सोमवार, 14 जनवरी 2013

जल मछली और मत्स्य पुरुष

जल मछली और मत्स्य पुरुष 

साइंसदानों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पता लगाया है ,मछली को पीड़ा 

केंद्र नहीं होते .कोई मष्तिष्क प्रणाली भी इनमें नहीं है और न ही इनकी 

तंत्रिका कोशिकाओं (नर्व सेल्स )में पर्याप्त इन्द्रिय संवेदन सम्बन्धी 

अभिग्राही (Sensory receptors ,ज्ञानेन्द्रिय सम्बन्धी अभिग्राही )ही होतें हैं 

,जो इन्हें दर्द का एहसास दिलवा सकें .

रिसर्चदानों के मुताबिक़ जब मछली कांटे में फंस जाती है और हुक से मुक्त 

होने की कोशिश करती है यह एहसासे दर्द उसे तब भी नहीं होता है .

चोटिल होने या विषाक्त पदार्थों का भी इन पे कोई असर नहीं पड़ता है 

.अपने प्रयोगों में साइंसदानों ने नदी में पाई जाने वाली  सुनहरी 

खूबसूरत मछली रेनबो ट्राउट के जबड़ों में सुइयां दाखिल करवाईं .तेज़ाब 

की बड़ी डोज़  दाखिल करवाई इन सुइयों से ,बी वेनम (Bee venom )भेजा 

गया .आये गए ढंग से ही नाम मात्र की हलचल इनमें देखी  गई .पीड़ा 


जन्य छ्टपटाहट नहीं .

प्रयोग के अंत में शल्य कर्म के बाद जब इन्हें छोड़ा गया ये सामान्य नजर 

आईं  .ऐसा ही तब होता है जब इन्हें जल से अलग कर दिया जाता है जल में 

वापस छोड़ने पर यह सामन्य हो जाती हैं .

जिम रोज़ इस अध्ययन के मुखिया रहें हैं आप विस्कोंसिन विश्वविद्यालय 

के जीव विज्ञान एवं शरीर क्रिया विज्ञान विभाग में प्रोफ़ेसर हैं .बकौल 

आपके लगभग अ -संभाव्य है ,मछलियाँ पीड़ा अनुभव करती होंगी ऐसा 

मान लेना .

बहर हाल उनकी बात से मेनका गांधी सहमत नहीं हैं .पचा हम भी नहीं पा 

रहे हैं इस अन्वेषण को .

बहरसूरत प्राणियों में संवेदना के अनेक स्तर हैं कुछ में ज्ञानेन्द्रिय स्पर्श 

,श्रवण ,दृश्य ,पीड़ा के अनेक केंद्र हैं कुछेक में कमतर .कई पादप प्रणालियाँ 

मछली से पीड़ा केंद्र लिए हैं .पादप भी हर्ष विषाद का अनुभव करते हैं 

Crescograph मापता है इनके संवेदन , पीड़ा, हर्ष की अनुभूतियों को .

What is a crescograph?

Jagdish Chandra Bose introduced a instrument in Paris Congress of Science 1900.It surprised the whole scientific world.It could measure the growth of plants.He had proved with his wonderful machine that plants have hearts and can feel.The machine revealed that plants have sight and a sense which tells them that a stranger is approaching.It was a strange thing for those who believed that plants were nonliving things.
'Your instrumemt is a wonderful thing',said the great scientist.They were surprised when the inventor showed them how to use the machine.
'What do you call this instrument,they asked.'A CRESCOGRAPH' ansewered the great scientist.

इधर राजनीति में कई ऐसे मत्स्य पुरुष देखने को मिले हैं जिन्हें किसी भी प्रकार की आम पीड़ा की अनुभूति नहीं होती .इनका चेहरा एक 

दम से निर्भाव ,सम्यक योग की स्थिति में रहता है .हमारी सीमा के पहरुवों ,असीम शौर्य के प्रतीक जवानों के कटे सिर हों या कोई और 

जघन्य बर्बर काण्ड ये विचलित नहीं होते .असीम शान्ति इनके चेहरे पे देखी  जा सकती है .ऐसा ही एक बिजूका (काग भगोड़ा जिसे प्यार 

से राष्ट्रीय रोबोट भी कहा जाता है )इन दिनों देश का नेत्रित्व कर रहा है .

अपवाद स्वरूप कुछ मामलों में इन्हें पीड़ा की गहन  अनुभूति भी  होती है ,एक बार ऐसा तब हुआ था जब ऑस्ट्रेलिया में एक मुसलमान डॉ 

आतंकी होने के शक में धर लिया गया था  .वोट खतरे में पड़ता देख इनकी रातों की नींद उड़ गई थी .आप चाहे तो इस पीड़ा को सेकुलर 

पीड़ा कह सकते हैं .

5 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

सचमुच अविश्वसनीय

डॉ टी एस दराल ने कहा…

विस्मयकारी जानकारी।
हालाँकि मछली पानी से बाहर आते ही छटपटाने लगती है। इसका कारण है , पानी से बाहर उसके गिल्स का बंद हो जाना जिनसे वो ऑक्सिजन ग्रहण करती है।
लेकिन यदि मछली को पानी के अन्दर जिन्दा काटें तो क्या दर्द नहीं होगा , यह नहीं पता।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वैज्ञानिक कटाक्ष जड़ा है..

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

सर जी मछली जब कांटे में आ जाती है तब वह पानी में ही होती है .कांटे से मुक्त होने के लिए वह मचलती ज़रूर है लेकिन जहां तक पीड़ा का सवाल है निरपेक्ष बनी रहती है मौन सिंह की तरह .मछली के

पास प्राणमय कोष और अन्न मय कोष तो है ,मनो मय कोष नहीं है .पीड़ा केंद्र नहीं हैं .शुक्रिया ज़नाब की टिपण्णी के लिए .

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

अविश्वसनीय,,,,
किन्तु तर्क संगत विस्मयकारी जानकारी,,,

recent post: मातृभूमि,