लेस स्लीप लिंक्ड टू स्ट्रोक (मुंबई मिरर ,फरवरी १० ,२०११ ,पृष्ठ २९ )।
वारविक मेडिकल स्कूल के रिसर्चरों ने पता लगाया है दीर्घावधि ज़रूरी नींद से महरूम (वंचित )रहना ,नींद का विच्छिन्न होना बार बार आँख खुल जाना ,सेहत के लिए इक गंभीर मसला बन जाता है ।
माहिरों ने इसका सम्बन्ध ब्रेन अटेक(स्ट्रोक ),दिल के दौरों और हृद्वाहिकीय (कार्डियो -वैस्क्युलर डिस -ऑर्डर्स)से जोड़ा है .जो अकसर मौत की भी वजह बन जातें हैं ।
विश्वविद्यालय के अकादमीशियनों के मुताबिक़ ६ घंटे से कम नींद तथा नींद में खलल पड़ते रहने सेदीर्घावधि में हृद रोग हो जाने तथा इन रोगों से मौत का ख़तरा ४८ %तथा स्ट्रोक का तथा तद्जन्य मौत के खतरे का वजन भी १५ %बढ़ जाता है ।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ वारविक मेडिकल स्कूल के रिसर्चरों ने यह निष्कर्ष ७-२५ साल तक के लम्बे अध्ययन के दरमियान हासिल आठ देशों के ४७००००प्रतिभागियों से जुटाए साक्ष्यों के आधार पर निकालें हैं ।
दरअसल 'क्रोनिक शोर्ट स्लीप '(पुरानी पड़ चुकी कम नींद की शिकायत में )शरीर में कुछ ऐसे हारमोन पैदा होने लगतें हैं जो हृद रोगों के साथ साथ सेरिब्रल वैस्क्युलर एक्सीडेंट (ब्रेन अटेक ,स्ट्रोक )तथा हाई ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज़ ,ओबेसिटी ,कोलेस्ट्रोल के खतरे के वजह को भी बढा देतें हैं ।
रात भर में ७ घंटा नींद आपको तंदरुस्ती को बनाए रखने के लिए अच्छी है .रात भर में ९ घंटा से भी ज्यादा लगातार सोते
रहना भी ठीक नहीं है .कार्डियो -वैस्क्युलर डिसीज़ की तरफ इशारा है .माहिरों का यही निषकर्ष है इस शोध की खिड़की से .
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
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