सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

बढ़ जाता है बांझपन के खतरे का वजन मधुमेहग्रस्त मर्दों में

बढ़ जाता है बांझपन के खतरे का वजन मधुमेहग्रस्त 

मर्दों में 

Men with diabetes have higher risk of being infertile ,says Jaslok study/CITY/www.mumbaimirror.com/city/MumbaiMirror,FEBRUARY18,2013,P10

दक्षिणी मुंबई के मशहूर जसलोक अस्पताल के Assisted reproduction and Genetics department के  माहिरों ने अपनी एक अभिनव शोध में पता लगाया है ,मधुमेह रोग  शुक्राणुओं के DNA(Deoxy -ribo- nucleic acid, a nucleic acid molecule in the form of a twisted double strand (double helix )that is the major component of chromosomes and carries genetic information )को क्षति ग्रस्त कर देता है .

इस तीन साला अध्ययन में 27-45 साला 60 मधुमेहग्रस्त पुरुषों तथा 78 स्वस्थ नीरोग मर्दों के स्पर्म की पड़ताल करने पर पता चला ,रोगग्रस्त मर्दों में जहां शुक्राणुओं की तादाद (स्पर्म काउंट )26.18मिलियन थी वहीँ नीरोगियों में यह 59.62मिलियन थी .

रोगग्रस्त 92%मर्दों के शुक्राणुओं  की संरचना जहां अ -सामान्य  थी वहीँ ऐसा सिर्फ 10.7 नीरोगियों में था .

रोग ग्रस्त लोगों में स्पर्म मोबिलिटी शुक्र की अंडाणु (ओवम )से दौड़ के मिलन मनाने की क्षमता भी असर ग्रस्त हुई थी .रोगियों में स्पर्म मोटिलिटी जहां 21.85%थी वहीँ नीरोगियों में 46.29%पाई गई .

Diabetics also show an increased sperm apoptosis -where in sperm cells die leading to DNA fragmentation.

मधुमेह  शुक्र की मौत की भी वजह बनता है नतीजा होता है डीएनए विखंडन .

चेतावनी भरी एक बात यह है यह आंकडा अपेक्षाकृत ऐसे युवा मधुमेहियों  से हासिल हुआ है जिनका रोगनिदान ही यहाँ आके पहली मर्तबा हुआ है .

माननीया डॉ पारीख की टीम ने यह अध्ययन गत सप्ताह सम्पन्न उस सेमीनार में प्रस्तुत किया है जिसका विषय था :Male Infertilty.

According to Parikh the chances of conceiving naturally or with the help of Invitro fertilization (IVF) comes down drastically with increased sperm apoptosis .Dr Arundhati Athalye ,one of the member of the research team said ,"There are studies that show that couples comprising diabetic men  take more time to conceive .Moreover the chances of mis-carriage are high as well."

युवाओं के बे -तहाशा इस रोग की चपेट में आते चले जाने की वजह से इस अध्ययन का महत्व और भी बढ़ जाता है .

मर्दों को ब्लड शुगर की जांच कराते रहना चाहिए ताकि शुरु आत में ही ज़रूरी कदम उठा लिए जाए .मधुमेह की रोग निदान के रूप में पुष्टि होने पर ,ज़रूरी है खून में शक्कर के स्तर पर काबू ,जीवन  शैली ,सोने जागने की आदत ,खानपान में तबदीली ,एंटीओक्सिडेंट युक्त पदार्थों का सेवन . 




9 टिप्‍पणियां:

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

शिक्षाप्रद जानकारी | आभार

Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

madhu singh ने कहा…

सर जी ,वैज्ञानिक अनुसंधानों के
उपरांत प्राप्त बेहद उपयोगी सूचनाओ
का खूशूरत समन्वय और प्रस्तुति

Anupama Tripathi ने कहा…


बहुत मेहनत से आप उपयोगी जानकारी देते रहते हैं ...!!

आभार .

रविकर ने कहा…

आंकड़ों के साथ-
बहुत बढ़िया आदरणीय ।।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

जानकारी ज्ञानवर्द्धक है पर हिंदी अनुवाद कुछ भ्रामक हो गया है। बांझपन को ज्यादातर महिलाओं से जोड कर देखा जाता है। वजन की जगह खतरा शब्द ज्यादा ठीक नहीं रहता?

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

.बंधू पुरुष भी बाँझ होते हैं मात्र महिला नहीं .कभी लो स्पर्म काउंट (कमतर तादाद शुक्राणुओं की ,कभी पूअर स्पर्म मोटीलिटी ,ऐसे में फिमेल एग ,ओवम या अंडाणु

तक शुक्राणु के पहुँचने के मौके कम हो जाते हैं . खतरे का वजन नया प्रयोग है .खतरे की डिग्री का सूचक है .बाँझ सिर्फ औरत ही नहीं होती मर्द भी होते हैं .आपके अन्दर के पुरुष को अटपटा लगा

होगा यह प्रयोग .

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मधुमेह तो हज़ार दिक्कतों की जड़ है ही

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

युवा दुनिया की ओर अधिक खिंच रहे हैं, बीमारियाँ युवाओं के प्रति।

Pratibha Verma ने कहा…

आप उपयोगी जानकारी देते रहते हैं ...आभार ...