मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

दू सिम्टम्स ऑफ़ ऑटिज्म चेंज ओवर टाइम ?

डू सिम्टम्स ऑफ़ ऑटिज्म चेंज ओवर टाइम ?
कई बच्चों के मामले लक्षणों में इलाज़ और उम्र दोनों के साथ साथ सुधार आता है .लेकिन जिन बच्चों की भाषिक क्षमता का ह्रास तीन साल से पहले ही होने लगता है जो कुछ भाषा ज्ञान अब तक हासिल किया था उसे भी भूलने लगतें हैं रिग्रेस करने लगतें हैं उनके लिए आगे चलकर एपिलेप्सी और सीज़र जैसी ब्रेन एक्टिविटी का ख़तरा सामान्य खतरे से बहुत ज्यदा हो जाता है ।
किशोरावस्था में पाँव रखते ही आत्म विमोह विकारों से ग्रस्त कुछ बच्चे अवसाद ग्रस्त हो जातें हैं ,व्यवहार गत समस्याएं और भी बढ़ जातीं हैं ,ऐसे में इनके इलाज़ में रद्दोबदल करना पड़ता है बालिग़ होते होते ।
आखिर यही वह वक्त होता है जब बालक अपनी नव -मुकुलित सेक्स्युअलिति ,विकसते उभरते मुखरित शरीर से वाकिफ होता है इस मोड़ पर ही मदद की ज़रुरत सामान्य बच्चों को भी पडती है .आत्म विमोह ग्रस्त बच्चा और भी संवेदी होजाता है जब वह देखता है दूसरे किशोर किशोरियों के ज्यादा यार दोश्त हैं जो डेटिंग पर जा रहें हैं भविष्य के लिए नए खवाब बुन रहें हैं ,उसका कोई दोस्त नहीं है सब उससे छिटक -तें ही हैं .
उम्र बढ़ने के साथ साथ भी आत्म विमोह विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों को सर्विसिज़ और सपोर्ट दोनों की ज़रुरत रहती है .लेकिन कई एक सपोर्टिव अनुकूल प्रोत्साहक माहौल मिलने पर सब कुछ बहुत अच्छा करने लगतें हैं ,आत्म निर्भर भी हो जातें हैं बा -शर्ते माहौल अनुकूल बना रहे .

2 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

बात तो ठीक है पर नवयुवकों में इन जानकारियों की समुचित पैठ मुश्किल है

virendra sharma ने कहा…

Kajal Kr ji ,aap blog apr aaye ,tippani kee ,aabhaari hun .
veerubhai .