शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

Kitchen Remedies

Kitchen Remedies

(1)Adding raw or lightly -cooked garlic (with antiviral ,antibacterial properties) to your meals will

keep you healthy this winter

 विषाणु और  जीवाणु जैसे रोगकारको  का  नाश करता है  कच्चा या फिर अधपकाया हुआ लहसुन .इसे

भोजन में शामिल कीजिए .त्वचा भी कान्तिमान रहेगी काया भी नीरोगी .

(2)To treat an acute migraine ,drink a full glass of water -dehydration can trigger headaches

आधा शीशी का तेज़ दर्द है तो शरीर को चार्ज रखो ताज़े जल से .ग्लास भर पानी बैठ के घूँट घूँट पीयो .शरीर

में पानी की कमी दर्द को उकसाती है .


(3)POOR SLEEP CAN LEAD TO SCHIZOPHRENIA 

SYMPTOMS

Irregular sleep patterns and desynchronised brain activity during sleep could trigger some of the symptoms of schizophrenia.

The findings suggest that these prolonged disturbances might be a cause and not just a consequence of the disorder's debilitating effects.

The possible link between poor sleep and schizophrenia prompted the research team led by scientists from the University of Bristol ,the Lilly Centre for Cognitive Neuroscience and funded by the Medical Research Council (MRC),to explore the impact of irregular sleep patterns on the brain by recording electrical brain activity in multiple brain regions during sleep .

For many people sleep deprivation can effect mood ,concentration and stress levels .In extreme cases ,prolonged sleep deprivation can induce hallucinations ,memory loss and confusion all of which are also symptoms associated with schizophrenia .

"Sleep disturbances are well documented in the disease ,though often regarded as side effects and poorly understood in terms of their potential to actually trigger its symptoms ,"said Dr Ullrich Bartsch ,one of the study's researchers .

Using a rat model of the disease ,the team's recordings showed desynchronisation of the waves of activity ,which normally travel from the front to the back of the brain during deep sleep .In particular the information flow between the hippocampus -involved in memory formation ,and the frontal cortex -involved in decision -making ,appeared to be disrupted .

The team's findings reported distinct irregular sleep patterns very similar to those observed in schizophrenia patients.

The findings from this study provide new angles for neurocognitive therapy in schizophrenia and related psychiatric diseases .

The findings were published in the journal Neuron.  



साइंसदानों ने पता लगाया है की नीद के दौरान बनने वाली तरंगों की विषम  प्रतिकृति (असम आकृति

)तथा विषम कालिक दिमागी सक्रियता शिजोफ्रेनिया (इस्कित्सोफ्रेनिया ,एक गंभीर मनोरोग जिसमें रोगी

वास्तविक और काल्पनिक संसार में भेद नहीं कर पाता तथा विचित्र तथा अनपेक्षित रीति से आचरण करता

है ,मनोविद्लता /खंडित मनस्कता ) के कुछ लक्षणों को उत्प्रेरित कर सकती  है .

विज्ञानियों का यह भी मानना है नींद का यह दीर्घ कालिक विरूपण /विक्षोभ लक्षणों की वजह है न की

परम्परागत सोच के अनुसार इस अशक्त बनाने वाले रोग का परिणाम .और पार्श्व प्रभाव .


बस इसी से प्रेरित होकर साइंसदानों ने अनियमित निद्रा के दिमागी प्रकार्य पर पड़ने वाले प्रभावों की

पड़ताल शुरू कर दी .इस एवज निद्रा के दौरान   दिमाग के अनेक  हिस्सों में विद्युत् सक्रियता का मापन

किया गया .

नींद से महरूम रह जाना कितने ही लोगों में न सिर्फ चित्त  (मूड )को असर ग्रस्त करता है ध्यान लगाने की

प्रक्रिया भी असर ग्रस्त हो जाती है कुछ लोगों की .दवाब भी बढ़ जाता है .दवाब का स्तर प्रभावित हुए बिना

नहीं रहता है .

यथा संभव अधिकतम /चरम /धुर मामलों में नींद से वंचित रह जाना ,स्मृति ह्रास ,याददाश्त के छीजने

,विभ्रम और निर्मूल भ्रम (दृष्टि भ्रम या मति भ्रम ,ऐसी बातें देखना या सुनना जो वस्तुत : हैं  ही नहीं आपके

परिवेश में आपके आसपास ) यानी हलुसिनेसन की भी वजह बन जाता है .बतला दें आपको भ्रांत धारणा

(डिलूशन )और हलुसिनेशन शिजोफ्रेनिया के आम लक्षण हैं .इस रोग में रोगी को वह आवाजें सुनाई देने

लगतीं हैं जो आसपास हैं ही नहीं अजीबोगरीब डरावने दृश्य कभी कभार गंधों का एहसास भी होता है गंधें

जिनका अस्तित्व ही नहीं हैं रोगी के लिए होतीं हैं छिटकता है वह उनसे .डरता है .

अभी तक नींद में होनें वाली खलल को रोग का पार्श्व प्रभाव समझा जाता था हालाकि यह क्या गुल खिला

सकती है इसे ठीक से बूझा नहीं जा सकता था .

रोग के एनीमल मोडिल का अध्ययन चूहों पर किया गया .पता चला दिमागी तरंगों की गति विधि विषम

कालिक है .कोई तालमेल नहीं है दिमागी सक्रियता में .

अमूमन इन तरंगों की गति दिमाग के आगे वाले हिस्सों से पीछे वाले हिस्सों की ओर  रहती है .सूचना का

प्रवाह याददाश्त बनने से ताल्लुक रखने वाले हिस्सों से उन दिमागी  हिस्सों की ओर  रहता है जो हमें किसी

मुकाम पर पहुँचने निर्णय प्रक्रिया में हमारी मदद करतें हैं .यहाँ इस संदर्श में इसमें विक्षोभ साफ़ प्रगट हुआ .

स्लीप सिग्नल्स विरूपित विक्षोभ ग्रस्त दिखे इनमें वैसी ही अनियमितता दिखलाई दी जैसी की

शिजोफ्रेनिया के मरीज़ में नींद के दौरान दर्ज़ की जाती है .

इस अध्ययन के नतीजे एक अभिनव चिकित्सा व्यवस्था शिजोफ्रेनिया के मरीजों को मुहैया करवा सकतें हैं

-न्यूरोकोगनिटिव थिरेपी .

विज्ञान पत्रिका "न्यूरोन "में इस अध्ययन के नतीजे प्रकाशित हुए हैं .





4 टिप्‍पणियां:

"अनंत" अरुन शर्मा ने कहा…

बेहद अच्छी जानकारी सर शुक्रिया.

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

madhu singh ने कहा…

Aap ne jivan ke har kshetr ko anupanit aur jivant bana diya hai sir ji,ghar dwar swasthy.....vividh aayam aur andaj bhi nayab,sir ji

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

भारतीय भोजनों में मसालों का समावेश एक औषधीय वरदान है।