शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

नीरज से बढ़के धनी कौन है यहां , उसके हृदय में पीर है सारे जहान की।

बाल कवि के रूप में हमें आशीर्वाद मिला बुलंदशहर के एक कवि सम्मलेन में मंच पर आने का जिसका मुख्य आकर्षण थे -गोपाल दास नीरज। किसी ज़माने में कविता को जन जन तक लाने में आपका अप्रतिम योगदान रहा है। आप धर्म समाज कालिज अलीगढ में साइकिल से पढ़ाने जाते थे। कोई कविता सुनाने की पेश काश करे तो आप रूककर सुनाने लगते थे। ऐसे थे लोकलुभावन भाव जगत के कवि गोपाल दास नीरज। उनका अंदाज़े बयाँ हमारे बीच में सदा रहेगा। 

श्रद्धा सुमन के रूप में उनके चंद अशआर आपकी खिदमत में पढ़ लिख रहा हूँ :


(१)शायद मेरे गीत किसी ने गाये हैं ,

इसीलिए बे -मौसम बादल छाये हैं। 

(२ )अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई ,

मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई। 

(३ )खुश्बू सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की ,

खिड़की खुली है फिर कोई उनके मकान की। 

हारे हुए परिन्द ज़रा उड़ के देख तू ,

आ जायेगी ज़मीं पे चाहत आसमान की। 

ज्यूँ लूट लें कहार ही दुल्हन की पालकी ,

हालत यही थी  कल तक मिरे हिन्दुस्तान की। 

नीरज से बढ़के धनी कौन है यहां ,

उसके हृदय में पीर है सारे जहान  की। 


गुरुवार, 19 जुलाई 2018

महाकाल के हाथ पर गुल होते हैं पेड़ , सुषमा तीनों लोक की कुल होते हैं पेड़।


रो रोकर पुकार रहा हूँ ,

हमें ज़मीं से मत उखाड़ो। 

रक्त स्राव से भीग गया हूँ मैं ,

कुल्हाड़ी अब मत मारो। 


आसमान के बादल से पूछो ,

मुझको कैसे पाला है।  

हर मौसम में सींचा हमको ,

मिट्टी कड़कट झाड़ा है। 

उन मस्त  हवाओं से पूछो ,

जो झूला हमें झुलाया है। 

पल -पल मेरा ख्याल रखा है ,

अंकुर तभी उगाया है। 

तुम सूखे इस उपवन में ,

पेड़ों का एक बाग़ लगाओ। 

रो रोकर पुकार रहा हूँ ,

हमें ज़मीं से मत उखाड़ो। 

इस धरा की सुंदर छाया ,

हम पेड़ों से बनी हुई है ,

मधुर मधुर ये मस्त हवाएं ,

अमृत बन के चली हुई हैं। 

हमसे नाता है जीवों का ,

जो धरा पे आएंगे। 

हम से रिश्ता है जन-जन का ,

जो इस धरा से जाएंगे। 


शाखाएं आंधी तूफानों में टूटीं ,

ठूँठ आँख में अब मत डालो। 

रो रोकर पुकार रहा हूँ ,

हमें ज़मीं से मत उखाड़ो। 


हमहीं कराते हर प्राणी को ,

अमृत का रसपान। 


हमहीं से बनतीं कितनी औषधि ,

नई पनपती जान। 

कितने फल -फूल हम देते ,

फिर भी अनजान बने हो। 

लिए कुल्हाड़ी ताक रहे हो ,

उत्तर दो क्यों बे -जुबां (बे -जान )खड़े हो। 


हम ही से सुंदर जीवन मिलता ,

बुरी नज़र मत मुझ पर डालो। 

रो रोकर पुकार रहा हूँ ,

हमें ज़मीं से मत उखाड़ो। 


अगर ज़मीं पर नहीं रहे हम ,

जीना दूभर हो जाएगा ,

त्राहि त्राहि जन जन में होगी। 

हाहाकार भी मच जाएगा। 


तब पछताओगे तुम बड़े ,

हम ने इन्हें बिगाड़ा है। 

इन्हीं  से  सबको घर  मिलता है ,

हम ने ही इन्हें  उजाड़ा है .




गली गली में पेड़ लगाओ ,

हर प्राणी में आस जगा दो । 

रो रोकर पुकार रहा हूँ ,

हमें ज़मीं से मत उखाड़ो। 


प्रस्तुति :वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई ),

५१ १३१ ,अपलैंड व्यू , 

कैन्टन (मिशिगन )

४८ १८८ 

पर्यावरणी दोहे :'वनदेवी भइँ द्रोपदी कृष्ण बचाओ लाज '-वीरुभाई 

महाकाल के हाथ पर गुल होते हैं पेड़ ,

सुषमा तीनों लोक की कुल होते हैं पेड़। 

यहां श्लेषार्थ है 'गुल 'माने पेड़ और गुल होना माने विलुप्त होना। 

ये तेज़ाबी बारिशें बिजली घर की राख ,

एक दिन होगा भू- पटल वारणावर्त की लाख। 

पेड़ पांडवों पर हुआ जब जब अत्याचार ,

ढांप लिए वटवृक्ष ने तब तब दृग के द्वार। 

शीर्षक :वनदेवी भइँ द्रोपदी कृष्ण बचाओ लाज 

विशेष :टूटते  हुए पर्यावरण हमारी हवा पानी मिट्टी  के बिगड़ते मिज़ाज़ को लेकर आज पर्यावरण विदों से लेकर आम जनता  में  भी जो बे -चैनी है वह साफ़ झलकती है। 

राजधानी दिल्ली वेंटिलेटर पर आ गई है वहां की हवा में सांस लेने का मतलब है नवजात ४४ सिगरेट फूंक रहा है। बिगड़ैल मौसम कभी 'कैटरीना 'बनता है कभी हरिकेन 'मारिया ' मौसम सबको मारेगा बचेगा कोई नहीं। 

यहां अमरीका में नया डिवीजन (कॉलोनी )बाद में बनता है पेड़ पहले रोपे जाते हैं उन्हें स्थानांतरित पहले किया जाता है। शिफ्ट  किया जाता है कहीं और से लाकर। हमारे हिन्दुस्तान में पेड़ काटकर कॉलोनियां बनाई जातीं हैं व्यावसायिक क्षेत्र पनपते हैं पेड़ों के अवशेषों पर। हम अपनी धरोहर को खुद ही  रौंद  रहे हैं।कौन बचाएगा हमें ?

यहां पेड़ों और महिलाओं के साथ समान रूप से बदसुलूकी होती है। 'मदर्स वॉम्ब चाइल्ड्स टॉम्ब ' 

बस महिलाओं पर कन्याओं पर चलने वाला कुलाहड़ा दिखता नहीं है। 

संदर्भ -सामिग्री :

ken p drkp168@gmail.com

2:21 PM (1 hour ago)
to ekmanch[हिंदी Unsubscribe
Ro-rokar pukār rahā hū̇ ,
hamė  jamī̇  se mat ukhād̤o|
raktasrāv se bhīg gayā hū̇  maï ,
kulhād̤ ī ab mat māro|

Āsamā̇  ke bādal se pūchho,
mujhako kaise pālā hai|
har mausam mė  sī̇chā hamako,
miṭṭī-karakaṭ jhād̤ā hai|

Un mȧd havāȯ  se pūchho,
jo jhūlā hamė  jhulāyā hai|
pal-pal merā khyāl rakhā hai,
ȧkur tabhī ugāyā hai|

Tum sūkhe is upavan mė ,
ped̤ȯ  kā ek bāg lagā lo|
ro-rokar pukār rahā hū̇ ,
hamė  jamī̇  se mat ukhād̤o|

Is dharā kī su̇dar chhāyā,
ham ped̤ȯ  se banī huī hai|
madhur-madhur ye mȧd havāė ,
amṛt ban ke chalī huī haï |

Hamī̇  se nātā hai jīvȯ  kā,
jo dharā par āėge|
hamī̇  se rishtā hai jan-jan kā,
jo is dharā se jāėge|

Shākhāė  ā̇dhī-tūphānȯ  mė  ṭūṭī̇ ,
ṭhū̇ṭh ā̇kh mė  ab mat ḍālo|
ro-rokar pukār rahā hū̇ ,
hamė  jamī̇  se mat ukhād̤o|

Hamī̇  karāte sab prāṇī ko,
amṛt kā rasapāna|
hamī̇  se banatī kitanī auṣadhi|
naī panapatī jāna|

Kitane phal-phūl ham dete,
phir bhī anajān bane ho|
lie kulhād̤ī tāk rahe ho,
uttar do kyȯ  bejān khad̤e ho|

Hamī̇  se su̇dar jīvan milatā,
burī najar mujhape mat ḍālo|
ro-rokar pukār rahā hū̇ ,
hamė  jamī̇  se mat ukhād̤o|

Agar jamī̇  par nahī̇  rahe ham,
jīnā dūbhar ho jāegā|
trāhi-trāhi jan-jan mė  hogī,
hāhākār bhī mach jāegā|

Tab pachhatāoge tum bȧde,
hamane inhė  bigād̤ā hai|
hamī̇  se ghar-ghar sab milatā hai,
jo khad̤ ā huā kivād̤ ā hai|

Galī-galī mė  ped̤  lagāo,
har prāṇī mė  ās jagā do|
ro-rokar pukār rahā hū̇ ,
hamė  jamī̇  se mat ukhād̤o| 

सोमवार, 16 जुलाई 2018

6 Harmful Effects of Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi)(HINDI)

पेप्सी बोली सुन कोककोला ,
भारत का इंसान है भोला।
विदेश से मैं आईं हूँ ,
मौत साथ में लाईं हूँ।
लहर नहीं ज़हर हूँ मैं ,
गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं।
पीएच मान मेरा दो पाइंट सात ,
गिरें जो मुझमें गल जाएँ दांत।
ज़िंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं ,
काटे आँतों को वो ब्लेड हूँ मैं।
दूध मुझसे बहुत ,सस्ता है ,
पीये मुझे जो उसकी हालत खस्ता है।
५४० करोड़ कमाती हूँ ,
विदेश में ले जाती हूँ।
मैं पहुंची हूँ आज वहां पर ,
पीने को नहीं जल भी जहां पर।
महंगा पानी मैं सस्ती हूँ ,
रहती अपनी मस्ती मैं हूँ।
छोड़ नकल अब अक्ल से जियो ,
'
जो भी पियो भाई सम्भलके पियो।
नीम्बू नीर पियो मेरे भैया ,
छोड़ पेप्सी कोक मेरे भैया।
पार लगेगी तुमरी नैया।
सबका है यहां कृष्ण खिवैया।

यकीन मानिये प्यास शीतल जल से ही बुझती है चीनी भरी सोडा उसे भड़काती है। फिर दिल करता है जल मिल जाए शुद्ध शीतल जल घड़े सुराही का ठंडा पानी। 

याद रखिये :

(१ )कैफीन ,एसपारटेम ,और परिष्कृत शक्कर (शुगर )की तिकड़ी का डेरा है इन पेयों में ,जो अपेय ही कहे जायेंगे।इनमें से एसपारटेम अनेक रोगों की वजह बनता देखा गया है इसीलिए कथित सॉफ्ट ड्रिंक्स (सोडा )को लेकर कई विकसित देशों में निर्माता कंपनियों के खिलाफ मुकद्दमे  चल रहें हैं वहां की अदालतों में। अलावा इसके कैफीन और परिष्कृत सुगर एक लती कारक खाद्य हैं । अमरीकी बच्चों को किशोरावस्था में प्रवेश लेते लेते ब्रेसेस लग जाते हैं। चेहरा खूबसूअरत मुक्तावलि बदशक्ल। 
मधुमेह का गढ़ बनता जा रहा है अमरीका इसी लत के पीछे पीछे। 

(२ )किडनी फेलियोर की अनेक वजहों में से एक बड़ी वजह बेहद मीडिया हाइप किया गया डाइट ड्रिंक बन रहा है फिर चाहे वह कैसा भी कोला हो ,कोयला ही है।बीमारी है जिसे आप पैसे देकर खरीद रहे हैं।

(३ )किसी भी वर्कआउट के बाद मशक्कत  का काम या व्यायाम कैसी भी थकाऊ कसरत के बाद गुनगुने गर्म पानी का सेवन आपकी  कैलरी बर्न करने की रफ़्तार को बढाए रहता है। चीनी लदे सॉफ्ट पेय इसे शीथिल बना देते हैं घटा देते हैं अलावा इसके हमारे शरीर में से चर्बी को जलाने वाले एन्ज़ाइम्स का देखते देखते ही सफाया कर देते हैं। बस हो गया आपका स्रावी तंत्र नाकारा। लो कल्लो बात :सोडा  पीने  वालों की बात ही कुछ और है।दिल करता है प्यास बुझे। 

(४ )चोली दामन के संगी मोटापा और मधुमेह (ओबेसिटी एन्ड डायबिटीज ):सोडा बोले तो  ऐरेटिड कोला ड्रिंक्स के बढ़ते चलन के साथ मोटापा और मधुमेह भी साथ -साथ रहते हैं हमारे  . 

मोटापा सब रोगों की अम्मा है तो मधुमेह उस अम्मा की भी अम्मा है :दिल फेफड़ा गुर्दे सब इस दुरभिसंधि के लपेटे में आ जाते हैं। मधुमेह ग्रस्त लोगों को खासकर इस पेयों से छिटकना चाहिए। खून में मंडराती शक्कर का स्तर झटपट दोगुना हो जाता है इन कोला पेयों के डकारने के तुरत बाद। 
अधुनातन शोध का इशारा रहा आया है :कैंसर पैदा करने वाली कोशाओं को भी बढ़ावा देतें हैं ये पेय। 
(५ )मुक्तावलि और अस्थियों की खैर नहीं :

हाइड्रोजन पोटेंशिअल  बोले तो pH 3.2 है इन कोला पेयों का उस नियत पैमाने पर रहता जो ये तय करता है के कोई पेय अम्लीय(एसिडिक ) है या क्षारीय (एल्कलाइन ). बस दन्तावली के साथ ये तेज़ाबी स्तर खुलके खेलता है। दांतों की आब इनेमल ले उड़ता है कोला। खोखला बना देता है दांतों को। 
(६ )कोला केस कोला कैन्स सुरक्षित भी नहीं हैं इन पेयों की सेल्फ लाइफ के लिए। इनकी दीवारों से ऐसे घटक रिसते  हैं जो प्रजननं संबंधी समस्याएं इनके लगातार सेवन और लत से पैदा होतीं हैं। 
What Does pH Stand For?
Have you ever wondered what pH stands for or where the term originated? Here is the answer to the question and a look at the history of the pH scale.
Answer: pH is the negative log of hydrogen ion concentration in a water-based solution. The term "pH" was first described by Danish biochemist Søren Peter Lauritz Sørensen in 1909. pH is an abbreviation for "power of hydrogen" where "p" is short for the German word for power, potenz and H is the element symbol for hydrogen. The H is capitalized because it is standard to capitalize element symbols. The abbreviation also works in French, with pouvoir hydrogen translating as "the power of hydrogen"
https://www.healthy-drinks.net/6-harmful-effects-of-drinking-coca-cola-coke-or-pepsi/

6 Harmful Effects of Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi)

Jogged, walked, worked, and feeling tired ? A soft drink refreshes the body instantly. The magic of the fizz seems to soothe the nerves and the mind at such times. And so consequently, according to studies, about 90% of moderate income population prefers soft drinks like Coca Cola or Pepsi after a tiring day.
What is this drink ? 
Coca Cola and Pepsi are such products that have been scrutinized by the environment and human rights department for inducing bad and unhealthy food products. The brands are symbolic of all soft drinks that are nothing but sugar or artificially sweetened sodas with color.
Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi – Side Effects
The trend of having these beverages increased with the introduction of Diet versions. These versions claim to have no added sugar which can keep a check on the weight factor. Teenagers and women, especially, have been reported to consume this product ever more than before.
With a number of more companies coming up with similar products, the researches done by some of the universities seem to be undone. However, if you are reading this article be sure about certain facts before touching your lips to another can of Coca Cola or Pepsi.

Harmful Effects of Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi

The particulars mentioned here are merely the reproductions of the results concluded by some of the known universities around the world. It has been observed that consumption of soft drinks must be checked as soon as possible.
A glass of cold water can be less attractive but is much healthier and better choice in terms of survival. It is always better to prevent than to cure.
1) Caffeine, Sugar and Aspartame: These products are invariably present within the sweetened soft drinks. Coca Cola and Pepsi have been under lawsuits in some of the developed countries against using Aspartame which causes several diseases. Children should be strictly restricted from consuming products with Aspartame. Furthermore, caffeine and sugar are very addictive leading to another set of diseases like diabetes and a life-long habit of inducing caffeine in the body.
2) Kidney Failures: The sweet sugar is definitely not the reason for a failing kidney but the artificial sweeteners are. Hence consuming Diet versions of Coca Cola or Pepsi have proved to produce more impairment than the sweet versions.
3) Metabolism Level Decreases: A glass of warm water can speed up you metabolic rate but may taste awful after a workout session. A can of Coke can surely be tasty but it really decreases the metabolism and helps in destroying the fat burning enzymes in no time. Thus a can of either Diet Coke or simple Coca Cola after a rigorous workout or busy day is strictly not advisable.
4) Obesity and Diabetes: Obesity was never a major problem when Coca Cola or similar products were not introduced. But with an advent of these products, a major portion of the population is turning obese which includes children and teenagers.
Obesity is the root of diseases that affect heart, lungs, and kidney. Researches have also been proving that obesity may be a cause to trigger cancer cells.
Similarly, patients with diabetes must never touch beverages like Coke or Pepsi since it increases level of sugar in blood by twofold. Non-diabetic persons should avoid these drinks in order to keep diabetes away.
5) Teeth and Bone Damage: The pH level of Coke or Pepsi is 3.2 which are quite high. This pH level decides the acidic nature of a liquid. Hence these beverages are acidic in nature and can dissolve bones and enamels very quickly.
6) Reproduction problems: A research has shown that the cans of Coke or Pepsi are coated with such chemicals that may lead to reproduction problems with regular consumption.

Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi - Side Effects
Drinking Coca Cola (Coke) or Pepsi – Side Effects

रविवार, 15 जुलाई 2018

नीम्बू नीर पियो मेरे भैया , छोड़ पेप्सी कोक मेरे भैया

पेप्सी बोली सुन कोककोला ,

भारत का इंसान है  भोला।

विदेश से मैं आईं हूँ ,

मौत साथ में लाईं हूँ।

लहर नहीं ज़हर हूँ मैं ,

गुर्दों पर गिरता कहर  हूँ मैं।

पीएच मान मेरा दो पाइंट सात ,

गिरें जो मुझमें गल जाएँ दांत।

ज़िंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं ,

काटे आँतों को वो ब्लेड हूँ मैं।

 दूध मुझसे बहुत  ,सस्ता है ,

पीये मुझे जो उसकी  हालत खस्ता है।

५४० करोड़ कमाती हूँ ,

विदेश में ले जाती हूँ।

मैं पहुंची हूँ आज वहां पर ,

पीने को नहीं जल भी जहां पर।

महंगा पानी मैं सस्ती हूँ ,

रहती अपनी मस्ती मैं हूँ।

छोड़  नकल  अब अक्ल से जियो ,
'
जो भी पियो भाई सम्भलके पियो।

नीम्बू नीर पियो मेरे भैया ,

छोड़ पेप्सी कोक मेरे भैया।

पार लगेगी तुमरी नैया।

सबका है यहां कृष्ण खिवैया।








शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

उड़ जा ,उड़जारे काले से काग ,मेरी माँ ने जाके कह दिए , तेरी बेटी के हुआ नंदलाल ,तेरी तेरी बेटी मांगे पीलिया

उड़ जा ,उड़जारे काले से काग ,मेरी माँ ने जाके कह दिए ,

तेरी बेटी के हुआ नंदलाल ,तेरी   तेरी बेटी मांगे पीलिया। 

उड़ जा ,उड़जारे काळे से काग, मेरी बेटी ने जाके कह दिए ,

हो घर में बहु-बेटा का यो राज ,हम कित ते भेजें पीलिया। 

उड़  जा ,उड़जा रे  काले से काग, मेरी भाभी ने जाके कह दिए ,

हो तेरी नड़दन के हुआ नंदलाल ,तेरी नड़दी मांगे पीलिआ। 

उड़ जा उड़जारे काले से काग ,मेरी ,नड़दी  ने  जाके कह दिए ,

री वा ते  तो रोज़ जनेगी नंदलाल ,हम कित ते भेजें पीलिया। 

उड़ जा उड़जारे काले से काग ,मेरी बहना ने जाके कह दिए ,

तेरी बहना के हुआ नंदलाल ,तेरी बहना  मांगे पीलिया ,

उड़ जा उड़जा रे काले से काग ,मेरी बहना ने जाके कह दिए ,

री वो तो रोज़ जानेगी नंदलाल ,हम रोज्जे भेजें पीलिया। 

भले लोग संगीत की माधुरी के अलावा परम्परा की हूक भी है इस परम्परागत हरियाणवी बंदिश में। लेकिन आज के बदले हुए सन्दर्भों में जब मांग जांच को लेकर सनातन धर्मी भारत धर्मी समाज में पर्याप्त हंगामा है ,किसी लड़की का यूं मुंह खोलके मांगना -पीड़िया (यहां पीलिया में ल और ड़ के बीच की ध्वनि है ,ल के नीचे बिंदी जड़िये )या कोई और नेग थोड़ा अटपटा सा ज़रूर लगता है। हरियाणा जैसे राज्यों में तो लड़की के आने पे ही गर्भ पे पहरा है। लड़कियाँ कमतर होती जातीं हैं। जहाज हवाई ही नहीं सात समुन्द्र की यात्रा कर रहीं हैं आज भारतीय नेवल फोर्सिज की युवतियां। मांग जांच कैसी। बदलो इन लोकगीतों को ढालों आधुनिक हालातों में इनकी  शब्दावलियों को यही श्रेय का मार्ग है प्रेय के मार्ग में बहुत बाधाएं हैं सब माया ही माया बंधन ही बंधन हैं यहां। 

आप अपनी राय जताइए ,बड़ी मेहरबानी होगी। इस विमर्श को आगे बढ़ाइए। 

सन्दर्भ -सामिग्री :YOUTUBE.COM


मंगलवार, 10 जुलाई 2018

New study quantifies the link between smoggy air and diabetes

New study quantifies the link between smoggy air and diabetes


एक अभिनव अनुमान  के अनुसार बरस २०१६ में दुनियाभर में कुल मिलाकर डायबिटीज (जीवनशैली रोग मधुमेह )के बत्तीस लाख नए मामले दर्ज़ किए गए। 

हमारी हवा में मंडराते तैरते ठोस सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को पलीता लगाते रहें  हैं चाहे फिर वह सीएनजी हो या पेट्रोल और डीज़ल चालित वाहन ,धुंआ उगलती किसी उद्योग की चिमनी हो या फ़िर हमारी हवा में सम्पन्न रासायनिक क्रियाओं से व्युत्पन्न पार्टिकुलेट फाइन मैटर। 

मुद्दा ये नहीं है इनमें से कौन एक स्रोत ज्यादा कुसूरवार है ,मुद्दा हवा की छीजती गुणवत्ता के फलस्वरूप पर्यावरणी रोगों की नै सौगात :मधुमेह से जुड़ा है। 
लगातार बने रहने वाले हृद रोगों एवं शक़्कर की बीमारी डायबिटीज का संबंध वायु में पसरे प्रदूषकों से साइंस न्यूज़ पहले भी बतला   चुका है।

ताज़ा संदर्भित अध्ययन इसका संख्यात्मक (मात्रात्मक )कयास भर प्रस्तुत करता है  . युद्ध काल में अपने देश अमरीका की सैन्य सेवा करने वाले पुराने सिपाहियों सैन्य दिगज्जो की तकरीबन एक दशक तक जांच पड़ताल कर लेने  के बाद ही ये कयास लगाए गए हैं के इनमें से कितनों को जीवन शैली रोग मधुमेह का खतरा बढ़ चुका है। 
भूमंडलीय स्तर पर संपन्न अन्य अध्ययनों का भी इन अनुमानों तक पहुँचने के लिए इस्तेमाल किया गया है। अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा के अलावा हवा की गुणवत्ता की निगहबानी करने वाली संस्था अमेरिकन एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी से भी वायु के गुणवत्ता से संबंधित आँकड़े  जुटाए गए हैं। 

विज्ञान पत्रिका 'लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ' ने जुलाई में ही यह कयास प्रस्तुत किया है :

"भूमंडलीय स्तर पर डायबिटीज के कुल १४ फीसद नए मामलों के लिए वायु 

प्रदूषण को निशंक जिम्मेवार ठहराया जा सकता है। "
बेशक इस जीवन शैली रोग के खतरे के वजन को  बढ़ाने में वंशावली ,खानपान ,हमारी सक्रियता या अक्रियता (निठल्लापन ),परिवारों में रोग का पूर्ववृतान्त भी भागेदारी करता ही है। 
इन तमाम बातों के चलते विश्वस्वास्थ्य संगठन के एक आकलन के अनुसार फिलवक्त दुनियाभर में ४२ करोड़ बीसलाख लोग (४२२ मिलियन )इस जीवन शैली रोग के साथ तालमेल बिठाने में मशगूल हैं इसका प्रबंधन दिन रात करते हैं। 
१९८० में कुलमिलाकर  दस करोड़ अस्सी लाख लोग ही इसकी चपेट में थे। 
बिला शक वायु प्रदूष्ण से भी जुड़ी है मधुमेह की नव्ज़ :

 इस तथ्य की पुष्टि पाक -भारत -चीन में प्रदूषण  के अनुरूप ही प्रदूषण संबंधी मधुमेह की बढ़ी हुई दर शेष देशों से बढ़त बनाये हुए है।
जबकि उत्तरी अमरीका में भी अपेक्षाकृत स्वच्छ वायु के रहते भी यह दर ज्यादा बनी हुई है (जिसकी इतर वजहें भी वहां मौजूद हैं )खाये पिए अघाये लोगों का मुल्क है अमरीका।                   
Air pollution caused 3.2 million new cases of diabetes worldwide in 2016, according to a new estimate.

Fine particulate matter, belched out by cars and factories and generated through chemical reactions in the atmosphere, hang around as haze and make air hard to breathe. Air pollution has been linked to chronic conditions such as heart disease and diabetes (SN: 9/30/17, p. 18), but this study is one of the first attempts to quantify the connection for diabetes. Researchers tracked 1.7 million U.S. veterans for almost a decade to assess their risk of developing diabetes. They also used data from global studies on diabetes risk, as well as air quality data from the U.S. Environmental Protection Agency and NASA, to create equations that analyzed the connection between air pollution exposure and diabetes globally.

The new estimate, reported in July in The Lancet Planetary Health, holds air pollution responsible for about 14 percent of new cases of diabetes worldwide. Factors such as genetics, weight, activity level and diet also influence the risk of the disease, which is on the rise globally. (The World Health Organization estimates that 422 million people now live with type 2 diabetes — up from 108 million in 1980.)
The burden isn’t the same around the globe: Unsurprisingly, countries with high pollution levels, such as Pakistan, India and China, also have especially high rates of air pollution-linked diabetes. The United States, which now has comparatively clean air, is also high on the list.

Reference :https://www.sciencenews.org/article/air-pollution-triggering-diabetes-in-millions-each-year?tgt=nr

सोमवार, 9 जुलाई 2018

जिनके पुरखे सरदार वल्ल्भभाई पटेल को इसलिए ना पसंद करते थे ,क्योंकि वह किसान थे .......

जिनके पुरखे सरदार वल्ल्भभाई पटेल को इसलिए ना पसंद करते थे ,क्योंकि वह किसान थे ,वह आज किसानों की बात करते हैं।जानते तो वह (नेहरुपंथी कांग्रेसी अवशेष )हिन्दुस्तान के बारे में भी कुछ नहीं हैं। अलबत्ता अपनी कुर्सी छिन जाने के बाद वह पुन : सत्ता प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान से भी हाथ मिलाने को भी तैयार हैं। 

जेहादियों और चर्च का भी सहयोग ले रहे हैं। हिन्दुस्तान को विखंडित करने की हर जुगत हर चाल वह चल रहे हैं कभी शरीयत क़ानून और शरीयत अदालतों की बात करके कभी कश्मीर में प्रतिरक्षा बलों पर पत्थर  फिंकवाने वाले सिरफिरों की हिमायत में आकर। 

जिनके पिताजी गन्ने के कारखाने लगवाने चाहते थे और वह शहज़ादे खुद भी आलू के कारखाने लगवाने की बात करते रहें हैं वह अपने आप को जब किसानों का तरफ़दार बतलाते हैं तब हंसी आती है उन्हें लेकिन शर्म नहीं आती। 

किसानों के लिए जो करते हैं वह ढोल नहीं पीटते आज देश का किसान खुश है तो उनकी वजह से खुश नहीं है जिन्होनें  इन्हें बीज के लिए भी मोहताज़ कर दिया था।  

जय जवान जय किसान का उद्घोष करने वाले लाल बहादुर शास्त्री  थे। नेहरुवंशियों ने किसानों की क्या हालत कर दी थी सब जानते हैं। लेकिन वह आज भी खुद पे शर्मिंदा नहीं हैं।किसान और किसानी की बात करते उन्हें ज़रा भी शर्म नहीं आती।