मंगलवार, 13 नवंबर 2012

Diabetes is here a decade early



THE MOMENT OF TRUTH

Diabetes is here a decade early

It's the bitter truth of a sweet life .Diabetes is striking Indians earlier than we think .But ,there  is

hope yet .Lifestyle modifications with the right dose of exercise can stall the onset of Type 2

diabetes  .

भारत को मधुमेह की आलमी राजधानी (ग्लोबी केपिटल )होने का गौरव हासिल है .हमारे इस दर्जे को

निकट भविष्य में कोई चुनौती नहीं दे सकता .

विश्वस्वास्थ्य संगठन  के मुताबिक़ 2025 में क्रमश :सबसे ज्यादा मधुमेही भारत ,चीन और अमरीका में ही

होंगे .

भारत में 1995 के एक करोड़ नब्बे लाख मधुमेहियों के मुकाबले 2025 में यह संख्या बढ़के पांच करोड़ सत्तर

लाख हो जायेगी .

माहिरों के अनुसार भारत में फिलवक्त छ :करोड़ दस लाख मधुमेही हैं .समझा जाता है इनमें से आधों को

अपने

रोग का पता ही नहीं हैं .अनडायोगनोज्द मामलें हैं आधे तो इनमें .

एक महामारी  की  तरह फ़ैल रहा है भारत में यह रोग खासकर शहरी क्षेत्रों में .इसके मरीजों की तादाद शहरों

में 1986 के पांच फीसद से 2009 तक  18.6%हो गई है .

कुछ तो इसके आनुवंशिक कारण रहें हैं कुछ माहौली लेकिन असल कुसूरवार हमारी खान पान रहनी सहनी

के मामले में भ्रष्ट होती जीवन शैली है .इसी वजह से इसे कहा भी जाने लगा है एक जीवन शैली रोग।

Early onset warning 

दूसरी नस्लों के बरक्स भारतीय इस रोग की चपेट में दस साल पहले ही 

आने लगें हैं .महत्वकान्क्षाओं   का दवाब हमें बचपन में ही ओढा दिया 

जाता है .कमसे कम समय में हम आज अधिक से अधिक हासिल करना 

चाहने लगें  हैं अधिकतम उपयोग देने वाली प्रोद्योगिकी की तरह .

तबाही की ओर  ले जा रही है हमें यह अत .इसी दवाब से रिस रहा है हाइपरटेंशन बोले तो उच्च रक्त चाप

,हाई ब्लड प्रेशर .खाने का चयन हम  जिस  प्रकार करने लगें हैं उस स्कीम में चर्बी ज्यादा है रेशे कम

.कमोबेश   अ -स्वास्थ्य -कर भोजन करते जा रहे हैं हम .डेस्क जॉब हमें एक स्थान पे घंटों चिपकाए रहता

है .व्यायाम के लिए न तो हमारे पास समय है न पहल .किया किया नहीं किया नहीं किया .यही एक चीज़ है

जिसे हम  आसानी से मुल्तवी रख सकतें हैं .

केलोरी डेंस फास्ट फ़ूड हमें हाई ग्लाई -सेमिक रिस्क  की ओर ले जा रहा है .इसीलिए बच्चे भी मोटापे की

जद में आने लगें हैं .

Type 2 diabetes can occur at any age 

जीवन शैली टाईप 2 मधुमेह की वजह बन रही है खून में अतिरिक्त शक्कर 

और खून में घुली चर्बी .शरीर में शक्कर और वसा का डेरा यही किस्म 

मधुमेह की हाई ब्लड प्रेशर से ताल्लुक रखती है .हाई कोलेस्ट्रोल और

 एपिल होती हमारी शेप से भी इसका सम्बन्ध है .

हमारी कमर बढ़के कमरा होने लगी है .जबकि हमारी हाईट के आधे से ज्यादा नहीं रहनी चाहिए हमारी वेस्ट

लाइन (इंचों में ).

यही सेकेंडरी डायबिटीज़ दुनिया भर में 85-90 फीसद लोगों को अपनी गिरिफ्त में लिए हुए है .ओवर वेट

और मोटापे के चलते अब अपेक्षया युवा भीड़ भी इसकी गिरिफ्त में आने लगी है .इसे ही कहा जाता था -

Non -Insulin -Dependent -Daibetes (NIDD) या फिर MATURE ONSET DIABETES .

अब लगता है एक परिभाषा और गढ़नी पड़ेगी .

Exercise and diet -the best solution

हमारा उत्सव प्रेमी ,विवाह की दावत उड़ाने को आतुर समाज भोजन भट्ट बना हुआ है .फिलवक्त पञ्च

उत्सव के माल पुए उड़ाने को हम आतुर हैं .ब्याह शादी के फ़ूड स्टाल्स में मेजें चिकनाई के बोझ से कराह

उठी हैं .हम दबा के खा रहें हैं .ऊँगलियाँ चाट रहें हैं .हमारे चित्त में कसरत का महत्व अपनी जगह नहीं बना

पाया है .

जबकि नियमित व्यायाम इन्सुलिन दक्षता को बढ़ा सकता है .रक्त चाप को कम कर सकता है .शरीर में

शक्कर और चर्बी दोनों को काबू में रख सकता है .पेशियों को मजबूती और सुडौलता  दे सकता है .सेहत ही

हमारा असल सौन्दर्य है .

Prevention is the key

सब कुछ अभी भी खत्म नहीं हुआ है उनके लिए भी जो मुहाने पे बैठे हैं-predaibetic हैं .जीवन शैली में

तरमीम करके इस जीवन शैली रोग से निश्चय ही बचा जा सकता है .

30% तक बचा जा सकता है इस तरह से इस रोग से .स्कूल स्तर से ही तवज्जो ,एक चेतना प्रसारित हो

मोटापे से बचाव की कसरत के महत्व की .

INDIAN DIABETES PREVENTION PROGRAMME (IDPP)का यही सन्देश है .

सन्दर्भ -सामिग्री :

Advertorial and Promotional Feature /The Times Of India ,Mumbai ,November 12,2012


Climate change poses grave danger to city



बचाया जा सकता है मुंबई पत्तन को जलवायु में होने वाले बदलावों से

आर्थिक विकास एवं सहयोग संघ इन दिनों एक अध्ययन में मुब्तिला है यह संस्था 0rganisation for

Economic Co-operation and Development (OECD) समुन्दर के किनारे बसे मुंबई बन्दरगाह जैसे

पत्तनों की भविष्य  में होने वाले संभावित जलवायु बदलाव एवं लापरवाही से बिना विचारे किए गए

बेतरतीब कथित विकास की

वजह से होने वाली तबाही  का जायजा ले रही है . पता चला है मुंबई पत्तन  को  सैंडी जैसे तूफानों से

न्यूयार्क और नेवार्क नगर को हाल ही में पहुंची तबाही जैसे हालातों का सामना 2070 तक करना पड़  सकता

है .

तकरीबन ऐसे ही संभावित विनाश  के मुहाने पर खड़े एक दम से नाज़ुक जलवायु तंत्रों वाले तटीय नगरों में

,पत्तनों और बन्दरगाहों में मुंबई का छटा नंबर है ,जलवायु  का ऐसा ही धुर बिगडैल मिजाज़ मुंबई

महानगरी में  तब एक

करोड़ चौदह लाख लोगों की जान को सांसत में डाल सकता है .अलावा इसके 1.6 ट्रिलियन डोलर की इस


स्वप्न नगरी को आर्थिक नुकसानी उठानी पड़  सकती है .

बोले तो तकरीबन 16 खरब डॉलर (एक ट्रिलियन =1000 बिलियन )की बेहिसाब नुकसानी उठानी पड़


सकती है मुंबई पत्तन को .



क्या हम बच सकते हैं इ स नुकसानी से ?

हाँ !यदि अब बे -तहाशा होने वाला कांक्रीटीकरण रोक दिया जाए .रीयलटार्स को खुलकर खेलने का मौक़ा न

दिया जाए , भले मुंबई नगरी  औसतन समुन्द्र तल से मात्र 46 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित है  .   

महानगरी को कुछ जल द्वार मुहैया करवाए जाएं ताकि सैंडी जैसे प्रचंड तूफानों से पैदा जल भराव से बचा

जा सके .

कछार इलाके को बचाया जाए अतिक्रमण से .ये फ्लड प्लेन्स बने रहें नगर की हिफाज़त के लिए यह बहुत

ज़रूरी  है उतना ही ज़रूरी और एहम है जितने के स्लूस गेट (जल द्वार ).फिलवक्त जल द्वारों का तोड़ा है

एक दम से अभाव है .

नगर की जल निकासी ,मल  निकासी प्रणाली में भारी सुधार की ज़रुरत है .कुछ ज़मीन बिना कंक्रीट की भी

चाहिए ताकि भू -जल रिस सके aquifers की री -चार्जिंग भी कुछ तो हो सके .

ज़ाहिर है अन -अधिकृत बे -खौफ निर्माण को रोकना होगा .


वनस्पति गरान (Mangroves ) उगाने होंगें .

दलदल या नदियों के छोर पर उगने वाला एक उष्णकटिबंधीय वृक्ष होता है Mangrove जिसकी कुछ जड़ें

ज़मीन पर होतीं हैं .लेकिन ज़मीन तो बचानी होगी रीयाल्टर हड़प से .तभी बचेगा मुंबई नगर .

(ज़ारी )


7 टिप्‍पणियां:

संदीप पवाँर (Jatdevta) ने कहा…

डायबटीज के बारे में आपका लेख बहुत मददगार रहेगा।
वीरु जी दीवाली की शुभकामना।
आजकल बम्बई में ही जमे हो कि फ़िर से निकल लिये किसी घुमक्कडी पर। आप जैसा ज्ञानी और घुमक्कड मैंने नहीं देखा।

madhu singh ने कहा…

behtareen suchnayo ko aap nirantar pravahit karte rahe, behad upyoge hai,aaj diipavli ke pavan parv pr aapke gyan rupi prakas se sabhi ke jivan prakashit hoga happy prakashotsv

ZEAL ने कहा…

Very informative post..Thanks.
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

दीपावली की ढेर सारी शुभकामनायें |
आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (14-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी । जरुर पधारें ।
सूचनार्थ ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

उपयोगी पोस्ट।
आतिशबाजी का नहीं, ये पावन त्यौहार।।
लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।
--
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
(¯*•๑۩۞۩:♥♥ :|| दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें || ♥♥ :۩۞۩๑•*¯)
ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

रविकर ने कहा…

सटीक विश्लेषण |
महत्वकांक्षा भी एक बड़ा कारण-
तनाव बढ़ जाता है -
आभार वीरू भाई ||

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अब और सावधान रहना पड़ेगा..