सब -टाइप्स ऑफ़ बाईपोलर इलनेस :
(१)बाईपोलर -१ (टाइप वन )।
(२)बाईपोलर -२ (टाइप टू)।
(३)साइकलो-थिमिया।
बाईपोलर -१ में मेनियाक फेज़ के लक्षण व्यक्ति पर इस कदर हावी रहतें हैं ,वह घर दफ्तर स्कूल के सामान्य काम नहीं कर पाता है .खतरनाक भी हो सकतें हैं ये मेनिक एपिसोड्स ।
जबकि बाईपोलर -२ में लक्षण तो वही होते हैं उनकी इतनी इंटेंसिटी ,आवेग नहीं रहता की व्यक्ति रोज़ मर्रा के कामों में शिरकत न कर सके .इसीलिए इसे "फुल ब्लोन मेनिया "न कहकर "हाइपो -मेनिया "कह दिया जाता है ।
इसमें अवसाद की अवधि उन्माद की अवधि से ज्यादा रहती है ।
साइक्लो -थिमिया :यह बाईपोलर इलनेस की हलकी फुलकी किस्म (माइल्ड फॉर्म )कही समझी गई है ।
साइक्लो -थिमिया के संग साथ "हाइपो -मेनिया "और डिप्रेशन बेशक डिस -रप -टिवसब कुछ को विच्छिन्न करदेने वाला सिद्ध हो सकता है लेकिन इसमें "हाईज "और "लोज़ "मन :स्थितियों का धुर आन्दोलन -दोलन उतना उग्र नहीं रहता जितना बाईपोलर -१ और बाईपोलर -२ में रहता है ।
बेशक इसके एक दम से सटीकएग्जेक्त लक्षण सब में यकसां नहीं होते ."इसमें "कुछ और "उसमे "कुछ और इक से दूसरे में तब्दील दिखलाई देतें हैं .सुनिश्चित स्वरूप नहीं होता सबमे ।
कुछ लोगों में अवसाद ज्यादा समस्या खड़ीकरता है कुछ में मेनिया .अवसाद ,उन्माद(मेनिया ) और उप -उन्माद (हाइपो -मेनिया )के लक्षण एक साथ भी हो सकतें हैं .इसे ही "मिक्स्ड एपिसोड "कहा जाता है ।
(ज़ारी ...)
बुधवार, 13 अप्रैल 2011
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2 टिप्पणियां:
आभार।
............
ब्लॉगिंग को प्रोत्साहन चाहिए?
लिंग से पत्थर उठाने का हठयोग।
bahut khoob kahaa dost !
shukriyaa .
veerubhai .
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