सोमवार, 10 दिसंबर 2012

ख़बरें सेहत की

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Antibiotics A Matter of Course

If you are giving your child antibiotics ,be sure to give her the entire course of the prescription ,even after she starts to feel better .According to experts ,only taking an antibiotic for a few days can leave some bacteria alive.Not only can this result in antibiotic resistant bacteria that can spread to other people ,but it can also leave your child vulnerable to a recurrent infection .Read and follow the prescribing instructions that came with the medication , and if you are still unsure ,ask your pharmacist for guidance.

यदि आपके बच्चे को एंटीबायिटिक दवाएं दी जा रहीं हैं तो इन्हें नियम निष्ठ होकर देते रहें बिला नागा .पूरा

कोर्स दवाओं का निपटाएं इस मुगालते में न रहें अब तो बच्चे को आराम है अब दवाओं का क्या काम .ऐसा करने

 पर वही  बीमारी दोबारा ज्यादा घातक रूप में लौट आयेगी .न सिर्फ इस खतरे का वजन आपके बच्चे के लिए

बढ़ेगा  उसी बीमारी के दवा प्रतिरोधी स्वरूप का सामना उसके संपर्क में आये अन्य लोगों को भी करना पड़ेगा

,इलाज़ बीच में छोड़ के खड़े हो जाना दवा प्रतिरोध की हिन्दुस्तान में एक बड़ी वजह बना है .इसी रवैये के चलते

आज मुंबई को परिपूर्ण दवा रोधी तपेदिक का सामना करना पड़  रहा है . परसों तपेदिक के इसी उग्र स्वरूप ने

एक होनहार छात्र की जीवन लीला समाप्त  कर दी जिसका इलाज़ चल रहा था लेकिन कोई भी दवा काम नहीं

कर रही थी .

मिथ या यथार्थ

You can catch cold by being cold .

False .सर्दी के मौसम (सर्द मौसम )का बीमारी से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है .सर्दियों के मौसम में  सर्दी जुकाम

 की मुख्य वजहों में से एक रहती है विटामिन D की कमीबेशी .सूरज की रौशनी ,धूप में समय न बिता पाना ,हवा

 का कमतर नमी लिए रहना ,कम आद्रता वाली सूखी हवा में विषाणु देर तक असर दार बना रहता है .



दूसरी वजह बनती है अधिक समय तक घर घुस्सू ही बने रहना सर्द मौसम  में जहां ज़रासीमों के  फैलने के मौके

 ज्यादा रहतें हैं .

According to the National Institutes of Health ,the average child will get 8  to 10 Colds in a typical

year.



4 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

तपेदि‍क के बारे में तो मुझे पता चला कि दि‍ल्‍ली सरकार के छोटे चि‍कि‍त्‍सालय मरीज की पूरी दवाई नि‍काल कर अलग कर लेते हैं और फि‍र उस डि‍ब्‍बे पर मरीज का नाम लि‍ख देते हैं. इसके बाद हर रोज मरीज को अपने यहां ही बुला कर दवाई देते हैं, अगर कि‍सी दि‍न मरीज नहीं आता तो कोई न कोई उसके घर भेजा जाता है.

यह एक अच्‍छी प्रक्रि‍या है जि‍ससे मरीज की दवाई का बीच में ही नागा नहीं हो सकता कि दवा नहीं है और मरीज भी लगातार दवा लेता है.

Virendra Kumar Sharma ने कहा…


जी हाँ काजल भाई यह चिकित्सा पद्धति प्रचलित है दिक्कत तब होती है जब मरीज़ महीने भर की दवा माँगता है घर ले जाता है .रोज़ आ नहीं सकता .प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भर्ती के शैर (किसी गज़ल के बे कार शैर )की तरह होतें हैं जहां दवा क्या डॉ। भी नहीं होते .

संदीप पवाँर (Jatdevta) ने कहा…

ह्में तो दो दिन से खांसी ने तंग किया हुआ है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रोचक और उपयोगी सलाह