अदर साइंस एंड सिम्टम्स ऑफ़ बाईपोलर डिस -ऑर्डर ?
(१)सीजनल चेंज़िज़ इन मूड :मौसम के साथ ही कुछ मरीजोंका मिजाज़ भी बदल जाता है ,ऋतुएं मिजाज़ पर असर डालतीं हैं ठीक वैसे ही जैसे "सीजनल अफेक्तिव डिस -ऑर्डर "'यानी "एस. ए. डी ."में .
कुछ लोग बसंत लगते ही मेनिक (उन्मादी )या फिर अव -उन्मादी (हाइपो -मेनिक )हो जातें हैं ऐसा ही इनके साथ ग्रीष्म में भी होता है ,दूसरी तरफ पतझड़ (ऑटम/फाल )के आते ही अवसाद ग्रस्त हो जातें हैं ।
जबकि दूसरेमरीजों में ठीक इसका उलटभी होता है यानी ये लोग स्प्रिंग या फिर समर में depressed (अवसाद ग्रस्त )हो -जातें हैं जबकि फाल या फिर winter में हाइपो -मेनिक .
(२)रेपिड साइक्लिंग बाईपोलर डिस -ऑर्डर :
बाईपोलर डिस -ऑर्डर से ग्रस्त कुछ लोगों में जल्दी -जल्दी मूड तबदीलमिजाज़ बदली होती रहती है . सालभर में चार से लेकर चार या इससे भी ज्यादा बार इनका मिजाज़ बदलता है ,मूड स्विंग होता है ।
लेकिन कुछ और लोगों में कुछेक घंटे ही लगतें हैं इस मिजाज़ बदल में ।
(३)साइकोसिस :
बहुत ही उग्र दौरा ,उन्माद (मेनिया )या फिर अवसाद का जो इन्हें रिएलिटी से एक दम जुदा करदेता है ,काट देता है ,एक तरह से कह सकतें हैं वास्तिविकता से इनका संपर्क पूरी तरह ही टूट जाता है इस सीवियरमेनिक या फिर सीवियर डिप्रेसिव एपिसोड (फेज़) में ।
बस-
इसी चरण में दिलुज़न आ घेरता है ,धर दबोचतीं हैं इन्हें भ्रांत धारणाएं और विश्वाश जिन पर इनका अटूट विश्वाश ,अटल भरोसा कायम रहता है .भले साक्ष्य इसके (ध्रुव -विश्वाश)के विपरीत हों .
इसी चरण में तरह तरह के दृश्य ,श्रव्य ,गंध सम्बन्धी हेलुसिनेसंस होतें हैं .(ऐसी आवाज़ आएगी ,सुनाईदेगी , जो वास्तव में इनके परिवेश में है ही नहीं ,दृश्य भी अजीबोगरीब दिखलाई देंगें जिनसे तालमेल बिठाना ना मुमकिन हो जाता है .यदा कदा गंधें भी इन्हें महसूस होतीँ हैं जो होती नहीं हैंपरिवेश में .यहीं हैं "ओडियो ,विज्युअल एंड आल -फेक्ट्री -फेकल्टी हेल्युसिनेसंस ."
यही आकस्मिक साइकोसिस कुछ लोगों में बाईपोलर इलनेस को कन्फर्म करती है ,करदेती है ।
अब भाई रस्सी को देखकर तो सांप का भ्रम हो सकता है लेकिन टिफिन बोक्स को सांप समझने मानने को क्या कहिएगा .दिल्युज़न के तहत व्यक्ति खुद को मृत भी घोषित कर सकता है मान समझ सकता है .
हेल्युसिनेसन तो कई भयंकर खौफ पैदा करने वाले खाव्ब से भी ज्यादा खौफनाक होतें हैं .(ज़ारी ...).
बुधवार, 13 अप्रैल 2011
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