मंगलवार, 18 अगस्त 2009

और अब शीतला रोग (खसरा -मीज़ल्स )का टीका हाज़िर है .

टीके के रूप में एक इन्हेलर (सूँघनी)देर सवेरबाज़ार में आ सकती है .फिलवक्त खसरे का टीका (सुइंया)ही नौनिहालों को लगाई जाती हैं .इस टीके को तैयार करने के लिए -खसरे का बोदा (कमज़ोर वायरस रू -बी -ओला ) सुपर क्रिटिकल कार्बन -डाई-आक्साइड के साथ मिला दिया जाता है .इस गेस औ वाय-रस के मेल से नन्ने अति सूक्ष्म बुलबुले औ बुंदिया बनतीं हैं ,जिन्हें सूखाकर एक सूँघनी(इन्हेलर )तैयार कर ली जाती है ।
छोटी छोटी सिलिंडर -नुमा प्लास्टिक थेलियोंमें इसे ज़मा कर लिया जाता है .बस सूँघनी तैयार .थेलीको नथूनों से सटाकर बच्चे को सूंघा दीजिये ।
यह टीका अस्पताल -से लगने वाले संक्रमण से एच .आई वी.एड्स .,हिपेताइतिस-बी .,संक्रिमित अस्पताली सूइंयों से लगने वाले अन्य संक्रमणों से भी बचाव का कारगर ज़रिया है ।
पैरा -माइक्सो -परिवार का छूत-हां वायरस है -रू -बी -ओला जो शीतला रोग यानि मीज़ल्स (खसरा )की वजह बनता है .निर्धारित समय पर नौनिहालों को इसके टीके लगाए जातें हैं .कई माँ बाप सूइंयों से बच्चों को बचाने की नादानी के चक्कर में टीके ही नहीं लगवाते .रोजाना १२०० बच्चे इस संक्रमण से मौत के मुह में चले जाते हैं .२००६ में ६८.१ फीसद बच्चोंको इसका टीका लगा था . कुपोषित बच्चों के लिए यहरोग एक बड़ा ख़तरा है ।
सीरम इन्स -टी -टूट आफ इंडिया भारतीय बच्चों पर इसका (सूँघनी )का परिक्षण (क्लीनिकल ट्रा-याल्स )करेगा .लेकिन इससे पहले एनीमल स्टडीज़ के नतीजे देखने परखने होंगे ।
पहले चरण में टीके की निरापदता जांचने के लिये ३० वयस्कों पर आजमा -इशे की जायेंगी ।
भारत के लिये वरदान सिद्ध होगी यह ड्राई -पाउडर वेक्सिन (सूँघनी )जहाँ ना साफ़ पानी है ,ना २४ घंटा बिजली ,अक्सर वेक्सिन को ४सेल्सिअस पर बनाए रखने वाली कोल्ड चेन टूट जाती है ।
इसे कोलाराडो व्श्व्विद्द्यालय के राबट-सीव ने तैयार किया है .सूइंयों के बरक्स यह ज्यादा कारगर सिद्ध होगी ,।
खसरा यानी मीज़ल्स एक विषाणु रू -बी -ओला से पैदा होने वाला छूत -हां रोग है ,तेज़ बुखार ,छींक आना ,नाक बंद होना (नेज़ल कंजेसन ),ब्रासी कफ kअन जक्ती -वाई -तिस (रोहे ,आंखों का मौसमी रोग ),चमड़ी पर रोज़ी चिकत्ते (मेकूलो -पेपूलर-इरप्शन्स) होना इसका आम लक्षण है लातिनी भाषा के -रू -बी -ओलुस का मतलब होता है -रेड यानी लाल .ये लाल चकत्ते रू -बी -ओला वायरस की ही देन हैं .जो गले औ चेहरे से शुरू होकर तमाम बदन पर फूल जातें हैं .इनका डिस्पोज़ल जला कर या दफना कर किया जाता है .अलबता ६ माह से कम उम्र के शिशुओं में ये रोग बिरले ही देखा जाता है ,बा शर्ते उन्हें माँ का दूध नसीब हुआ हुआ हो ,जो कुदरती टीका है ,खासकर -माँ का पहला स्तन -पान ,अमृत पान है ,राम बाण औषध है ,बच्चे के लिये .

1 टिप्पणी:

Arun ने कहा…

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