बुधवार, 30 जनवरी 2013

ये आलम है दु-भाँत का

ये आलम है दु-भाँत  का

In India ,sons more likely to get hospital care

PARENTAL BIAS

बच्चों के  बीमार पड़ने पर अस्पताल दिखलाने के मामले में भी भारत में लड़के और लड़की में भेद किया

जाता है यह निष्कर्ष एडिनबुर्ग (एडिनबरा )विश्वविद्यालय,यू .के . के साइंसदानों ने अपने एक व्यापक

अध्ययन से निकाला है .

लड़कों के मामले में यह संभावना तीन गुना ज्यादा बनी रहती है कि न्युमोनिया जैसे सीने के संक्रमण की

चपेट में आने   पर उन्हें अस्पताल में चिकित्सा मुहैया करवाने के लिए ले जाया जाएगा बरक्स लड़कियों के

.जबकि इन मामलों में लापरवाही अक्सर घातक सिद्ध होती है .

ब्रितानी विज्ञान साप्ताहिक लांसेट में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक़ भारत ,पाकिस्तान और बांग्ला

देश में बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां पांच साल से छोटे बालकों में   सीने के उक्त घातक संक्रमण की

चिकित्सा चारगुना ज्यादा लड़कों को मुहैया करवाई जाती है बरक्स इसी उम्र की लड़कियों के .इनमें से

कितने ही बच्चों को तो गंभीर रूप से संक्रमण की चपेट में आने पर भी  अस्पताल नहीं ले जाया जाता है घर

में ही रख कर  इलाज़ किया जाता है .ऐसे ही गंभीर मामलों में 38%को तो अस्पताल मयस्सर ही नहीं होता

है .

अध्ययन के अगुवा रहे डॉ हरीश नायर के अनुसार क्योंकि लड़कों के एयर वेज़ स्मालर रहते हैं इसीलिए

इनके सीना संक्रमण की चपेट में आने की संभावना भी लड़कियों की वनस्पित 1.2 गुना ज्यादा रहती है

.आप एडिनबरा विश्वविद्यालय के जनसंख्या स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र से सम्बद्ध हैं .

लेकिन भारत में पक्षपात  की वजह पुत्र केन्द्रित ,पुत्र -प्रधान समाज है जो इस विषमता को गहन बनाए हुए

है  .माँ बाप के स्तर पर ही होने वाली दुभांत इसके मूल में है .

76 शोध कर्ताओं के एक समूह ने इस अध्ययन को आगे बढ़ाया  है .ये 39 अलग अलग सस्थानों से सम्बद्ध

रहें हैं .विश्वस्वास्थ्य संगठन समर्थित इस अध्ययन को 24 देशों में संपन्न किया गया है .

हरियाणा के यमुनानगर में 0-11 माह के नर शिशु को इलाज़ के लिए अस्पताल ले जाने की संभावना

कन्याओं की वनिस्पत 3.2 गुना ज्यादा  मिली  है .जबकि तमिलनाडु के वेल्लोर में यह 1.8 तथा बल्लभगढ़

(हारियाना )के लिए 3.7 ज्यादा दर्ज़ की गई है  .

कुलमिलाकर दक्षिण पूर्व एशिया में एक नर बालक को अस्पताली देखभाल मिलने की संभावना 1.9 गुना

ज्यादा रहती है जबकि अमरीका में 1.3 तथा अफ्रीका 1.4 गुना ज्यादा रहती है . यही नतीजे निकले हैं इस

अध्ययन के .


4 टिप्‍पणियां:

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

ham kisi videshi adhyayan ko aadhar kyon banayen? ye to sarvavidit hai ki aaj bhi hamare desh men 80 pratishat log isa bhed ko kar raha hai aur phir bhi ladakiyon ko kuchh nahin hoga ki dharana pale rahate hain.
ye avadharan padhe likhe kahe jane vale logon kee hai.

varun kumar ने कहा…

बच्चों के बीमार पड़ने पर अस्पताल
दिखलाने के मामले में भी भारत में लड़के
और लड़की में भेद किया
..बिल्कुल सही कहा

राम राम

madhu singh ने कहा…

भारत में लड़के
और लड़की में भेद किया जाता था औ आज भी
किया किया जा रहा है. koe n koe mapdand ya paimana ,ya fir mapni banana to padega hi.chahe desi ho ya bidesi,


प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

समाज और चिकित्सा को उद्धाटित करते गहरे शोध..