शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

मधुमेही (डायबेटिक)के पांव तथा टांगों में धीमे रक्त प्रवाह का मतलब क्या है ?

मधुमेह में रोग पुराना पड़ जाने पर,बद सुगर पर नियंत्रण न रहने पर पाँव तथा टांगों की ब्लड वेसिल्स (रक्त नलिकाएं )सिकुड़ जाती है जिससे रक्त प्रवाह (पांवो तथा टांगों को होने वाली रक्तापूर्ति )धीमी पड़ जाती है .खराब नसों /नाड़ियों के कारण भी प्रवाह में रुकावट आ सकती है .ईसीए मधुमेह के रोगी का पाँव नीला पड़ जाता है .पाँव में दर्द तथा जकड़न रहने लगती है .टांग के घायल होने की संभावना बढ़ जाती है .चोट लगने पर इन्फेक्सन (रोग संक्रमण )का ख़तरा भी बढ़ जाता है .इसलिए पांवों की संभाल बेहद ज़रूरी हो जाती है ।
पाँव को सुरक्षित गर्म ,साफ़ सुथरा रखना संभावित खतरों से बचाए रखने में ज़रूरी हो जाता है ।
रक्त प्रवाह को सुचारू बनाए रखने के लिए :
(१)रोजाना व्यायाम /कसरत करें .लेकिन अति से बचे .(२)बुढापें में घूमते फिरते टहल कदमी करतें रहें .अपना काम खुद करें .इक जगह बैठकर हुकुम न चलायें .(३)रिवोल्विंग चेयर पर बैठने कि कोशिश करें .टांगें मोड़ कर न बैठें .फैलाकर बैठें .(४)तंग कपडे न पहने .(५)सफ़र चाहें हवाई हो या रेल का घंटा दो घंटा बाद खड़े होकर स्त्रेत्च करें शरीर को .मांसपेशियों को आराम दें.इक जगह न बैठें रहें .(६)स्मोकिंग से धमनियां अन्दर से खुदरी /कठोर तथा संकरी पड़ जाती है .निकोटिन से हर हाल बचें .पेसिव स्मोकिंग भी घातक है .धूम्रपान से पाँव की नलिकाओं में रोग हो सकता है .

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