शनिवार, 5 जनवरी 2013

फर्क है भारत और इंडिया में .,रील लाइफ़ और रीअल लाइफ़ में


फर्क है भारत और इंडिया में .,रील लाइफ़ और रीअल लाइफ़ में

.बलात्कार और यौन संबंधों को ग्लेमराइज करने वाले इंडिया में मिलेंगे .ये  




हिन्दुस्तान है उन लोगों का जो भारत को विभाजित 

करवाते हैं

,बांटते हैं .जब ज़रुरत पड़ती है वोटों की अयोध्या में जातें हैं मंदिर का ताला खुलवाते हैं लेकिन मंदिर इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस आदेश के 

बाद भी बनावाने की हिम्मत नहीं जुटाते की वहां बाबरी से 

पहले मंदिर ही था .

नै दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म नम्बर एक के रास्ते में एक दरगाह (मस्जिद जैसा कुछ है )ये सेकुलर उसे इस कीमत पर भी बनाए हुए 

हैं वह आने जाने वाली गाड़ियों के सिग्नल में बाधा है .ये 

सेकुलर नाम के प्राणि इसी इंडिया में पाए जाते हैं भारत में नहीं .

ये वही  लोग हैं जो हरियाणा में एक दलित कन्या के सामूहिक रूप से बलात्कृत होने की घटना पर कहतें हैं बलात्कार पूरे भारत में हो रहे हैं 

(निहितार्थ होता है हरियाणा ) क्यों पीछे रहे )मकसद होता 

है 

सवर्ण और अ -वर्ण को बांटना .

दलित को बाँट बाँट के खाना ,कलावती के घर जाके सोना ,खाना पञ्च तारा होटल से मंगवा के  खाना .मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के विधायक अकबरूद्दीन ओवैसी का बगल बच्चा बनना .

मुसलमानों का  भारतीय संपदा और संशाधनों पर पहला हक़ बतलाना .

शाहबानों मामले में एक बेवा के हक़ में आने वाले गुज़ारा भत्ता दिलवाने वाले फैसले को बदल देना .इन्हीं लोगों का काम है .इंडिया इन्हीं हिन्दुस्तानियों का है .

इनके नेता है युवा नेता कहे समझे जाने वाले राहुल गांधी ,इनकी सुपर त्यागी माता सोनियाजी इसी इंडिया की एक अतिसशक्त महिला समझी जातीं हैं जिनके राज में महिलाएं सर्वाधिक अ -सुरक्षित हैं .

ये वही  लोग हैं जो बलात्कृता का नाम बतलाये जाने की पेशकश  करते हैं .एक युवती के बर्बरता पूर्वक बलात्कार के बाद मारे जाने को ये शहादत कहतें हैं .उसके नाम पे बलात्कार क़ानून का नामकरण करना चाहते हैं . 

वोट के सौदागर हैं ये इंडिया वाले .भारत धर्मी समाज पे ये गरियाते हैं .कौन सा शहर आज भारत का सुरक्षित है ?गाँव सबका होता है शहर निस्संग होता है किसी का नहीं होता होता तो निर्भय और उसका युवा साथी दो घंटे तक जख्मी करके फैंक दिए जाने के बाद सडक पे न पड़े रहतें ,कारें आतीं रहीं जाती रहीं किसी न तन ढांपने को कपड़ा भी न दिया .

अब अम्मा कहती है बेटा भारत में ही रहना इंडिया में न जाना .क्या मिलता है वहां जाके ?

अपनी पहचान भी भूल जाएगा .भारत धर्मी सामज में रह .क्या करेगा उस चकाचौंध में जहां हाथ को हाथ नहीं सूझता .

 सोते मोतीलाल नेहरु हैं ज़मीन पे  चादर बिछाके जेल जाने पर  ताकि आम आदमी से अपने को जोड़ सकें इनके वारिस कहतें हैं महात्मा गांधी थे वह आन्नद भवन वासी जो जेल में चादर बिछाके सोये थे फर्श पर .

इन्हें न देश के इतिहास का ज्ञान हैं न भूगोल का फिर संस्कृति का कहाँ से होगा .भारत धर्मी समाज की पीड़ा से ये लोग वाकिफ नहीं हैं .इनकी तो गर्ल फ्रेंड भी विदेशी हैं .इनके तो पुरखों की भी गर्ल फ्रेंड विदेशी थीं .ये गर्ल फ्रेंड का चलन तभी से है .लिविंग टुगेदर उसका विस्तार है .

बलात्कार और सारे धत कर्म इसी इंडिया में ज्यादा होते हैं .यहाँ के तो सांसद भी तिहाड़ जाने की होते आने की काबलियत लिए हुए हैं .

बलात्कार से भी सज्जित हैं .

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अन्तर संस्कृतियों का है और अनुशासन का भी।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

कितने कितने आक्रोश लेकर जी रहे हैं हम!
जिंदगी क्या है? यह भी भूल रहे हैं हम!!

Rohitas ghorela ने कहा…

भारत जो की हिंदुस्तान है .......अनुछेद 1. ये वो सब कुछ है जो हम चाहते हैं.

राज करने वाले पहले भी इंडिया के थे अब भी है ...सार्थक लेख।
recent poem : मायने बदल गऐ

Asha Saxena ने कहा…

आज संस्कृति धुल की कई परतों के नीचे दब कर रह गयी है |कराह रही है अपनी तकदीर पर |परिवर्तन के युग में अपने गैर और गैर अच्छे लगते हैं |तभी तो यह हाल है |
आशा

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

हम कहाँ थे और बदलते देश में कहाँ जा रहे है,,,

recent post: वह सुनयना थी,

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुनियोजित है ये अंतर ... ओर सफल हो रहे हैं वो जो भारत या भारतीय मान्यताओं में तनिक भी विश्वास नहीं रखते ...