शनिवार, 15 दिसंबर 2012

चूल्हे में खपती भारतीय औरत

चूल्हे में खपती भारतीय  औरत

भारतीयों के लिए चूल्हा ,चूल्हें में प्रयुक्त लकड़ी ,कंडा,(ठोस ईंधन) से पैदा घरेलू प्रदूषण  बीमारियों के लिए एक

बड़ी वजह, सबसे बड़ा जोखिम साबित हो रहा है .यही घरेलू प्रदूषण हर साल पांच लाख भारतीयों की जान ले रहा



है .इन मरने वालों में बहुलांश में महिलाएं और बच्चे ही शामिल हैं  .जबकि आलमी स्तर पर बीमारियों के लिए

सबसे बड़ा जोखिम तत्व उच्च रक्त चाप की बीमारी बनी हुई है ,दूसरे  तीसरे और चौथे  स्थान पर काबिज़ हैं


धूम्रपान मय सेकिंड हेंड स्मोक (धूम्रपान करने वाले द्वारा मुख से उगला हुआ धूआँ भी शामिल है इसमें

),एल्कोहल

और फलों का खुराक में कमतर सेवन शामिल रहा है .पांचवें स्थान पर रही है शरीर में ज़मा चर्बी (बॉडी फैट

)जबकि उच्च रक्त चाप भारतीयों के लिए जोखिम तत्व के रूप में तीसरे स्थान पर रहा है .


घरेलू प्रदूषण से होने वाली मौतों की ओर लौटते  हैं .दक्षिण पूर्व एशिया में होने वाली सालाना कुल 6लाख  समय

से पहलेहोने वाली  मृत्यु के मामलों में   भारत की हिस्सेदारी अस्सी फीसद रही है .वजह बना है IAP.बोले तो

इंडोर एयर पोल्यूशन ,घरेलू प्रदूषण .


ग्रामीण अंचलों में 70% घरों में हवा की आवाजाही के लिए रोशनदान (मौखे ,वेंटिलेशन )ही नहीं हैं

 .तीन अरब से

भी ज्यादा लोग आलमी स्तर पर चूल्हे में ठोस ईंधन लकड़ी उपला ,अन्य वन उत्पाद खाना पकाने के लिए काम

में लेने के लिए  विवश हैं .

ठोस ईंधन जलाने से पैदा कार्बन मोनोऑक्साइड ,अन्य कणीय प्रदूषक ,बेंजीन और फॉर्मलडिहाइड न्युमोनिया

,दमा (asthma),अंधत्व ,फेफड़ा कैंसर ,तपेदिक तथा जन्म के समय नवजात की अल्प तौल (Low birth weight

)की लगातार वजह बन रहे हैं .

विश्वस्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ ग्रामीण अंचलों की भारतीय रसोई में प्रदूषण का स्तर मान्य स्तर से तीस

 गुना ज्यादा तथा दिल्ली की  हमारी हवा  में मौजूद  प्रदूषकों के स्तर से छ:गुना ज्यादा दर्ज़ हुआ है .

यह नतीजे इम्पीरियल कोलिज लन्दन के साइंसदानों ने निकाले हैं .

एक तरफ भारत की गरीबी से पैदा अल्प पोषण दूसरी तरफ साफ़ ईंधन का अभाव भारत को अपना निशाना बना

 रहा है .तीसरे और चौथे नंबर पर धूम्रपान का बढ़ता चलन भारत के लिए एक उभरती हुई स्थाई समस्या बना हुआ है .

नीयत हो तो सरकारें ग्रामीण अंचलों को मिट्टी  का तेल और  खाना पकाने की गैस दोनों मुहैया करवा सकतीं हैं .एक वितरण व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी कर सकतीं हैं .

लेकिन हिन्दुस्तान में सारा लफड़ा राज्य सहायता और नीयत का ही है जिसने काले धन को तरजीह दी है .

Sharing the top ten threats for Asia ,mainly India ,study's lead author ,professor majid Ezzati of the Imperial College London ,said they include high childhood underweight ,diet low in fruits ,high blood glucose levels ,alcohol use ,Iron deficiency ,sub optimal breast feeding ,low physical activity and occupational injuries.






6 टिप्‍पणियां:

madhu singh ने कहा…

नारी जीवन की उन गंभीर समस्यायों को निरंतर प्रस्तुत करते रहें तथा उन समस्याओं के समाधान के निदान भी,बहुत ही उपयोगी प्रस्तुति कोए मसीहा बन के क्यों नहीं आता इनको बचाने,माँ पत्नी बहन बेटी न जाने कितने रूपों में यह नारी जिन्दगी को ढोते जिन्दगी बसर किये जा रही ह****new post chehra -chal

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

यह सही है कि‍ पहले चूल्‍हा जलने पर रसोइयों में धुआं भर जाता था पर आज कल चूल्‍हे के ऊपर चि‍मनी आम बात है, और गैस सि‍लेंडर भी घर घर पहुंचने लगे हैं

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

काजल कुमार जी पोस्ट में ज़िक्र ग्रामीण अंचलों का है वहां रसोई के स्थिति का है .

वहां गैस और शौचालय आज भी कहाँ हैं ?कितने हैं ?सुसराल में शौचालय न होने से एक युवती ने सुसराल जाने से मना कर दिया था .राष्ट्रीय खबर बन चुकी है यह खबर .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कठिन जीवन है चूल्हे के पीछे..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

रिसर्च इस तरफ भी होनी चाहिए .. शायद हो भी रही हो ... जो आम आदमी का ग्रामीण जीवन को सरल, सुलभ बनाए ...
शायद पुरातन व्यवस्था मेमिन कुछ मिले इस तरफ ... कोई खोजी जरूर बता पाएगा ...

ZEAL ने कहा…

i really feel sad over this miserable condition of poor and downtrodden.