मंगलवार, 20 नवंबर 2012

कैथोलिक चर्च की जड़ता

कैथोलिक चर्च की जड़ता 

कैसी विडंबना है आज के इस वैज्ञानिक दौर में भी कैथोलिक चर्च मध्यकालीन जड़ता का पोषक बना हुआ है 

.उसकी इसी जड़ता ने 

आयरलैंड की एक  होनहार युवा डॉ .की जान ले ली जो गर्भवती थी 

तथा 

डॉक्टरों ने साफ़ बतला दिया था ,गर्भस्थ के शरीर में जहर फैलने लगा है .ऐसे में गर्भस्थ की सांस की धौंकनी 

को चर्च के आदेशों पर 

चलाये रखा गया . नतीज़न जहरवाद की गिरिफ्त में यह महिला 

आती चली गई .गर्भ पात करके आयरलैंड की इस महिला की 

 जान बचाई जा सकती थी ..सवाल यह नहीं है वह भारतीय मूल की थीं सवाल यह है वह पेशे से खुद भी डॉक्टर 

थीं और गर्भपात की

तात्कालिकता के वजन को समझती थीं .लेकिन चर्च की हिदायतें 

हैं 

इसकी मान्यताओं को ,,जड़ सिद्धांतों को किसी भी हालत में आंच न आने पाए .

चर्च की इस मध्य कालीन जड़ता को तत्कालीन  नाम  चीन विज्ञानियों यथा गैलीलियो और आर्क्मीदीज़ जैसे 

विज्ञानियों ने भी भुगता 

था .आर्क्मीदिज़ की तो इसी जड़वादी चर्च ने गर्दन ही चाक 

करवा दी थी .गैलीलियो की तो आँखें ही फोड़ दी गईं थी .

चर्च सेवा की आड़ में शोषण करता है गरीबों का .मकसद एक ही रहता है येनकेन प्रकारेण धर्म परि-वर्तन ,चर्च 

के इसी जड़ वाद के 

चलते चर्च के साए में अपराध पलता है ,यौन कुंठा के साए में  

पादरी 

धत कर्म करते हैं चर्च 

इन्हें दबा देता है दबाए रखने की हिदायतें बारहा ज़ारी करता रहता है .ऐसे चर्च की जिसका मानवीय सरोकारों 

से कोई लेना देना नहीं है 

अभिनव विज्ञान और प्रोद्योगिकी के दौर में क्या प्रासंगिकता 

है .एक छोर पर ब्रिटेन के अस्पताल गर्भस्थ के लिए लोरी गीत गर्भवती को सुनाने प्रसव पीड़ा को कम करने के

 कार्यक्रम चला रहे हैं 

.गर्भगीत महिलाओं को सुनवा रहें हैं ताकि माँ का गर्भस्थ के साथ 

एक सशक्त नेह आबंध बना रहे जन्म पूर्व से ही दूसरे  छोर पर आयरलैंड की व्यवस्था पे गौर कीजिए .कैसी 
पढ़ाई है यह डॉक्टरी की 

जो स्केलापल उठाने से पहले चर्च का मुंह ताकती है ?

5 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

wah

madhu singh ने कहा…

Talkh sacchayeeo se rubaroo karati sarthak prastuti,duniya me dharm ke nam par kitne aanarth ho rahe hai,uski ek bangi aap ne bkhubi pesh kr diya..sundar,sarahniy aur sarthak prastuti

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ऐसी मान्यताओं पर विचार करना चाहिए .... दुखद घटना

SM ने कहा…

laws need to change
each country got its own problems

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दुखद घटना, मानवीय जीवन को महत्व देना था।