अन -हेपी मील ?जंक फ़ूड लोवर्स चिल्ड्रन्स 'आई क्यू '(दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,फरवरी ९ ,२०११ ,पृष्ठ २५ )।
चस्का जंक फ़ूड का बच्चों के बुद्धि -कोशांक /आई क्यू को घटाता है ,भले ही माँ -बाप के हाथ में यह इक हथियार को उन्हें खुश करने ,संतुष्ट ,शांत करने का .हो सकता है कुछ काम काजी व्यस्त माँ -बाप को यह ना -गंवार भी गुजरे .लेकिन रिसर्च तो रिसर्च है .हमारा काम है दूध का दूध पानी का पानी करना .चयन आपका है ।
रिसर्चरों के अनुसार ब्रिटेन के वे बच्चे जो चार साल से नीचे थे तथा शक्कर ,और चिकनाई से लदी,संशाधित खाद्यों की खुराक ले रहे थे वह तमाम ४००० बच्चे ८-८.५ साल के होते होते ब्रेन पावर में पिछड़ गए ।
"देयर आई क्यू फेल बाई १.६७ फॉर एवरी इनक्रीज ऑन ए चार्ट व्हिच रिफ्लेक्तिद हाव मच प्रोसेस्ड फ़ूड/फैट दे एट।"
यह नुकसानी मुकम्मिल रही ।
अपने अनेक साला अध्ययन में ब्रिस्टल विश्विद्यालय के रिसर्चरों ने नौनिहालों की खुराक का जायजा तीन ,चार ,सात और साढ़े आठ साल की उम्र में लिया ।
पता चला ४ और सात साल की उम्र में खुराक आई क्यू को असर ग्रस्त नहीं करती है ।
लेकिन -
शुरूआती दौर (चार साल से नीचे )में पूअर खुराक ,फैट ,सुगर ,संशाधित खाद्य ८.५ साल की उम्र में आई क्यू पर भारी पडती है ।
जबकि इस दौर में स्वास्थ्य- कर खुराक आई क्यू को इक आदर्श मान की ओर भी ले जा सकती है .ओप्तिमल ब्रेन ग्रोथ के लिए भी अच्छी है ।
बेशक बुद्धि तत्व ओर बालपन के शुरूआती दौर की खुराक अभी और शोध की गुंजाइश और मांग करती है लेकिन बच्चों के बढवार और अच्छे स्वास्थ्य के लिए इक संतुलित पुष्टिकर तत्वों से भरपूर खुराक से कैसे इनकार कीजिएगा .जैसा अन्न वैसा मन .खाने को विविधता पूर्ण बनाइये फिर भले ही थोड़ा ट्रीट भी सही लेकिन ट्रीट पर /तुरत परोसे जाने वाले बासा भोजन पर समय बचाने के लिए निर्भरता कैसी ?
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