क्या है बाईपोलर डिस -ऑर्डर ?मेनिक -डिप्रेसिव इलनेस ?
बाईपोलर इलनेस इक गंभीर किस्म का मानसिक रोग है .बहुत ही नाटकीय परिवर्तन इसमें व्यक्ति के मिजाज़ (मूड )में होता रहता है कभी ज़रुरत से ज्यादा उत्साहित ,ऊर्जित ,"हाई की में "और कभी इक दम से चिडचिड़े,खीजे हुए ,दुखी इक दमसे हताश ,पस्त हौसला .और बारी बारी से इन दो स्थितियों झूलते रहेंगें .अलबत्ता बीच बीच में इनका मिजाज़ (मूड )एक दम से सामान्य भी दिखेगा ,रहेगा भी .लेकिन यह मूड के "अप्स " और "लोज़ "सामान्य नहीं होतें हैं ,आम व्यक्ति जिसे ,उससे ज्यादा होता है इनका आवेग और तीव्रता और बुझदिली ,हताशा दोनों ,.बारी बारी से .एक दिन में कई बार भी ऐसा हो सकता है और एक ख़ास अवधि के बाद भी ।
"अप फीलिंग "हाई में होने को ही मेनिया /उन्माद कह दिया जाता है .
"लो की "में होना डाउन फीलिंग को डिप्रेशन कह दिया जाता है .दो ध्रुवीय /धुर स्थितयां /एक्स्त्रीम्स हैं ये आस निराश की ।
कई परिवारों में चलते देखा जा सकता है ये रोग .जिसकी शुरुआत किशोरावस्था के बाद के दिनों में या फिर युवावस्था की देहलीज़ पर पाँव रखते हुए .,होते देखी जा सकती है ।
अलबत्ता एक मेडिकल चेकअप ही इस आवेगपूर्ण मूड स्विंग्स को दूसरी बीमारियों में पैदा मिजाज़ की ऐसी ही स्थितियों से अलग कर सकता है .देर नहीं करनी चाहिए ऐसी जांच करवाने में ।
क्योंकि इलाज़ न करवाने पर इसकी छाया असरग्रस्त व्यक्ति के संबंधों पर पड़ने लगती है .काम- काजी दफ्तर ,स्कूल सभी जगह असरग्रस्त व्यक्ति का काम (परफोर्मेंस )प्रभावित होती है .आत्म ह्त्या का विचार भी आता है .आत्म हत्या ऐसा व्यक्ति कर भी सकता है ।
अच्छी बात यही है असरकारी इलाज़ ,नै से नै दवाएं इन दिनों उपलब्ध हैं ,सलाह मश्बिरा ,टाक थिरेपी ,क्लिनिकल कोंसेलिंग .मिश्र चिकित्सा ज्यादा असर कारी रहती है कई मर्तबा ।
आर्कटिक और एन -टार्क -टिक की तरह है इस बीमारी के दो छोर इसीलिए इसे बाई पोलर इलनेस भी कहदिया जाता है .मेनिक डिप्रेसिव इलनेस भी .यह एक दिमागी विकार है .ब्रेन केमिस्ट्री की बदली हुई फिजा से है इसका ताल्लुक .इसीलिए एनर्जी का लेविल कम ज्यादा होता रहता है .असाधारण मूड स्विंग्स की भी यही वजह है ।
आम आदमी के साथ जीवन की झंझाओं से पैदा मूड स्विंग्स ,हर्ष विषाद से अलग हैं इसरोगी(मेनियाक ) के मिजाज़ .यहाँ हर्ष तो है लेकिन उसका कोई ज्ञात कारण उपस्थित हो यह ज़रूरी नहीं है .यूफोरिया ,हेपी विदाउट ट्रिगर कह सकतें हैं इस अति -हर्षौल्लास की मन :स्थिति को ,हताशा के हद को अवसाद जो सामान्य दुःख दर्द से अलग है ।
बाईपोलर इलनेस के तकरीबन आधे मामलों की शुरू आत २५ के नीचे नीचे हो जाती है .कुछेक मामलों में पहला लक्षण बचपन में भी दिखलाई दे सकता है .जबकि कुछ और लोगों में इसके लक्षण बाद के जीवन में भी प्रकट होतें हैं .लेट इन लाइफ ।
एक दम से इसे पहचान पाना उतना सरल भी नहीं है ,एक बड़ी समस्या केशुरूआती हिस्से के रूप में न लेकर अकसर यह सोच लिया जाता है यह कोई अलग समस्या है .कई लोग बिना रोग निदान (डायग्नोसिस )और इलाज़ के सालों साल इसका दंश झेलते भुगतते रहते हैं ।
डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों की तरह यह उम्र भर का रोग है जिसकी उम्र भर चिकित्सा चलती है चलनी चाहिए सलीके से क्योंकि लोग इसके साथ न सिर्फ ज़िंदा हैं बड़े बड़े काम भी कर रहें हैं .(ज़ारी ...)
विशेष :बाईपोलर इलनेस की यह पहली किश्त है .अनेक पहलुओं से इस की रिपोर्टिंग ज़ारी रहेगी .
वीरुभाई ,४३३०९ ,सिलवर वुड ड्राइव ,केंटन ,मिशीगन -४८ १८८ -१७८१ ।
दूर -ध्वनी :००१ -७३४ -४४६ -५४५१
मंगलवार, 12 अप्रैल 2011
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