावतियों  ,लालू सोच मुलायम सोच के छद्म सेकुलर पुत्रों की बकवास को बर्दाश्त करता आया है। अब मंजर बदल रहा है। आपके राष्ट्र प्रेम और संतुलित विश्लेषण को जो समाज की नव्ज़ से जुड़ा रहा है प्रणाम। 

एक प्रतिक्रिया एडिट प्लेटर हिंदी पर :

https://www.facebook.com/search/top/?q=edit%20platter%20%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%80


My take on the day's top stories! Only on Edit Platter! 11th November, Friday
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Edit Platter हिंदी was live.
15 hrs
As I see it with Sanjeev Srivastava! 11th November, Friday

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

होता है बस वो सखी जो भी होना होय , हंट किए कछु होय न लाख करे किन कोय।

चिंता ताकि कीजिये जो अनहोनी होय ,

लेख न मिटिए हे सखी ,जो लिखिआ करतार। 

होता है बस वो सखी जो भी होना होय ,

हंट किए कछु होय न लाख करे किन कोय। 

अलावा इसके एक बात और डोनाल्ड ट्रम्प पर लागू होती है जिनका दानवीकर कुछ वैसे ही किया गया है जैसा २०१४ से पहले हमारे अज़ीमतर प्रधानमंत्री मोदी का होता रहा है। 
नीचे लिखी पंक्तियाँ इसका खासा खुलासा करेंगी -

हर तरफ एतराज़ होता है ,

 मैं जहां रौशनी में आता हूँ। 

बहरसूरत वस्तुस्थिति का इतना निर्मम और बेलाग विश्लेषण एडिटपलेटर ही प्रस्तूत कर सकता है। डोनाल्ड ट्रम्प पहलवान रहें हैं पहलवान को कभी भी बुद्धि तत्व के लिए नहीं जाना गया है ,वो जो ठान लेता ठान लेता है फिर अच्छा बुरा होय सो होय। 

दुनिया और हमारी हवा पानी वैसे भी बदल ही रही है। 

विनाशकाले विपरीत बुद्धि -नागर बोध से ठसाठस अमरकियों के बारे में ऐसा कहना बड़ा मुश्किल है अमरीका सबसे पहले स्वहित का पोषक संरक्षक देश रहा है। अलबत्ता परिवर्तन तो शाश्वत ही माना कहा  गया है ओबामा अपनी भलमनसाहत के बा -वज़ूद बिना बघनखों के राष्ट्रपति दीखते थे ट्रम्प  के बारे में ऐसा आसानी से नहीं कहा जा सकेगा। सीनेट और प्रतिनिधि सभा उनकी जब में रहेगी ?

एक प्रतिक्रिया दिए हुए सेतु पर मौजूद प्लेटर पर :

https://www.facebook.com/shiv.kant.792

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

करेंसी नोट वापसी का तीर किसे लगा ,कौन कौन मारा गया ?

करेंसी नोट   वापसी का तीर किसे लगा ,कौन कौन मारा गया ?

हमारा मानना है इस एक तीर से कई शिकार किये गए हैं। सबसे पहले तो वह हाफीज़ सईद मारा गया जिसने हवाला के मार्फ़त हिंदुस्तान में फेक करेंसी भेजकर भारत पर बड़ा आतंकी हमला करवाने  का मंसूबा बनाया था।

काश्मीर में बेहद की फेक करेंसी इस दौरान आ गई थी जिसके दम पर छोटे छोटे बच्चों से स्कूल जलवाए जा रहे थे। वो तमाम स्लीपर सेल्स मारे गए।

वो सलमान खुर्शीद मारा गया जो पाकिस्तान जाकर देश का सौदा करके आया था वह मणिशंकर अय्यर भी मारा गया जो पाक में कहकर आया था मोदी को हटाओ हमें लाओ।

आलू की फेक्ट्री लगाने वाले अब बैंगन की फेक्ट्री लगा लें।

वो राजनीतिक दल मारे गए जो लैप टॉप बांटते थे वोट खरीद के लिए अन्य कई और साधनों कम्बल ,शबाब और शराब का इस्तेमाल करते थे ,सब तबाह हैं आज। मायावतियां और मुलायम आलिया ,तमाम राजनीति के धंधे बाज़ तबाह हैं। रोना गरीब का हिंदुस्तान के आम आदमी का रो रहें हैं उस केजरबवाल के पास अब काला धन आना बन्द हो जाएगा, जिसका आंतरिक प्रदूषण दिल्ली के स्थूल प्रदूषण से बड़ा हो गया था। अब फिर वो एलजी को पकड़ेगा मोदी का रोना रोयेगा। रोवो भैया फूट फूट  के रोवो।

इसीलिए इनके भौंपू चैनलों पर गरीबों का क्या होगा ,किसी को अपनी बेटी की शादी करनी है वह अब क्या और कैसे करेगा ?वगैरहा वगैरहा की आड़ में अपनी हताशा निकाल रहे हैं।

इस एक खबर ने हिंदुस्तान में अमरीकी चुनाव की खबरों को दोयम दर्ज़े पे ला खड़ा किया है।

हम स्वयं यहां कैंटन (मिशिगन )में दो चुनाव बूथों पर प्रात :साढ़े नौ बजे (ईस्टर्न स्टेंडर्ड टाइम ) का मुआयना करके आये। लिखा था वोटिंग प्रीसिंक्ट ,यहां आप वोट कर सकते हैं नम्बर ३८ (ओल्ड चेरी हिल विलेज स्कूल ,जो फिलवक्त एक चर्च है ),नम्बर ३५ केंटन ह्यूमेन सर्विसेज़ सेंटर। वोटिंग  अहाता अंदर जाकर देखा यहां मैन्यूअल वोटिंग  है ,बस अपना वोट एक स्केनर में होते हुए एक केन के हवाले कर दें जिसमें एक स्केनर लगा होता है। कोई अफरा तफरी नहीं बूथ के बाहर ,कोई पुलिस नहीं। वही शालीन क्यू परस्पर वैसी ही दूरी बनाए हुए जैसी यहां के हवाई अड्डों पर चेक इन के दरमियान होती है।

फेसबुक पर आये ,इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर फलेश हुई देखा भारत में हड़कंप मचा हुआ है। मचना चाहिए था हाफ़िज़ के घर में ,बड़े री-अल्टर्स के घरों में ,उनके घरों में जो भारत सरकार की उस योजना में शामिल नहीं हुए जिसमें काले को सफ़ेद धन में बदलने की व्यवस्था थी।

लो एक और खबर फलेश हुई है दलाल स्ट्रीट चीयर्स मोडीज़ स्टेप ,फॉर्गेटस वरीज़ आफ यूएस इलेक्शन्स।

चेतो  मेरे दोस्तों !ये कदम भारत  की सुरक्षा से जुड़ा है। हमारे लोकमंगल से जुड़ा है भारत की तरक्की से जुड़ा है। स्वागत करो तहेदिल से इस कदम का -ये काम वही कर सकता था -'जिसके आगे नाथ न पीछे पगा।'जो निष्कामता के साथ भारत के लिए काम कर रहा है बिना सुस्ताए। 

एडिट प्लेटर का विश्लेषण इस मुद्दे पर हर बार की तरह इस दफह भी मानवीय पहलु को साथ लिए आया ,बधाई एडिट प्लेटर यु आर ऑल्वेज़ पॉज़िटिव ,आपके लिए देश सबसे ऊपर रहा है।

https://www.facebook.com/EditPlatterHindi/

राहुल की ताजपोशी पर अब ये ही कहा जा सकता है - शेख ने मस्ज़िद बना ,मिसमार मयखाना किया , पहले कुछ सूरत तो थी अब साफ़ वीराना किया।


      1. राहुल की ताजपोशी पर अब ये ही कहा जा सकता है -
        शेख ने मस्ज़िद बना ,मिसमार मयखाना किया ,
        पहले कुछ सूरत तो थी अब साफ़ वीराना किया।
        बेशक जैसा बीज वैसा फल ,तो भी सोनिया मायनो का कुछ तो रोबदाब था ही भले ही वह मदरसे के बालकों की तरह उचक उचक कर रोमन लिपि में लिखा कुछ बोलती थीं जो अक्सर हिंदी जैसा लगता था। राहुल विन्ची को तो कोई सीरियसली लेता ही नहीं है। पहले एक दिगपराजय सिंह थे कांग्रेस में अब दो हो गए। एक अच्छी बात यह भी हो गई नेहरू इंदिरा वंशीय खूँटा अब उखड़ना चाहता है राहुल ने देश पर बड़ा उपकार किया है शादी न करके ,ठीक वैसे ही जैसे रोमन लिपि ने हिंदी की बड़ी सेवा की है।दोनों माँ बेटे इस देश की अब तक न जुबान सीख सकें हैं न मुहावरा। विषय वस्तु से भटकाव की एक बड़ी वजह यही रही है। आपके विश्लेषण से भला हम क्यों इनकार करने लगे ,देश के लिए अच्छे है कांग्रेस को मटियामेट कर देंगें कांग्रसियों को भी। हमारा मानना है जब तक इस देश में एक भी कांग्रेसी है देश को खतरा है ,एक रक्त बीज है हरेक कांग्रेसी।डॉ' कर्ण सिंह एक अपवाद हैं। दूसरा कोई दिखाई नहीं देता। इस पार्टी में आकर सुप्रीम कोर्ट का उकील भी एक परिवार का वकील होकर रह जाता है।
        अमरीकी चुनाव का नज़ारा कल हम भी देखेंगे करीब से ,बतलादें आपको यहां कल आठ नवम्बर को भी सामूहिक अवकाश नहीं है। सुबह सात बजे से रात्रि आठ बजे तक आप अपना वोट कभी भी कर सकते हैं काम पर जाने से पहले भी बाद को भी। आज से ईस्टर्न टाइम एक घंटे और पीछे हो गया है प्रत्येक नवम्बर के पहले सोमवार से यह बदलाव लागू किया जाता है।दिलचस्पी की सारी हदें पर कर गया है अमरीकी राष्ट्रपतीय चुनाव। पहलवान रहे डोनाल्ड ट्रम्प जल्दी हार मान लेने वाले नहीं हैं -बकौल शिवकांत जी ट्रम्प के लिए -'चित्त भी मेरी ,पट्ट भी मेरी ,अंटा मेरे बाबा का। डोनाल्ड ट्रम्प वांट्स बोथ वेज़ विन एन्ड आनली विन -हार नहीं मानूंगा ,राड़ भी पूरी ठानूंगा।
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        Virendra Sharma
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      सोमवार, 7 नवंबर 2016

      कहीं न कहीं अमरीका का चुनाव भी इस सबसे जुड़ा हुआ है ट्रम्प पाक की हदबन्दी करके ....

      अमरीकी राष्ट्रपतीय चुनाव भारत क्या आलमी स्तर पर बेहद की दिलचस्पी की वजह बनता जा रहा है। भले हमारी सदाशयता हिलेरी के साथ रही है लेकिन इस मुद्दे पर जब हमने अपने एक प्रबुद्ध दोस्त डॉ. नन्द लाल मेहता 'वागीश 'जी से बात की तो उनकी दलील काम वजनी नहीं लगी।

      आप केवल भारत के लिए ही नहीं फ्रांस के लिए भी डोनाल्ड ट्रम्प का विजयी होना हितकर बतलाते हैं। जैसे मोदी के भारत से पूर्व का भारत एक सॉफ्ट स्टेट समझा जाता रहा है वही हाल कुछ कुछ फ्रांस का दहशद गर्दों  ने बनाके रख छोड़ दिया है। जब मर्जी होती है आते हैं। ओबामा भले अपनी भलमनसाहत  के लिए जाने जाते रहे ओसामा का भी उन्होंने खात्मा किया लेकिन कभी कहकर इस्लामी आतंकवाद की आलोचना नहीं की। इस दौर में यदि अमरीका को अपना खोया हुआ वैभव और साख ,रूतबा फिर से प्राप्त करना है तो भी डोनाल्ड ट्रम्प का जीतना ज़रूरी है।

      डोनाल्ड ट्रम्प जब अपनी सी पर आते हैं तो सामने वाले पहलवान के बाल तक खौंस लेते हैं सिर्फ पटखनी देकर नहीं छोड़ते ,आज दहशतगर्दों को यदि कोई उनकी बनाई हुई साइकोलॉजिकल जन्नत सच में दिखला सकता है तो वह डोनाल्ड ट्रम्प हैं । पख्तून -भारत -डोनाल्ड ट्रम्प और फ्रांस तथा इस दौर में वह सभी राष्ट्र जो आइसिस के प्रत्यक्ष ,अ -
      प्रत्यक्ष सिंकंजे में आते जा रहे हैं मिलकर ही इस इस्लामी बुनियादपरस्तों के साथ जंग में विजयी हो सकते हैं। पख्तूनों ने मांग की है काशी नगरी को जहां से मोदी नाम का बब्बर शेर चुनाव जीता है पख्तूनों की निर्वासित राजधानी बना दिया जाए ,पख्तूनों को मान्यता दी जाए एक अलग राष्ट्र की फिर देखिये हम खुद ही एक एक करके हाफीज़ सईदों  को सफाया कर देंगें भारत को यह तोहमत नहीं उठानी पड़ेगी।

      कहीं न कहीं अमरीका का चुनाव भी इस सबसे जुड़ा हुआ है ट्रम्प पाक की हदबन्दी करके उसे न सिर्फ आईना दिखला सकते हैं पाक को उसकी सीमा भी  समझा दिखला सकते हैं अभी तक पाक संभावनाओं में ही जीता रहा है।

      (ज़ारी )