गत पोस्ट से आगे .....
इस प्रकार बड़ी तादाद में एकत्र किये गए डी एन ए साम्पिलों के विश्लेषण से सबसे ज्यादा महत्व की जीवन इकाइयों के बारे में जाना जा सकेगा .माहिरों को ये भी इल्म हो सकेगा ये कलप्रिट जींस (कुसूरवार जीवन इकाइयां )जहां हैं वहां कैसे विकार ग्रस्त हो जातें हैं .और आखिरकार ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस -ऑर्डर्स की वजह बन जातें हैं ।
दूसरी दिशा शोध और विकाश की ऑटिज्म टिश्यु प्रोग्रेम है जिसका समर्थन ऑटिज्म सोसायटी ऑफ़ अमेरिका फाउन -डे -शन,दी मेडिकल इन्वेस्टिगेशन ऑफ़ न्यूरो -डेव- लप -मेंटल डिस -ऑर्डर्स (एम् .आई एन .डी .)इंस्टिट्यूट एट दी यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफोर्निया ,डेविस,तथा दी नेशनल एलाइयेन्स फॉर ऑटिज्म रिसर्च कर रहें हैं। .
हारवर्ड ब्रेन एंड टिश्यु रिसोर्स सेंटर को प्राप्त अनुदान से इस कार्यक्रम की फंडिंग की जारही है .इस प्रकार नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ(एन आई एम् एच ) एंड दी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्युरोलोजिकल डिस -ऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (एन आई एन डी एस )सभी इससे जुड़े हैं क्योंकि हारवर्ड सेंटर को अनुदान एन आई एम् एच दे रहा है .
पोस्ट मोरटम ब्रेन स्टडीज़ से ये इल्म हो सकेगा क्यों कुछ दिमाग आकार में बड़े होतें हैं .लिम्बिक सिस्टम का विकास आखिर होता कैसे है ,तथा उम्र ढलने के साथ दिमाग किस प्रकार बदलाव से गुज़रता है .टिश्यु साम्पिल्स की स्टैनिग इस बात की खबर देगी कौन से न्यूरो -ट्रांस -मीटर्स (जैव रसायन )कोशाओं में बनतें हैं और कैसे इनका अंतरण होता है दूसरी कोशाओं से येकैसे स्रावित होतें हैं .दिमाग के ख़ास हिस्सों और न्यूरो -ट्रांस -मीटर्स को बूझकर इन पर नजर गडाए रखकर ससेप्ति -बिलिटी जींस (वे जीवन इकाइयां जिनके विकार ग्रस्त होने की संभावना और आशंका है )की शिनाख्त हो सकेगी .
हालिया न्यूरो -इमेजिंग अध्ययनों से यह भी पता चला है ,शिशु के जीवन के एक दम से शुरूआती महीनों में दिमाग का अ-सामान्य ढंग से होने वाला विकास भी ऑटिज्म की तरफ लेजाने वाली एक वजह बन सकता है .
दिस "ग्रोथ डिस -रेग्युलेशन हाइपोथिसिस "होल्ड्स देट दी एनातोमिकल एब -नोर्मेलितीज़ सीन इन ऑटिज्म आर कौज्द बाई जेनेटिक दिफेक्तस इन ब्रेन ग्रोथ फेक्टर्स ।
ऐसे में शुरूआती दौर में बच्चे के सिर का तेज़ी से बढना विकसना ,आकार में सामान्य से ज्यादा बड़ा होना एक आरम्भिक चेतावनी भी हो सकता है ऑटिज्म की .ऐसे में जल्दी से जल्दी इलाज़ शुरू करके विकार से बचाव भी मुमकिन हो सकता है . भविष्य के प्रति आशावान तो रहा ही जासकता है .
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें