रविवार, 25 नवंबर 2012

हाथ धोने के पीछे का विज्ञान

हाथ धोने के  पीछे का विज्ञान




घुप अंधेरो को मिटाना चाहिए ,

हर गली हर मोड़ पे ज्ञान की लौ जलानी चाहिए ,

इस देश के नौनिहाल को बताना चाहिए ,

हाथ किस तरह मलमल के धोना  चाहिए ,

वरना स्वास्थ्य का गणित गड़बड़ हो जाएगा ,

ज़िन्दगी हाथ मलने का सबब बन जाएगा .

---------शायर अज़ीज़ जौनपुरी साहब .



क्या सिर्फ नलका खोलके पानी से हाथ धोना पर्याप्त है ?साबुन लगाना ज़रूरी है तो क्यों है?


बतलादें आपको पानी से सिर्फ धूल मिट्टी साफ़ होगी ज़रासीम (कीटाणु )नहीं .गंदे रोगाणु सने हाथ प्रत्येक

15 सेकिंड में एक नौनिहाल की जान ले लेते हैं .वजह होती है सिर्फ इन्हीं हाथों से खाना खाना .

UNICEF की एक विज्ञप्ति के अनुसार हरेक तीस सेकिंड में एक बालक अतिसार (Diarrhea) की भेंट चढ़

रहा है .विश्वस्वास्थ्य संगठन के अनुसार पांच साल से कम उम्र के अठारह लाख सत्तर हज़ार बच्चे इसी

अतिसार का निवाला  बन जाते हैं हर साल .

पाकिस्तान में संपन्न एक अध्ययन के अनुसार सिर्फ साबुन से भली भाँती हाथ धोते रहने से न्युमोनिया से

सम्बंधित संक्रमणों में पचास फीसद की कमी दर्ज़ की गई जबकि चमड़ी का संक्रमण Impetigo 34%कम हो

गया .

Impetigo :चमड़ी का एक छूतहा संक्रमण है .यह  जीवाणु Streptococcal  और Staphylococcal से

सम्पर्कित होने पर लगता है .इस संक्रमण में चमड़ी पर फफोले पड़  जाते हैं .पीला -भूरा (धरती या लकड़ी के

रंग का ,सूर्य ताप से भी भूरी हो जाती है त्वचा )खुरंड आ जाता है ठीक होने की प्रक्रिया में .

These blisters form yellow-brown scabs.

Research shows that hand washing with soap reduces the incidence of infections like intestinal

worms ,especially ascariasis and trichuriasis.

Ascariais is infestation of the intestines by common roundworms or related nematode worms (ascarids).

It is a disease caused by infestation with the parasitic worm Ascaris lumbricoides.Adult worms in the intestine can cause abdominal pain ,vomiting ,constipation ,diarrhoea ,appendicitis ,and peritonitis; in large numbers they may cause obstruction of the intestine.

Ascariasis occurs principally in areas of poor sanitation ; it is treated with levamisole.

हमारे हाथ भी रोगाणु वाहक  vector का काम करते हैं .यह रोगाणु  संक्रमित हाथों से  सीधे संपर्क में आने

से भी एक से  दूसरे व्यक्ति तक  अंतरित हो जातें हैं ,इनके द्वारा छुई हुई चीज़ों को औरों द्वारा छूने से भी

.र्रोग कारकों के वाहक होतें हैं संक्रमित हाथ. बस इन्हीं हाथों से चीज़ों को छूने भर की देर है .

बचा जा सकता है इन रोगों से /रोगकारकों से सिर्फ साबुन से हाथ धोते रहने से :

(1)Helminthes (worms)

(2)Eye infections like trachoma,and (रोहा ,रोहे , आम  भाषा में आँख  दुखनी आना )

(3)Skin infections like Impetigo.(चर्म पूय ,इमपिटाईगो )

सिर्फ हाथ धोने की  आदत कितने ही रोगकारकों से हमारी हिफाज़त कर सकती है .एक से दूसरे व्यक्ति तक

इन रोग कारकों के संचार को रोक सकती है .किसी भी टीके  से ज्यादा भरोसे  मंद सिद्ध हो सकती है यह

अर्जित आदत .



कितने ही ज़रासीम और बीमारियों की वजह हमारे ये रोगाणु सने हाथ ही बनते हैं .

खाना पीना करने से पहले तथा रेस्ट रूम्स ,पेशाब घर आदि इस्तेमाल करने के बाद हाथ ज़रूर धोइए घर

आकर भी .

(ज़ारी )







4 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

ज्ञानवर्द्धक और स्वास्थ्यवर्द्धक पोस्ट...आभार

Aziz Jaunpuri ने कहा…

dhup andheron ko mitana chahiye,har gali har mod par gyan ki lau jalani chahiye,is des ke naunihalo ko batana chahiye,hath kis tarah mal mal ke dhona chahiye,varna swasthy ka ganit gadbad ho jayga,jindgi hath malne ka sabab bn jayga.

संदीप पवाँर (Jatdevta) ने कहा…

हाथ धोने से भी ज्यादातर बीमीरियाँ दूर रहती है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्वच्छ रहें और निर्मल भी..