शनिवार, 1 दिसंबर 2012

आरोग्य समाचार

आरोग्य समाचार

(1)लाल मिर्च में मौजूद रहता एक एंटीइन्फ्लेमेट्री पदार्थ .इसे कहतें हैं कैप्सासिन (Capsaicin ).यह पदार्थ

जोड़ों के दर्द में भी राहत दिलवाता है .इन्फ्लेमेशन शरीर के एक अंग की एक अवस्था है जिसमें वह लाल

,तकलीफदेह और सूजन युक्त हो जाता है .वह बनती है इस इन्फ्लेमेशन की कोई चोट या रोगसंक्रमण .

एक ऐसी दवा जो इसका शमन करती है एंटी -इन्फ्लेमेट्री कहलाती है .


Hot chillis contain an anti-inflammatory substance called capsaicin  that offers relief from arthritic pain .

Capsaicin is a colorless compound C18H27NO3 found in hot peppers and is used in medicine and

as a flavouring agent .It helps in migraine also .

Inflammation is the body's response to injury ,which may be acute or chronic .

Acute inflammation is the immediate defensive reaction of tissue to any injury ,which may be

caused by infection ,chemicals ,or physical agents .It involves pain ,heat redness ,swelling and loss

of function of the affected part .Blood vessels near the site of injury are dilated ,so that the blood

flow is locally increased .White blood cells enter the tissue and begin to engulf bacteria and other

foreign particles .Similar cells from the tissues remove and consume the dead cells ,sometimes with

the production of pus ,enabling the process of healing to commence .

In certain circumstances healing does not occur and chronic inflammation ensues.

(2)गर्भवती महिलाओं को अपने फूले बाहर को उभरे हुए उदर को ,बेली को तेज़ रोशनियों से बचाना चाहिए

.गर्भस्थ की आँखों को नुक्सान पहुंचा सकती हैं ये तेज़ रोशनियाँ .

(3)RUNNING TOO FAR ,FAST ,AND LONG BAD FOR HEALTH

Vigorous exercise is good for health ,but only if it is limited to a maximum daily dose of 30 and 50

minutes , say researchers .The idea that more high intensity exercise ,such as marathons ,can only

do you good is a myth and it is likely to do more harm than good to your heart.

ऑक्सीजन की खपत बढ़ाने  वाला ऊर्जायुक्त ज़ोरदार व्यायाम रोजाना 30-50 मिनिट अवधि का ही दिल की

सेहत के लिए अच्छा है इससे ज्यादा अवधि का व्यायाम दिल को नुक्सान ही ज्यादा पहुंचा सकता है फायदा

कम .महज़ मिथ है यह मानना की लम्बी दौड़ ही आपको फायदा पहुंचा सकती है ,यथार्थ नहीं है .



होमवर्क की प्रासंगिकता 

एक अभिनव अध्ययन ने न सिर्फ होमवर्क की ज़रूरीयात पे सवाल दागा है

 आशंका भी जतलाई है कहीं यह मेधा का अपमान समय की 

बर्बादी अपव्यय तो नहीं है ?

Homework not the key to scoring better grades/TIMES

 TRENDS/THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,NOVEMBER 30 

,2012,P19

एक अभिनव अध्ययन के मुताबिक़ ज्यादा होमवर्क से बच्चों को लादने का मतलब उनके ग्रेड में बेहतरी नहीं है .रिसर्चरों ने यह निष्कर्ष 

अपने अध्ययन में तकरीबन दसवीं के 18000 बालकों को 

प्राप्त 

ग्रेड की कोपी (नकल )एवं अन्य आंकडें देखने के बाद  प्रस्तुत किये हैं .जानने की भरसक कोशिश की है क्या घर में किया गया अतिरिक्त 

होमवर्क कुछ मायने भी रखता है .पता चला 

,ज़रूरी नहीं है यह ,घर में किया गया फ़ालतू श्रम बालकों के ग्रेड में सुधार ही लाये .अलबत्ता मानक टेस्ट स्कोर में उनके प्रदर्शन को थोड़ा 

सुधार सकता है .

यह अन्वेषण वर्जिनिया विश्वविद्यालय चार्लोट्स विल (अमरीका )का है जिसके अनुसार अधिक गृह कार्य का भार बच्चों के ग्रेड प्रदर्शन में 

सुधार नहीं ला पाता है .

"The more time students spend on homework ,it's not clear that 

they are getting better grades or better test 

scores ,"co-author of the study Robert Tai ,said .

रिसर्चरों के अनुसार होमवर्क की बाबत  चिंता का सबब यह है कि होमवर्क बस दे दिया जाता है इसका मकसद जो कुछ क्लास में पढ़ाया 

सिखाया जा रहा है उसे समेकित करना नहीं है .बेशक 

अध्ययन यह नहीं 

कहता है कि हर दर्जे का होमवर्क नाकारा है ,गणित इसका अपवाद है .

जो नौनिहाल आधा घंटा घर पर गणित का अतिरिक्त अभ्यास करते हैं उनका ग्रेड और टेस्ट मान दोनों ही सुध्ररते हैं .






5 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति |
बधाई भाई जी ||

SM ने कहा…

very useful information

Reena Maurya ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी..

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

राम नाम बरानने,सहस्र नाम तुल्यं.
शर्मा जी की लेखनी अविरल रूप से आरोग्य की सीख और जानकारी देती रहती है. इनके लेखों की पाठकों को उद्विग्नता पूर्वक प्रतीक्षा रहती है. बधाई.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

लाल मिर्च से तो बहुत घबराहट लगती है..