शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

गृह मंत्रीजी कहिन

गृह मंत्रीजी कहिन 

भारत के गृहमंत्रालय को आइन्दा सूचनाप्रदाता मंत्रालय कहा जाना चाहिए .सूचना देना एक बड़ी बात होती है .लोगों को आगाह करना -भाइयों खबरदार रहना फलां राज्य में आतंकी विस्फोट कर सकते हैं .कोई मामूली बात नहीं है .गृह युद्ध की आशंका हो तब भी सूचना प्रदाता मंत्रालय यही कहेगा भाइयों सावधान रहना गृह युद्ध छिड़ सकता है .लोग अपनी अपनी हिफाज़त करें .और वह चुप्पा सिंह हमेशा की तरह यही कहते पाकड़े जायेंगे -आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा .

भाईसाहब हमारा मानना यह है कि वोट के आगे लार टपकाने वाली राजनीति आतंकवाद का मुकाबला कर ही नहीं सकती .बेहतर  हो लोग खुद अपनी हिफाज़त करें .

वोट  के आगे लारटप काऊ राजनीति को एक बड़ा लक्ष्य हासिल करना है .बहुसंख्यकों की आबादी को अल्पसंख्यकों के बराबर लाना है .तभी तो भारत के संशाधनों पर मुसलामनों का पहला हक़ होगा .फिलवक्त यह अनुपात लड़का -लड़की अनुपात की तरह विषम बना हुआ है .यह ना -इंसाफी है .भारत की कोई सवा करोड़ आबादी में से कुछेक लाख ठिकाने लगते रहें तब भी इसे हासिल करने में वक्त लग जाएगा .बेहतर हो विस्फोट स्थल पर लोग बड़ी संख्या में पहुंचें ,सामूहिक विवाह की तरह सामूहिक हाराकरी का सुनहरा अवसर मुहैया करवाती है सरकार .भगवान उसका भला करे .इसमें सूचना प्रदाता मंत्रालय का बड़ा योगदान आने वाली नस्लें याद करेंगी .

7 टिप्‍पणियां:

Anita (अनिता) ने कहा…

कुछ कहने-सुनने को अब रहा ही क्या ...... एक चोट भरती नहीं .. कि दूसरी पड़ने को तैयार रहती है... :((
~सादर!!!

Anita (अनिता) ने कहा…

musafir ने कहा…

ji bilkul sahi kaha aapne
"कि वोट के आगे लार टपकाने वाली राजनीति आतंकवाद का मुकाबला कर ही नहीं सकती"

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

वोट के आगे लार टपकाने वाली राजनीति आतंकवाद का मुकाबला कर ही नहीं सकती .बेहतर हो लोग खुद अपनी हिफाज़त करें

Sahi Baat..... Sateek Baat

शालिनी कौशिक ने कहा…

.गृह युद्ध की आशंका हो तब भी सूचना प्रदाता मंत्रालय यही कहेगा भाइयों सावधान रहना गृह युद्ध छिड़ सकता है .लोग अपनी अपनी हिफाज़त करें .और वह चुप्पा सिंह हमेशा की तरह यही कहते पाकड़े जायेंगे -आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा .apni hi bat aap apne par lagoo kar len to behtar kyonki aapki tarah mujhe jagah jagah apni asahmati dikhane kee n aadat hai aur n main is kam ko variyata deti hoon .aap apni sabhyata kee seema se bahar jakar tippani karte hain aur nahi jante ki ye anuman hi bahut see bar mamle ko khol kar samne late hain .ab apni tippani ko apne par lagoo karen .aabhar
जब किसी को कोई बात ,विषय स्पष्ट न हों तब वह सारी संभावनाओं को कहकर अपनी अल्पज्ञता को छिपाता है यह हो सकता है ,यह सच हो दूसरा विकल्प यह है यह सच न हो .विवेक न होनें पर एक प्रकार का पागलपन उत्पन्न होता है ,मरा जीव चिड़िया भी हो सकती है बिल्ली भी .यह षड्यंत्र भाज[पा का भी हो सकता है कांग्रेस का भी . आप क़ानून व्यवस्था में जो शिथिलता आई है उसको कारण नहीं मानती .इतने पागल पन तक जाना ऐसे व्यक्ति का तो मनो रुग्णालय में इलाज़ होना चाहिए .क्या है इस तरह से इसे वेब साईट पे डालना सामान्य बात है ?,आदमी तो अपने रोग को छिपाता है .इस तरह का तर्क प्रलाप कहलाता है .कुछ कहें तो निश्चित तो हो -ये क्या बात हुई -हो सकता है चोरी चोर ने की हो। हो सकता है न भी की हो .अथवा या कहने वाले अ- निश्चय में ही जीते हैं .निर्भया बलात्कार काण्ड एक सामजिक पतन है , एक दुर्घटना हुई है जिसने सबको हिला दिया है .क़ानून को लागू करने वाले सांसत में पड़े हें हैं .कितु उसको इस तरह से किसी से भी जोड़ना विवेकहीनता का परिचायक है . .हो सकता है रूस की घटना में आकाश का षड्यंत्र हो .कोई आकाश की राजनीति बतलाये - बाढ़ आने को .तो क्या कहिएगा ?

SM ने कहा…

well written
Sateek Baat

रविकर ने कहा…

सटीक प्रस्तुति ||
आभार आदरणीय ||