शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

Rewiring brain offers hope to stroke patients

Rewiring brain  offers hope to stroke patients

स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात ,ब्रेन अटेक )से पैदा कायिक अक्षमता के समाधान के लिए स्कॉटलैंड के माहिर हमारे दिमाग में नए न्युरोन सर्किट पैदा करने की एक अभिनव विधि पे काम कर रहे हैं .यह प्राविधि है वेगस नर्व
इस्टीम्युलेशन (Vagus nerve stimulation ).ग्लासगो विश्वविद्यालय से सम्बद्ध इंस्टिट्यूट आफ कार्डियोवैस्कुलर एंड मेडिकल साइंसिज़ के माहिर मनुष्यों पर इसके नैदानिक परीक्षण करने जा  रहे हैं .

मन और काया का परस्पर एक महत्वपूर्ण सेतु बनती है यह नर्व (नस या स्नायु ,तंत्रिका ).

Vagus nerve:Either of the tenth pair of cranial nerves that carry sensory and motor neurons serving the heart ,lungs ,stomach ,intestines and various other organs

न्युरोन हमारे स्नायुविक तंत्र की एकल प्रकार्यात्मक इकाई (एकल कोशिका )का नाम है .यही न्युरोन शरीर से दिमाग को इंद्रिय संवेदनों से प्राप्त  सूचना पहुंचाते हैं तथा  दिमाग से शरीर के अंगों के संचालन के लिए आदेश लाते हैं .इस तरह सूचना प्रवाह के मामले में हमारा दिमाग एक टेलीफोन एक्सचेंज की तरह है .

आघात बोले तो दिमागी दौरा दिमागी ऊतकों के क्षय की भी वजह बनता है जिससे संभाषण ही नहीं आंगिक संचालन भी बाधित हो सकता है .

निदानिक परीक्षण के लिए ऐसे 20 रोगियों का चयन किया गया है जिन्हें 6माह पूर्व दिमाग का दौरा (स्ट्रोक) पड़ा था .इसके बाद से ही इनकी बाजू ठीक से काम नहीं कर पा रही है .

परीक्षण के दौरान इनमें  से प्रत्येक को हफ्ते में तीन बार एक घंटा फिजियोथिरेपी मुहैया करवाई जायेगी .यह सिलसिला 6सप्ताह तक चलेगा .ताकि इनके बाजू संचालन में कुछ सुधार आवे .

इनमें से आधों को फिजियोथिरेपी के साथ साथ एक वेगस नर्व इस्टीमुलेटर(VNS) प्रत्यारोप भी लगाया जाएगा .इसी इस्टीमुलेटर  का   सम्बन्ध गर्दन की वेगस नर्व से रहता है .फिजियोथिरेपी के सत्र के दौरान ही VNS से  उत्तेजन प्रदान  किया जाएगा वेगस नर्व को .

समझा जाता है यही उत्तेजन दिमाग से ऐसे दिमागी रसायनों के स्राव को प्रेरित करेगा जो अपने पैदा होने के स्थान पर ही न्यूरो ट्रांस मीटर  का काम अंजाम देने लगेंगे .

यही रसायन दिमाग को नए न्यूरोन परिपथ (न्यूरल सर्किट )खड़े करने में मदद गार  साबित होंगें .यही अभिनव सर्किट बाजू के संचालन में मदद गार साबित होंगें .

यह ठीक वैसे ही है जैसे एक बिजली उपकरण का  माहिर उपकरण में शोर्ट सर्किट की दुरुस्ती करके उसे पुन :चालू  करवा देता है .

भारत के लिए यह प्राविधि एक वरदान साबित हो सकती है (बशर्ते कामयाब सिद्ध हो परीक्षणों में) जहां 2015 आने पर  स्ट्रोक के 16 लाख तक मामले दर्ज हो सकते हैं  साल -दर -साल .

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् के अनुसार 2004 में स्ट्रोक के 9.3 लाख मामले दर्ज़ हुए थे तथा भारत में स्ट्रोक से मौत के 6.4 लाख मामले दर्ज़ हुए थे .इनमें से ज्यदातर लोग 45 साल से कम उम्र के थे .

दिलगति नियामक बोले तो पेसमेकर की तरह ही है VNS जिसे कोलर -बॉन  के नज़दीक चमड़ी के नीचे फिट कर दिया   जाता है .इससे सम्बद्ध एक महीन तार इसे वेगस नर्व से जोड़ देता है .

इस प्राविधि को इस प्रकार सॉफ्ट वेयर दिया जाता है ताकि यह कमज़ोर स्पन्द (वीक इलेक्ट्रिकल सिग्नल )रुक रुक कर वेगस नर्व के ज़रिये दिमाग तक भेज सके .

These signals help prevent the electrical bursts in the brain that cause seizures.

सन्दर्भ -सामिग्री :-Rewriting brain offers hope to stroke patients/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,JANUARY 29,2013


8 टिप्‍पणियां:

Anita (अनिता) ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी सर ! आभार आपका..!
~सादर!!!

Anita (अनिता) ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Anita ने कहा…

वैज्ञानिक यदि नया न्यूरोन सर्किट बना सकने में कामयाब हो जाते हैं तो कितने ही लोगों को नया जीवन मिलेगा..

रविकर ने कहा…

अच्छी जानकारी |
आभार भाई जी ||

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत ख़राब बीमारी है भाई जी। न जीने देती है ,न मरने देती है।
आशा की किरण बनकर आएगी यह विधि, यदि सफल पाई जाती है।
अच्छी जानकारी .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दिमाग की बिजली..तार भी होंगे ही..

madhu singh ने कहा…

yah navintam जानकारी बहुत से लोगो के जीवन
में आशा के प्रकाश को भर देगी.bahut hi upyogi jakari

शालिनी कौशिक ने कहा…

nice information .thanks नसीब सभ्रवाल से प्रेरणा लें भारत से पलायन करने वाले
आप भी जाने मानवाधिकार व् कानून :क्या अपराधियों के लिए ही बने हैं ?