व्हाट इल्नेसिज़ ओफतिनटाइम्स को -एग्जिस्ट विद बाईपोलर डिस -ऑर्डर्स?
आमतौर पर बाईपोलर डिस -ऑर्डर के साथ सब्सटेंस एब्यूज देखने को मिलजाता है लेकिन इस सम्नाध की वजह क्या है कहना मुश्किल है .साफ़ नहीं है कुछ भी .अलबत्ता कुछ बाईपोलर इलनेस के मरीज़ अपनी इस मानसिक बीमारी को शराब और नशीली दवाओं से ठीक करने की कोशिश करते हैं .होता ठीक उलटा है बीमारी के लक्षण ज्यादा उग्र हो जातें हैं देर तक बने रहतें हैं .ऐसे में जब अपने पे काबू नहीं रह जाता है तो व्यक्ति खूब पीने लगता है ,नशा पत्ता करने लगता है बे -हिसाब ।यही है सब्सटेंस एब्यूज ।
पोस्ट ट्रौमेतिक स्ट्रेस डिस -ऑर्डर :पी .टी. एस. टी ,सोसल फोबिया या ऐसा ही कोई और एन्ग्जायती डिस -ऑर्डर बहुधा बाईपोलर डिस -ऑर्डर के संग साथ दिखलाई देजाता है ।
एडीएचडी यानी अटेन्सन देफिषित हाई -पर -एक -टीवीटी डिस -ऑर्डर के साथ भी अकसर बाईपोलर डिस -ऑर्डर दिखलाई देता है .बे -चैनी (रेस्ट -लेस -नेस )और आसानी से ध्यान का भंग होना ए डी एच डी का भी लक्षण है ,बाईपोलर इलनेस का ।
थाइरोइड डिजीज का ख़तरा भी द्वि -ध्रुवीय विकार से ग्रस्त लोगों के लिए मुह बाए खडा ही रहता है .अलावा इसके मीग्रेंन हेडेक ,दिल की बीमारियाँ ,मधुमेह ,मोटापा ,अन्य कायिक रोग (फिजिकल इलनेस )के जोखिम का वजन भी बढ़ जाता है ।
ये बीमारियाँ भी मेनिया या डिप्रेसन की वजह बनती हैं ,बन सकतीं हैं ,लेकिन बाईपोलर डिस -ऑर्डर ट्रीट -मेंट भी इन बीमारियों की वजह बन सकता है ।
इसीलिए इन अन्य बीमारियों की मौजूदगी में बाईपोलर इलनेस का रोग निदान और इलाज़ दोनों मुश्किलतर हो जाता है .इसीलिए इस विकार से ग्रस्त लोगों को अपने कायिक स्वास्थ्य और रोगों ,मानसिक विकारों पर नजर रखनी चाहिए ।
अगर किसी लक्षण में इलाज़ के बाद भी सुधार दिखलाई नहीं देता है तो फ़ौरन अपने चिकित्सक को बताना चाहिए .(ज़ारी...)
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