मंगलवार, 27 नवंबर 2012

दिल की सलामती के लिए अब त्रिपक्षीय हृद चिकित्सा

दिल की सलामती के लिए अब त्रिपक्षीय हृद 

चिकित्सा


 कमजोर दिलों में जान फूंककर उन्हें मजबूती की और ले जासकती है एक त्रिपक्षीय शल्य

चिकित्सा व्यवस्था जिसने समाहित किया हुआ है :

(1)Angiogenesis

(2)Stem cells और

(3)Bypass surgery (Coronary artery bypass grafting )को .


Angiogenesis वह प्रक्रिया है जिसके तहत भ्रूण की शुरूआती अवस्था में जिसे एम्ब्रियो कह दिया जाता नव

रक्त वाहिकाएं पैदा होतीं हैं निर्मित होतीं हैं .कैंसर गांठ भी यूं ही पनपती है लेकिन यहाँ यह नव निर्माण

ब्लड वेसिल्स का दिल की प्रतिरक्षा के लिए किया जाएगा .

Stem cells वह मास्टर कोशायें हैं जिनके पास शरीर के अवयवों के निर्माण के लिए सॉफ्ट वेयर मौजूद रहता

है .कोशाओं की यह एम्ब्रियोनिक स्टेज होती है जब सब यकसां  विभेदन  के पहले  रहतीं हैं

Undifferentiated

stage of cells after conceptions undergoing few divisions.

 .विभेदीकरण के बाद सब दिए हुए प्रोग्राम के अनुरूप काम करतीं हैं .यहाँ अस्थिमज्जा से ये कलम

कोशायें उसी मरीज़ से प्राप्त की जायेंगी जिसे यह त्रिपक्षीय शल्य चिकित्सा व्यवस्था मुहैया करवाई जायेगी

.उसी के दिल की कोशाओं की दुरुस्ती के लिए ये नव कोशायें गढ़ी जायेंगी .

बाई पास के तहत दिल को रक्त की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक नया रास्ता मुहैया करवाया जाता है

अवरुद्ध हो चुकी धमनियों को बाई पास किया जाता है .

भारतीय मूल के अमरीकी चिकित्सा और शल्य के माहिर डॉ .मुकेश हरिआव्ला अगले बरस की पहली

तिमाही में मुंबई के जसलोक अस्पताल में इस  त्रिपक्षीय चिकित्सा व्यवस्था का पहला मामला निपटायेंगे .

इस शल्य के तहत एक तरफ लेजर उद्दीपन (Laser stimulation )के ज़रिये दिल के अन्दर ही तात्कालिक तौर

पर नव रक्त वाहिकाएं (ब्लड वेसिल्स ) तैयार कर ली जायेंगी दूसरी तरफ मरीज़ की ही अस्थि मज़ा से

पल्लवित कलम कोशायें भी

इंजेक्ट की जायेंगी .

यह अभिनव शल्य भी एक तरह से कुदरती बाईपास ही है जिसके  तहत वैकल्पिक रक्त वाहिकाएं शरीर के

अपने कार्य व्यापारों से ही हासिल कर ली जातीं हैं .


यह तितरफा  शल्य उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जिनकी रक्त वाहिकाएं उम्र के साथ

अपविकास को प्राप्त होने लगतीं है डीजेनरेट   होने लगतीं हैं .ह्रासी विकास होने लगता है ऐसा ही

मधुमेहियों के मामले में धमनियों का रोग पुराना पड़  जाने के बाद होने लगता है .ऐसे में बाईपास के बाद

भी धमनियां दोबारा जल्दी से अवरुद्ध हो जातीं हैं स्टंटइंग   भी मुमकिन नहीं रह जाती  है .मुझे ऐसे ही एक

मरीज़ की तीमारदारी करने निकट से ऐसे मामलों को बूझने का मौक़ा मिल चुका है .

"The surgery is mainly meant for very sick patients ,whose blood vessels degenerate over the years

-especially those who suffer from diffused disease ,which is very common in diabetics "-says Dr

Hariawala.

डॉ हरिआव्ला कहतें हैं मरीज़ से अस्थि मज्जा प्राप्त करने के बाद 6-8 हफ़्तों में प्राप्त हो पातीं हैं इनसे

कलम कोशायें स्टेम सेल्स .

शल्य के लिए दो टीयर वाली व्यवस्था चाहिए इस विशेष स्युइट  में Cath Lab और operation theatre दोनों

की सुविधाएं मौजूद रहनी चाहिए .

Cath lab :

A cardiac catheterization laboratory or cath lab is an examination 

room in a  hospital or clinic with diagnostic imaging equipment used 

to support the cathetererization procedure.

मरीज़ के ओपरेशन थियेटर में लाये जाने के बाद माहिर लेज़र की मदद से angiogenesis के ज़रिये नवरक्त

वाहिकाएं  विकसित करतें हैं पहले से ही मौजूद वाहिकाओं  की मदद से .

In this process ,vascular endothelial growth factor (VEGF) is a signal protein produced by cells that

restores the oxygen supply to tissues when blood circulation is inadequate.

"when VEGF is released within the body because of the laser ,it forms alternative blood vessels .At

the peripheral area where the angiogenesis is performed ,we then inject the patient's own stem cells

.This patches up or completely restores the blood vessels and the patient will not need further

cardiac intervention ,"said the Harvard -trained Dr Hariawala.

आलमी स्तर पर इस त्रिपक्षीय शल्य चिकित्सा के नैदानिक परीक्षण  आज़माइशएं  22 मरीजों पर कामयाबी

के साथ किये जा चुकें हैं .

 यह चिकित्सा व्यवस्था दिल की हरेक परेशानी का इलाज़ नहीं है समाधान भी नहीं है  ,सभी को यह मुहैया

भी नहीं करवाई जायेगी .यह एक पेचीला शल्य है केवल उन्हीं मरीजों को मुहैया करवाया जाएगा जिनकी

रक्त वाहिकाएं ह्रासी विकास की अवस्था में ,डीजेनरेट कर रहीं हैं .तथा अकेले बाईपास समाधान नहीं है

जिनके लिए .

संदर्भ -सामिग्री :Coming soon, tripple therapy to make hearts beat longer/TIMES CITY /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,P3.







7 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

बढ़िया जानकारी ।

आभार भाई जी ।।

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

शालिनी कौशिक ने कहा…

very useful nice presentation.thanks

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ज्ञानपरक विश्लेषण..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

अच्छी जानकारी देने हेतु आभार भाई जी,,,

resent post काव्यान्जलि ...: तड़प,,,

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

उपयोगी जानकारी हेतु आभार !

Anita ने कहा…

इतनी उपयोगी जानकारी के लिए धन्यवाद !
~सादर!!!