मंगलवार, 8 जनवरी 2013

अपराध विज्ञान : हड्डियां भी बतला सकतीं है अपराधी की संभावित उम्र नस्ल और लिंग

अपराध विज्ञान : हड्डियां  भी बतला सकतीं  है अपराधी की संभावित 

उम्र नस्ल और लिंग (जेंडर ),स्त्री या पुरुष  होने की स्तिथि 


Our bones can tell all about age , race &sex

कंकाल (हमारी हड्डियों का ढांचा अस्थि पंजर )भी अता पता देता है 

अपराधी का 

अपराध -सम्बन्धी खोज बीन के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों का प्रयोग करने

वाला मानव शास्त्री  फारेंसिक अन्थ्रापालाजिस्ट कहलाता है . मात्र अस्थियों के अध्ययन विश्लेषण से यही

माहिर अनेक वांछित चीज़ों का पता लगा लेता .किस आयु सीमा का ,आयु पराश का रहा होगा अपराधी या

कोई भी लावारिश शव  जिसकी शिनाख्त न हो सकी थी .आदमी की नस्ल और लिंग भेद (पुरुष या स्त्री होने

की स्तिथि )का भी अन्वेषण

कर लिया जाता है अस्थियों से .

अस्थि सम्बन्धी विकार भी पता लगा लिए जाते हैं  .अस्थि सम्बन्धी दोषों     से भी व्यक्ति  की शिनाख्त 

कर ली जाती   है .आदमी के चेहरे की बनावट का भी अनुमान कर लिया जाता है .गढ़ भी लिए जाते हैं नैन 

नक्श चेहरा मोहरा माहिरों द्वारा हुलिया सुनने पर .

बेशक ये अध्ययन  अन्वेषण 100 फीसद परिशुद्ध नहीं होते हैं कई मर्तबा तो व्यक्ति की नस्ल और जेंडर 

पता लगाने में भी चूक हो जाती है .शिनाख्त हो पाना ऐसे में अ -संभव सिद्ध होता  है .

दरअसल कुपोषण के अलावा अन्य चिकित्सा सम्बन्धी हालात ,मेडिकल कंडीशंस ,भी अस्थियों के निर्माण 

को असर ग्रस्त 

करतें हैं .इसलिए कंकाल या अस्थि पंजर भी कई मर्तबा सही उम्र की खबर नहीं दे पाता है .

व्यक्ति की कालक्रमिक आयु (क्रोनोलोजिकल एज )और जैविक आयु  बायोलोजिकल एज ) में ताल  मेल 

मिले ही यह भी ज़रूरी 

नहीं है 

कालक्रमिक एज पैदा होने के बाद की बीती हुई अवधि होती है और जैविक आयु का सम्बन्ध आपकी 

भौतिक अवस्था फिजियोलोजिकल स्टेट से रहता है .शरीर क्रिया वैज्ञानिक अवस्था से निर्धारण होता है 

इसका जो हर व्यक्ति के  लिए  अपनी निजी होती है .

प्रातिनिधिक रूप से कहो या वर्गीय दृष्टि से कहो इन दोनों  में एक अंतर्संबंध  देखते हैं माहिर .और  इसी 

आधार पर अस्थियों का सूक्ष्म अधययन विश्लेषण करते हैं .ताकि उम्र की प्रागुक्ति की जा सके एक कयास 

लगाया जा सके .

जहां कालक्रमिक उम्र केवल काल आधारित रहती है , वहीँ जैविक आयु को प्रभावित करने वाले कितने ही 

घटक /कारक हो सकते हैं .इनमें आनुवांशिक और पर्यावरणी कारक तो रहतें ही हैं आदमी की जीवन  शैली 

,एक्टिविटी ,सेहत और पोषण के स्तर का भी हाथ रहता है .इस प्रकार एक ही व्यक्ति की काल क्रमिक और 

जैविक आयु अलग अलग हो सकतीं हैं .

आज यह भी मुमकिन है खान पान रहनी सहनी के हिसाब से कि एक व्यक्ति की कालक्रमिक उम्र तो सत्रह 

साल है लेकिन उसकी धमनियों की उम्र चालीस साल है .थेंक्स टू  फास्ट फ़ूड .

उम्र बढ़ने के साथ यह फासला दोनों उम्रों का और भी बढ़ता जाता है .

How does an X-ray ossification test determine age ?

एक ख़ास किस्म की कोशाओं से अस्थियों के निर्माण की प्रक्रिया को ही कहा जाता है आस्सिफिकेशन .इस 

प्रक्रिया में ओस्टियोब्लास्ट कोशाओं से पहले अस्थि ऊतक बनते हैं फिर अस्थियाँ ,बॉन मेटीरिअल .

जन्म के समय हमारी अस्थियाँ मृदु उपास्थियाँ (सॉफ्ट कार्टिलेज )यानी अस्थियों के जोड़ों पर जमा सु-दृढ 

पदार्थ  जैसी ही होतीं हैं ,सु -दृढ नहीं .उम्र के साथ इनकी मजबूती बढ़ती  जाती हैं कालान्तर में सॉफ्ट 

कार्टिलेज ही 

मज़बूत हड्डियां बन जाती हैं .

There are several different  centres of bone growth in infants .The rates and the age at which these centres grow and fuse are recorded and a person's age can be determined by comparing his /her bone samples with the recorded data .

The X-ray of a particular centre ,which ossifies at a particular age ,can be matched with recorded data to predict the age .Similarly teeth develop and erupt at specific times and this can also be used to determine a juvenile 's age .

बच्चा  पैदा होता है तब 300 हड्डियां होतीं हैं जो बाद में जुड़ के  206 ही रह जाती हैं एक वयस्क में बालिग़ 

में . 

What are the main reasons of age fabrication ?

There can be many reasons to fabricate one's age .A person might add years to his /her age to get  access to a driving licence or other such legal documnets.In civil law ,age can have great importance in the asylum process as a person would become entitles to certain privileges if he or she has not crossed a particular age threshold .In criminal law ,most countries have different judicial provisions for juvenile and adult criminals .Age fabrication can give an unfair advantage to an adult criminal if he or she can pass off as a juvenile.

आज ज्वलंत मुद्दा उस अल्प शातिर बालिग़ की उम्र बन गई है जिसने कोई 

भी काम बालकों जैसा नहीं किया था बर्बरता में पाशविकता में कामवासना 

में वह सभी हदें एक के बाद एक उलाकता चला गया .निर्भया पर सबसे 

ज्यादा जुल्म भी इसी ने धाये थे 

मरते मरते वह कह गई थी :

जुल्म की मुझपे इन्तहा कर दे ,

मुझसा बे -जुबाँ  फिर कोई मिले ,न मिले .


क्या है न्यायिक स्थिति अस्थि परीक्षण  की 


एक मान्य सबूत के तौर पर ?


'जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 'के मुताबिक़ महत्व की दृष्टि से अस्थि परीक्षण  से आकलित उम्र को कोई

वरीयता प्राप्त नहीं है अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों  के बरक्स .इनमें शामिल हैं स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट ,किसी

भी शिक्षा बोर्ड का दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र ,नगर पालिका द्वारा प्रदत्त जन्म प्रमाण पत्र  या पंचायत

प्रदत्त प्रमाण उम्र के बाबत .

सुधांशु रंजन के मुताबिक़ मेडिकल टेस्ट के ऊपर अन्य दस्तावेजी सबूतों को वरीयता दी जाती है .आप

किताब 'जस्टिस,जूडोक्रेसी एंड डेमोक्रेसी 'के मशहूर लेखक हैं . जुवेनाइल जस्टिस एक्ट संख्या 12 देखा जा

सकता है जहां यह साफ़ लिखा है ,दस्तावेजी सबूत के नकली होने पर ही इस पर विचार किया जा सकता है

क्योंकि इस परीक्षण द्वारा आकलित उम्र में दो बरस की अशुद्धि रह जाती है .आकलित उम्र या तो दो बरस

तक ज्यादा रहती या फिर कम .

हरिराम के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यही लाइन पकड़ी थी .


 आज की एक और विशेष पेशकश 


दिल्ली तो क्या पूरे देश की हालत खौफनाक है ,जिन्हें सुनना चाहिए वह बहरे हो गएँ   हैं जिन्हें कहना

चाहिए वह गूंगे हो गए हैं .पीड़िता  के शव को लेने जो रात के अँधेरे में एयर पोर्ट पर जा सकते हैं वे दिन के

उजाले में प्रदर्शनकारियों से मिलने से डरते हैं .ऐसी हालत में क्या टिपण्णी की जाए .इसी हालात पर एक

वागीश जी की कविता


दिल्ली की अब यही कहानी :डॉ .वागीश मेहता 

खरपत राजा चरपत रानी ,

दिल्ली की अब यही कहानी .

             (1)

पांच हज़ार बरस की दिल्ली ,

कभी शेर थी अब है बिल्ली 

अर्जुन भीम यहाँ आये थे ,

अब तो शिशु पालों की  दिल्ली 

काले परदे ,काले शीशे,

 चलती बस में , बड़े सुभीते ,

हिंसक हवश, खूंखार दरिन्दे ,

पंजों में औरत कब्जानी ,

दिल्ली की अब यही कहानी 

            (2)

दिल्ली का एक सौध है सुन्दर ,


उसमें बैठे कई सिकन्दर ,

अपने दलबल अपने लशकर ,

हुश हुश करते कई कलंदर 

पैने  नख और दन्त नुकीले ,

खों  खों करते ,ये फुर्तीले कूदें फान्दें ,

सीमा लांघें  ,लंका काण्ड करें मनमानी 

खरपत  राजा ,चरपत  रानी ,

दिल्ली की अब यही कहानी .

              (3)

शिव भागे ,भस्मासुर पीछे, 

देवों पर है भारी दिल्ली ,

लोक तंत्र पे ,वोट है, भारी ,

राष्ट्र वाद पे सेकुलर दिल्ली ,

वोट मिलें गर बांग्ला देसी ,

फिर चाहे तो पाकिस्तानी ,

यूं तो बुरे  नहीं है  चीनी ,

पर उनकी  सूरत अलगानी .



खरपत राजा चरपत रानी ,

दिल्ली की अब यही कहानी .

          (4)

सत्ता पद तो ठीक ठाक है ,

जब तक कुर्सी ,पाक साफ़ है ,

दुष्टों ने  पर हवा बनाई ,

टूजी ,कोयला ,खेल  सफाई ,

साख का पारा शून्य से  नीचे ,

अब अपनों ने की रुसवाई ,

खेत अकेला खड़ा  बिजूका ,

सहता सर्दी ,बारिश पानी ,

दिल्ली की अब यही कहानी .

प्रस्तुति :वीरेंद्र शर्मा (वीरू भाई )

लेवल :बहरा राजा ,गूंगी रानी ,दिल्ली की अब यही ,कहानी .




















9 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आज तो हड्डियों का लेखा जोखा दे दिया आपने ...
रोचक पोस्ट ... ये नहीं पता था की बड़े होने पे हड्डियां कम हो जाती हैं (बच्चों से) ...
वागीश जी रचना ... सच का प्रतीक है ...
राम राम जी ..

रविकर ने कहा…


आगे दारुण कष्ट दे, फिर काँपे संसार |
नाबालिग को छोड़ते, जिसका दोष अपार |
जिसका दोष अपार, विकट खामी कानूनी |
भीषण अत्याचार, करेगा दुष्ट-जुनूनी |
"लड़-का-नूनी काट", कहीं पावे नहिं भागे |
श्रद्धांजली विराट, तख़्त फांसी पर आगे ||

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

रचना दीक्षित ने कहा…

हड्डियों से उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है यह विषय आज सबसे ज्यादा चर्चा में है. आपने इस विषय पर सुंदर जानकारी दी.

एक और नयी बात पता चली कि बच्चों में हड्डियां ३०० होती है और वयस्क में सिर्फ २०६. लेकिन लगता है हमारे नेताओं की रीढ़ की हड्डियां भी गायब हो जाती है. जरा इसके पीछे का वैज्ञानिक तर्क भी खोज निकालिए कि नेताओं की कितनी हड्डियां होती हैं.

ZEAL ने कहा…

Very useful post! Thanks Sharma ji.

Ashok Saluja ने कहा…

वीरू भाई राम-राम !
बढिया जानकारी ,सच को उजागर करती कविता ..
शुक्रिया....खोज=ख़बर रखने का ..:-)

Rohitas ghorela ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी मिली .. गजब की पोस्ट रही

Dr. Monika C. Sharma ने कहा…

Informative....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कलाई के माध्यम से अभी भी उम्र निश्चित की जाती है कई स्थानों पर।