बुधवार, 13 अप्रैल 2011

बाईपोलर डिस -ऑर्डर्स:सिम्ताम्स इन चिल्ड्रन एंड एडोलिसेंट्स

बाईपोलर डिस -ऑर्डर्स :सिम्टम्स इन चिल्ड्रन एंड एडोलिसेंट्स ।
साफ़ साफ़ अवसाद (डिप्रेशन )और उन्माद(मेनिया ) या फिर हाइपो -मेनिया (माइल्ड फॉर्म ऑफ़ मेनिया )न होकर बच्चों और किशोर वृन्द में (किशोर- गण ,एडोलिसेंट्स में )एक्सप्लोसिव टेम्पर (तेज़ /गर्म मिजाजी ),जल्दी जल्दी मिजाज़ का बदलना (रेपिड शिफ्ट्स इन मूड्स ),बेहद का दुर्दमनीय व्यवहार और आक्रामकता देखने को मिल सकती है ।
कुछेक में मिजाज़ और व्यवहार से सम्बद्ध ये तमाम बातें चंद घंटों या फिर उस से कम समय में भी मुखर हो सकतें हैं .मसलन "बच्चे को बेहद चक्कर आ -सकतेंहैं ,बेहद की मूर्खता ,हद दर्जे की बे -वकूफी इनमे दिखलाई दे सकती है ,एक ही दिन में आप इनका बेहद का और देर तक चिल्लाना देख सकतें हैं ,आक्रामक क्रोधावेग भी ।
नींद के पैट्रन ,नींद की आदत में आकस्मिक बदलाव (सो रहें हैं तो सोते ही जा रहें हैं वरना न नींद "न नींद न आने
की", थकान )।ये सारे इंडी -केटर्स बाईपोलर -
इलनेस के हो सकतें हैं जो डॉक्टरी मुआयने ,मेडिकल चेक अप की मांग करतें हैं .
अपने आप ठीक नहीं होता है बाईपोलर डिस -ऑर्डर्स ।
अलबत्ता मनो -रोगों के माहिर ,मानसिक स्वास्थ्य खासकर बाईपोलर इलनेस के माहिर से इलाज़ लेने पर लक्षणों का शमन हो सकता है ,बेशक लम्बी चलती है यह रोग और इलाज़ की जंग अकसर ताउम्र ।डायबिटीज़ और हृद रोगों की तरह .लेकिन इलाज़ होता है और पूरी कामयाबी से होता है .
अलबत्ता कई लोगों को विशेष इलाज़ मयस्सर ही नहीं होता है ,मूड स्विंग्स के बावजूद ,भावात्मक अस्थिरता के बने रहने पर भी वह अपने रोग का अंदाजा लगा ही नहीं पाते नतीज़न उनका खुदका और उनसे जुड़े दूसरे लोगों का जीना मुहाल हो जाता है ,परस्पर सम्बन्ध बिगड़ जातें हैं ।भावी जीवन पर भी इस सबकी छाया पडती है .
और खुदा न खास्ता यदि आप भी कुछ बाईपोलर इलनेससे ग्रस्त लोगों की तरह इसी डिस -ऑर्डर्स से ग्रस्त निकले ,तो आप हर्षातिरेक बिला वजह और कारण के (यूफोरिया )का मजा लेतें रहेंगे ,खुद को एक चाक्रिक अवधि में फंसे हुए भी प्रोडक्टिव और क्रिएटिव भी मान बैठेंगें ।क्योंकि आवधिक तौर पर ऐसा होता भी है .
मत भूलिए इस हर्षोन्माद की अंतिम परिणति अवसाद ही होती है .आप आर्थिक और कानूनी झंझट में भी फंस सकतें हैं ।आपका साथी समझ सकता है उसके साथ छल किया गया ,उससे रोग छिपाया गया जो पीछे से चला आरहा था .
अगर लिहाजा आप खुद नहीं इलाज़ की पहल कर पारहें हैं ,अपने किसी भरोसे के आदमी ,प्रेमपात्र को साथ ले जाइए उसकी मदद लीजिये ,स्वास्थ्य के माहिर का पल्लू पकडिये और कुछ न सही किसी फेथ लीडर में ही भरोसा रखिये वह ले जाएगा आपको इलाज़ के लिए सही जगह .बहर -सूरत इस स्थिति और इन हालातों की अनदेखी न कीजिये .(ज़ारी ....)

कोई टिप्पणी नहीं: