मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

रिसर्च ऑन दी बायोलोजिकल बेसिस ऑफ़ ऑटिज्म स्पेक्ट्रम दिस -ऑर्डर

रिसर्च ऑन दी बायोलोजिक बेसिस ऑफ़ ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस -ऑर्डर ।
आज क्योंकि अधिकाधिक ब्रेन -इमेजिंग डायग्नोस्टिक टूल्स हमारे हाथ में आगये हैं ,(सी टी स्केन/कम्प्युट -रा -इज्ड टोमोग्रेफ़ी ,पोज़ी -ट्रोंन एमिशन टोमोग्रेफ़ी ,सिंगिल फोटोन एमिशन कम्प्यु -टिड टोमो -ग्रेफ़ी (एसपीइसीटी ),एंड एम् .आर .आई .(मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग )आदि ,दिमागी संरचना तथा काम करने के ढंग की बेहतर ढंग से थाह ली जासकती है .बेशक १० % हिस्से की ही सही .
कटिंग एज टेक्नोलोजी के साथ -साथ सामान्य और आत्म -विमोह ग्रस्त ऊतकों (टिस्यूज )की उपलब्धता पोस्ट मोरटम स्टडीज़ द्वारा इनका बारीक विश्लेषण तुलनात्मक अध्ययनों के ज़रिये इन आत्म विमोहिक (ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस -ऑर्डर्स)विकारों की कई परतों पर से धुंध हटा रहा है .
पता चला है दिमाग के कई प्रधान समझे जाने वाले हिस्सों यथा सेरिबेलम ,सेरिब्रल कोर्टेक्स ,कोर्पस कोलोसम ,बेसल गैन्ग्लिया ,तथा ब्रेन स्टेम से यह विकार सम्बद्ध हैं ,इस या उस वजह से ।
दिमागी रसायनों (न्यूरो -ट्रांस -मीटर्स )से जो जहां हैं वहां ट्रांस -मीटर्स की तरह काम करतें हैं यथा सिरों -टोनिन,डोपामिन तथा एपिनेफ्रा- इन से भी इन विकारों का सम्बन्ध जोड़ा गया है ।
आनुवंशिक कारण भी अपना पार्ट प्ले करते दिखलाई दिए हैं इन विकारों के पीछे .जुड़वां और असरग्रस्त परिवारों पर किये गए अध्ययनों से पता चला है ,रोग का खानदानी आधार भी कमोबेश हो सकता है ।
ऐसे परिवारों में नौनिहालों के लिए इन विकारों का जोखिम मुह्बाये खडा रहता है ।

इस एवज और इस संभावित कारण की आगे और पड़ताल के लिए असर ग्रस्त (जहां कमसे कम एक से ज्यादा लोगों को यह विकार डायग्नोज़ हो चुकें हैं )सैंकड़ों परिवारों से जेनेटिक सेम्पिल्स जुटाए जा रहें हैं .(ज़ारी ..)

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