क्या ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस और ओस्टियो -पोरोसिस पर्यायवाची शब्द हैं एक ही रोग के दो नाम है ?अश्थी -सुशिर्ता (अश्थियों के कमज़ोर होकर भंगुर पड़ जाने का रोग यानी ओस्टियो -पोरोसिस ) तथा अश्थी -संधिवात(ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस ) दो अलग अलग मेडिकल कंडीशंस हैं ।
अस्थि -सुशिर्ता /ओस्टियो -पोरोसिस में लोस ऑफ़ बोन मॉस की वजह से बोन डेंसिटी (अश्थी घनत्व ) कम होने से अश्थी (बोन )कमज़ोर होकर एक दम से भुर -भूरी /भंगुर हो जाती है उठते बैठते भी टूटने लगतीं हैं ।
अस्थि -सुशिरता (ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस )एक जोड़ों का रोग है .जिसमे उपास्थियाँ (कार्टी -लेजिज़ ,हड्डियों के जोड़ों पर सु -ढृढ़ पदार्थ ) जो जोड़ों के लिए एक गद्दी/कशन का काम करती हैं नष्ट होने लगतीं हैं .काल्तिलेज प्रोटीनों का बने होतें हैं ।
क्या ओस्टियो -आर्थराई -टिस महज़ बुढापे का रोग है ?
बेशक उम्र के साथ जोखिम बढ़ता जाता है अश्थी -सुसिर्ता की चपेट में आ जाने का लेकिन यह रोग सभी उम्र के लोगों को असर ग्रस्त कर सकता है .भारत में यह दूसरा२५-३० साला युवा भीड़ में हो जाने वाला सबसे आम रोग है ।
भारत में इसके रोगियों की तादाद १२% है ।
क्या यह रोग ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस आज भी ला -इलाज़ है ?
रोग निदान समय से हो जाने पर तथा सही रोग प्रबंधन के साथ पीड़ा के अतिरिक्त कई किस्म की रोग से जुडी डिस -एबिलिटी से बचा जा सकता है .बेशक है यह रोग आदिनांक ला -इलाज़ ही बना हुआ है ।
क्या जाड़ा(कोल्ड वेदर )इस रोग कि वजह बनता है ?
जाड़ा रोग की न तो वजह बनता है न रोग के एक चरण से दूसरे में जाने के लिए कसूरवार है अलबत्ता जाड़े में जोड़ों का दर्द /तकलीफ तथा स्टिफनेस(अकड़ाव)बढ़ जाता है ।
क्या यह पैदाइशी रोग है आपकी जींस में चला आया है पीछे से ?या इसकी खानदानी वजहें नहीं हैं ?
इसका सम्बन्ध जेनेटिक्स (आनुवंशिक वजहों ,हमारी जीवन इकाइयों से जोड़ा गया है )से सम्बद्ध पाया गया है .मर्दों के बरक्स औरतों को जयादा घेरता है ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस .आम तौर पर उसी उम्र में और उसी जोड़ में यह दर्द बेटी को भी आ दबोचता है जिस उम्र में इसने माँ को परेशान किया होता है ।
हाई हील्स (स्टिलेतो शूज़ ) आर हाई रिस्क ?क्या ऊंची एडी के जूते चप्पल रोग को बढा देतें है ?
दरअसल इन -अप्रो -प्रियेत शूज़ रीढ़ (स्पाइन )में दर्द की वजह बनतें हैं ,कमर दर्द की वजह बनतें हैं .ब्लड प्रेशर भी बढा देते हैं लेकिन ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस के सन्दर्भ में यह भ्रात धारणा है .,सही नहीं है ऐसा मानना ।
स्टेप अप तू बर्न केलोरीज़ .लोगों में भ्रांत धारणा है जीना चढने उतरने से ,केलोरीज़ जयादा बर्न होती है इस रोग में फायदा होता है ।
यथार्थ यह है जीना चढ़ना कसरत में शुमार नहीं होगा (ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस के सन्दर्भ में )क्योंकि इस प्रक्रिया में सारा बोझ /दवाब घुटनों पर पड़ता है ।
विशेष :ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस को डि -जेंरेतिव आर्थ -राय -टिस भी कहा जाता है .एक्स्सेस वेट ,जीवन शैली (गलत खान- पान),कोई चोट तथा खानदानी वजहें जोड़ों की उपास्थि (कार्टिलेज )की टूट -फूट /विअर अवे की वजह बनतें हैं ।
बचाव :यदि वजन जयादा है तो जीवन शैली दुरुस्त करके कम कीजिये .इसके लिए फिजिकल थिरेपी ,कसरत तथा चिकित्सा ज़रुरत के मुताबिक़ कीजिये ।
यदि दर्द चिकित्सा से जा ही नहीं रहा है आपका रूटीन असर ग्रस्त हो रहा है आप रोजमर्रा के काम नहीं कर पा रहें है वैकल्पिक चिकित्सा भी असरदार सिद्ध नहीं हो रही है तब सर्जरी का सोचिये ।
वैकल्पिक चिकित्सा के तौर पर आजकल ५ इंजेक्सन लगाए जा रहें हैं .ये रोग को बढ़ने से एक चरण से दूसरे चरण /फेज़ तक जाने से रोकते हैं ,रोग को मुल्तवी रखने में भी मददगार हैं .पीड़ा रहित हैं ये सुइंयाँ जो रोग के बेहतर प्रबंधन में सहायक हैं ।
सन्दर्भ -सामिग्री :बोन अल्टीमेटम .डॉ मिलिंद पड -गओंकर (पड़ -गाओंकर ) ,कंसल्टिंग ओर्थो -पीदिक सर्जन ,लीलावती हॉस्पिटल ,मुंबई ) डि -बंक्स ए फ्यू ऑफ़ डि न्युम्रस मिथ्स देत सराउन्ड्स ओस्टियो -आर्थ -राय -टिस (मुंबई मिरर ,फरवरी ११ ,२०११ ,पृष्ठ ३१ ).
शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011
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