द्वि -ध्रुवी -मानसिक विकार का रोग निदान कैसे होता है ?
सबसे पहला काम है व्यक्ति डॉ के पास पहुंचे .डॉ .फिजिकल एग्जामिनेशन (कायिक परीक्षण ),व्यक्ति के साथ इंटर --व्यू (बातचीत ,पूछ ताछ )के अलावा कई लेब टेस्ट्स कर सकता है ।
फिलाल कोई ऐसा ब्लड टेस्ट नहीं है जो बाईपोलर इलनेस का रोग निदान कर सके ,पता लगा सके इस रोग का .अलबत्ता ये परीक्षण और ब्रेन स्केन किया जाता है ताकि दूसरे फेक्टर्स को दरकिनार किया जा सके ,रुल आउट किया जा सके मसलन ,ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर की संभावना को खारिज किया जासके ।
अगर समस्या अन्य रोगों की वजह से नहीं उपजी है तब डॉ .मानसिक स्वास्थ्य का जायजा लेता है .आपको किसी मानसिक रोगों के माहिर के पास भी भेज सकता है .क्लिनिकल कोंसेलर के पास भी ।
इस प्रकार काया चिकित्सक (फिजिशियन )या फिर मनो -रोगों के माहिरदोनों को मिलकर पूरा रोग निदानिक मूल्यांकन करना चाहिए .डायग्नोस्टिक इवेल्युएशन हर हाल होना ही चाहिए ।
डॉ .ज़ाहिर है पूरा चिकित्सा पूर्व वृत्तांत ,फेमिली हिस्ट्री इस रोग के बाबत जुटाएगा ,परिवार में चलने वाली दूसरी मानसिक बीमारियों के बारे में जानकारी चाहेगा ,परिवार के दूसरे सदयों से भी मिलकर जानकारी जुटाएगा व्यक्ति के लक्षणों और परिवार के चिकित्सा इतिहास के बारे में ।
अकसर अवसाद ग्रस्त होने पर व्यक्ति के डॉ के पास पहुँचने की संभावना ज्यादा है ,मेनिया या हाइपो -मेनिया के लक्षणों के होने परयह संभावना कम .रहती है ।
इसलिए इसे मेजर डिप्रेसिव डिस -ऑर्डर (युनिपोलर डिप्रेसन )से हठ्के देखना समझना होता है .इसीलिए पूरी मेडिकल हिस्ट्री चाहिए होती है ।
डिप्रेशन (युनिपोलर डिप्रेशन )में मेनिया(उन्माद ) के लक्षण नहीं मिलतें हैं असरग्रस्त व्यक्ति के दोस्तों से जुटाई गई जानकारी भी काम आती है .जहां तक संभव हो सभी पिछले रिकार्ड भी होने चाहिए .दे आर गोल्ड फॉर डायग्नोसिस ।
(ज़ारी...).
बुधवार, 13 अप्रैल 2011
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