शुक्रवार, 27 मई 2011

हाव इज दी सिकिल सेल एनीमिया डाय्ग -नोज़्द?

ब्लड स्मीयर टेस्ट :टेस्टिंग इज टिपिकाली पर्फोर्म्द ऑन ए स्मीयर ऑफ़ ब्लड युसिंग ए स्पेशल लो -ऑक्सीजन प्रिप्रेशन .बस सूक्ष्म दर्शी की शक्ति -शाली आँख सिकिल्ड (विकृत हंसिया के आकार की कोशाओं )को देख लेती है .स्मीयर का मतलब होता है माइक्रो -स्कोप स्लाइड पर "एक सेल साम्पिल को फैला देना "जो खून में मौजूद रहतीं हैं .(सर्विकल स्मीयर ,पिप स्मीयर से आप परिचित हैं ).
इस परीक्षण को "सिकिल प्रेप "कहा जाता है .
कुछ दूसरे "प्रेप" परीक्षण भी खून में मौजूद एब्नोर्मल हिमोग्लोबिन (सिकिल्ड हिमोग्लोबिन या हिमोग्लोबिन एस )का पता लगाने के लिए किये जा सकतें हैं मय सोल्युबिलिती टेस्ट्स के ।
सोल्युबिलिती टेस्ट्स आर पर -फोर्म्ड ऑन ट्यूब्स ऑफ़ ब्लड सोल्यूशंस ।
हिमोग्लोबिन इलेक्ट्रो फोरिस टेस्ट :यह परीक्षण सामान्य (नोर्मल हिमोग्लोबिन )तथा एब -नोर्मल हिमोग्लोबिन (सिकिल्ड हिमोग्लोबिन या हिमोग्लोबिन एस )का मात्रात्मक ब्योरा मुहैया करवा देता है .
सिकिल सेल एनीमिया का जन्म पूर्व निदान :प्री -नेटल -डायग्नोसिस ऑफ़ सिकिल सेल एनीमिया के लिए गर्भ जल का परीक्षण किया जाता है ।
इसके तहत एम्नियो -सेन्टेसिस या फिर कोरियोनिक विल्लउस साम्प्लिंग की जाती है ।
इस प्रकार प्राप्त साम्पिल से फीटल सेल्स की डी एन ए एनेलिसिस भी की जाती है (०-८ सप्ताह का गर्भस्थ एम्ब्रियो कहलाता है ,८-४० सप्ताह तक का फीटस ,हिंदी में एक ही शब्द है भ्रूण दोनों के लिए ).
हिमोग्लोबिन इलेक्ट्रो -फोरेसिस परीक्षण परिशुद्ध रूप में दोनों हिमोग्लोबिंस की छंटनी करके दोनों किस्म के हिमोग्लोबिन (नोर्मल और एब्नोर्मल का जायजा ले लेता है .)
दोनों ही किस्म के हिमोग्लोबिनों में इनकी प्रोटीन की सतह पर ख़ास किस्म के विद्युत् आवेश (इलेक्ट्रिकल चार्जिज़ यानी चार्ज्ड एटम्स)मौजूद होतें हैं जो इनकी विशिष्ठ पहचान बनतें हैं .इसलिए एक विद्युत् क्षेत्र में रखने पर यह ख़ास दिशाओं मेंइलेक्ट्रोडों की तरफ अपने आवेश के अनुरूप दौड़तें हैं .
(ज़ारी ॥)।
विशेष :अगली पोस्ट में पढ़िए -व्हाट आर सिम्पटम्स एंड साइंस ऑफ़ एंड ट्रीट मेंट्स फॉर सिकिल सेल एनीमिया .

3 टिप्‍पणियां:

daanish ने कहा…

hai to kuchh mushkil-sa...
lekin
bahut achhee jaankaari hai
aabhaar .

veerubhai ने कहा…

शुक्रिया ज़नाब !

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद|