शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

जलवायु परिवर्तन की आहट देख सके तो देख

    
ब्लॉगर रविकर 
तापमान बढ़ता चला, सूखा आंधी बाढ़ |

बर्फ पिघलती जा रही, बढ़ती जलधि दहाढ़ |

बढ़ती जलधि दहाड़, सहे दोहा बेचैनी |

हाउस-ग्रीन इफेक्ट, राखिये नजरें पैनी |

दो डिग्री की वृद्धि, समूची धरा डुबाये |

अब औद्योगिक क्रान्ति, मनुज का जीवन खाए ||
|   जलवायु बदलाव से पैदा मौसमी उलट पुलट ठीक हमारी आँखों के सामने हो रही है .उत्तरध्रुव के गिर्द

सागर

से ही  आकार में उत्तरी अमरीका से भी बड़ा हिमक्षेत्र इस बरस पिघल (गल )चुका है .विश्वमौसम विज्ञान

संघ

के मुताबिक़ यह ऐसी ही धुर मौसम सम्बन्धी अनेक घटनाओं में से बस एक है .आफतें और भी आईं हैं .

इसी बरस सूखे ने दो तिहाई भाग अमरीका का ,पश्चिमी रूस और दक्षिणी योरोप का भी खासा इलाका

चौपट किया है .

कटार की राजधानी दोहा में आयोजित आलमी बैठक में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी जलवायु बदलाव सम्बन्धी

रिपोर्ट हालफिलाल ही  प्रस्तुत की है .इसी बरस

पश्चिमी अफ्रीका के एक बड़े हिस्से को बाढ़ ने डूब क्षेत्र में ले लिया था तथा उत्तरी गोलार्द्ध का एक बड़ा

हिस्सा लू में झुलसता रहा .


लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान हिमक्षेत्र के सफाए ने आकर्षित किया है ले देके अब तक के न्यूनतम क्षेत्र में हिम

चादर बची है .

उत्तरी ध्रुव के गिर्द सागर से मार्च से लेकर सितम्बर तक की अवधि में 11.83 million square kilometers

क्षेत्र से हिम

चादर गायब हो गई .

यह एक करोड़ अठारह लाख तीस हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र उत्तरी अमरीका के भौगोलिक क्षेत्र से ज्यादा

बैठता है .

इस पिघलाव का दुनिया भर के महासागरों पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ा  है . जैवमंडल भी असरग्रस्त हुए

बिना नहीं रहा है .

यह सारी लीला ग्रीन हाउस गैसों की है जिनमें आज भी  लगातार  वृद्धि होती जा रही है यह वृद्धि फिलवक्त

शिखर पर है .नए कीर्तिमान रचे हैं इसने .

यह दारुण खबर उस आलमी गुफतगु के तीसरे दिन आई है जिसमें 200 मुल्कों के प्रतिनिधि इस बात को

लेकर एक राय कायम करने की कोशिश कर रहें हैं की किसी भी सूरत में विश्वतापमानों में पूर्व उद्योगिक

काल के बरक्स दो सेल्सियस से ज्यादा वृद्धि इन ग्रीन हाउस गैसों से पैदा आलमी तापन से न होने पाए .

इंटर गवर्मेंटल पेनल आन क्लामेट चेंज (IPCC) के मुताबिक पहले ही भूमंडलीय स्तर पर तापमानों में 0.8

सेल्सियस की वृद्धि दर्ज़ हो चुकी है .खुदा खैर करे .

सन्दर्भ -सामिग्री :-Arctic sea icebigger than US melts

Alarming Incident A Sign Of Extreme Climate Change ,Warns UN Agency/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,NOVEMBER 30 ,2012 ,P19

शीर्षक :जलवायु परिवर्तन की आहट देख सके तो देख

Levels: ग्रीन हाउस गैस ,ग्लोबल वार्मिंग ,हिमचादर का सफाया 

7 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

तापमान बढ़ता चला, सूखा आंधी बाढ़ |
बर्फ पिघलती जा रही, बढ़ती जलधि दहाढ़ |
बढ़ती जलधि दहाड़, सहे दोहा बेचैनी |
हाउस-ग्रीन इफेक्ट, राखिये नजरें पैनी |
दो डिग्री की वृद्धि, समूची धरा डुबाये |
अब औद्योगिक क्रान्ति, मनुज का जीवन खाए ||
|

सदा ने कहा…

जलवायु परिवर्तन की आहट देता यह आलेख ... आभार आपका

रविकर ने कहा…

आभार वीरुभाई-
शीर्ष पर चिपकाने के लिए-
सादर

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

बहुत बधिया ढंग से लिखा गया लेख. आज जलवायु/प्रदूषण ऐसे विषय बन गए हैं जिन पर हर प्रबुद्ध व्यक्ति को सोचना चाहिए. रविकर जी की काव्यात्मक टिप्पणी बहत सटीक है. बधाई.

Arvind Mishra ने कहा…

रूस में हुयी बर्फबारी ने रिकार्ड तोड़ दिए हैं !अशुभ की दस्तक! ?

शालिनी कौशिक ने कहा…

सही कह रहे हैं आप .सार्थक प्रस्तुति बधाई -[कौशल] आत्महत्या -परिजनों की हत्या [कानूनी ज्ञान ]मीडिया को सुधरना होगा

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नहीं समझते, फिर भी ज्ञानी,
करत रहे मनमानी।