बुधवार, 21 जुलाई 2010

टिन्नी-टस की एक वजह आपका सेल फोन भी हो सकता है ?

रेग्युलर मोबाइल यूज़ मेक्स ईयर्स बज (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,जुलाई २१ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )।
यदि आप गत चार सालों से लगातार मोबाइल फोन का कमसे कम १० मिनिट रोजाना स्तेमाल कर रहें हैं,दोनों कानों का इस एवज स्तेमाल कर रहें हैं , तब आपके लिए टिन्नी -टस के खतरे का वजन दोगुना ज्यादा हो जाता है ।
टिन्नी -टस :आम भाषा में कह देतें हैं कान बजना ,भिनभिनाहट ,रिंगिंग या फिर बजिंग इन दी ईयर्स .लगातार रिंगिंग (छोटी घंटी की उच्च आवृत्ति ध्वनी का सुनाई देना ),रोअरिंग साउंड्स सुनाई देते रहना ,जबकि ये ध्वनी आपके परिवेश में अब हों या ना हों .एक अशक्त बना देने वाली मेडिकल कंडीशन ,जो कान की अंदरूनी कोशाओं के डेमेज (विनष्ट होने से )पैदा हो सकती है,टिन्नी -टस कहलाती है ।
उच्च तीव्रता और दीर्घकालिक मोबाइल का स्तेमाल भी इसकी(टिन्नी -टस ) अनेक वजहों में से एक हो सकता है .
वैसे इसकी आम फ़हमवजह ट्रौमा ,शोर शराबे के बीच रहने की विवशता (एक्सपोज़र तू लाउड नोइज़ ,हाई -पिच्द,हाई -डेसिबल नोइज़ ),डिप्रेशन ,रिडन -डेन्सी,बीमारी आदि भी बनतें हैं .
फिलवक्त दुनिया भर में लाखों लोग इससे ग्रस्त हैं .इन्हें दिन रात रशिंग ,रोअरिंग ,हाई -पिच्द टोंस सुनाई देतीं रहतीं हैं .दोनों कानों का हेड फोन्स,मोबाइल्स के लिए, स्तेमाल करने वाले इसकी दोगुना ज्यादा चपेट में आ सकतें हैं ।
विज्ञान प्रपत्र जर्नल ओक्युपेश्नल एंड एन्वाय्रंमेंटल मेडिसन में इस अध्धय्यन के बारे में विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित हुई है . बकौल इस रिपोर्ट के टिन्नी -टस की व्यापकता घटने का नाम नहीं ले रही है .मोबाइल से पैदा माक्रो -वेव एनर्जी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है ।
हंस -पीटर हैटर (हत्तेर )इंस्टिट्यूट ऑफ़ एन्वाय्रंमेंटल हेल्थ ,यूनिवर्सिटी ऑफ़ विएन्ना (ऑस्ट्रिया )ने टिन्नी -टस से ग्रस्त १०० लोगों की तुलना इतने ही सामान्य, इस चिकित्सा स्थिति से मुक्त लोगों से की है ।
अलबत्ता लोगों ने जो कुछ बतलाया है उसे सही मान लिया गया है .भरोसा ना करने की भी कोई वजह नहीं है .ऐसा लगता है "इस की एक वजह "हाई -इन्तेसिती एंड लॉन्ग ड्यूरेशन ऑफ़ मोबाइल फोन यूज़भी बन रहा है .इसका व्यक्ति की कार्य कारी क्षमता पर साफ़ असर दिखलाई दे रहा है .इसका इलाज़ नहीं है .बचाव भर है .हेड फोन्स और मोबाइल का स्तेमाल कम कीजिये ।
सन्दर्भ -सामिग्री :-रेग्युलर मोबाइल यूज़ मेक्स ईयर्स बज (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,जुलाई २१ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )

4 टिप्‍पणियां:

Jandunia ने कहा…

nice

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

jaankari ke liye shukriya !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी