शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

सेहत :मीठे पेय का चस्का अवसाद के जोखिम को बढ़ा सकता है


सेहत 

Study :Sweet and diet drinks could trigger depression

स्वाद अगर अवसाद दे, करिए उसको बाद |


छोड़ हटो मिष्ठान का, यह दारुण उन्माद |

यह दारुण उन्माद, खाद्य से इसे हटाओ |

भाँति-भाँति के रोग, देह से दूर भगाओ |

तली-भुनी नमकीन, घटाओ जरा मसाला |

रहो कार्य में लीन, देख कर गटक निवाला ||

                         कविवर कुंडलीकार रविकर जी 

मीठे पेय (सोडा ,कोला ,कोफी, चाय )का चस्का ,बेहद की लत बालिगों में 

अवसाद के जोखिम  को बढ़ा सकता है . 

नेशनल इंस्टिट्यूटस आफ हेल्थ इन रिसर्च ट्रायएंगिल पार्क इन केरोलिना 

के रिसर्चरों 50-71 साला 263,925 लोगों की आदत का 1995-1996 की पूरी 

अवधि में जायजा लिया .पता लगाया गया कौन कितने मीठे पेयों का यथा 

सोडा,चाय ,फ्रूट पञ्च और कोफी जैसे पेयों का  (अमरीका में मीठे पेयों को 

सोडा ही कहा  जाता है )का सेवन कर रहा था .

दस साल बाद इन तमाम लोगों से दरयाफ्त किया गया कि क्या कभी 

उनका पाला अवसाद से भी पड़ा ,डाय्गनोज किया गया था डिप्रेशन इस 

दरमियान गत सालों में ?

आश्चर्यजनक रूप से पता चला 2000 के बाद से इनमें  से 11,311को 

बाकायदा अवसाद की रोग नैदानिक पुष्टि की गई थी .

'Superfoods raise risk of cancer'

एक नाम चीनअमरीकी  साइंसदान के मुताबिक़ लोकप्रिय एंटीकैंसर 

सुपर्फूड्स 

और सम्पूरण कैंसर समूह के रोगों से बचाव करना तो दूर रहा वजह ज़रूर 

बन सकते हैं इन रोगों की .

जब तक साइंसदान एंटीओक्सिडेंट की भूमिका पर पुनरविचार नहीं करेंगे 

,कैसर रोग समूह का समाधान नहीं निकल सकेगा .एंटीओक्सिडेंट में 

शामिल रहें हैं विटामिनों की गोलियां ,ब्ल्युबेरीज तथा ब्रोक्काली जैसे 

खाद्य .




6 टिप्‍पणियां:

Dr. Monika C. Sharma ने कहा…

आजकल तो बच्चों में भी इनकी दीवानगी है

रविकर ने कहा…

स्वाद अगर अवसाद दे, करिए उसको बाद |
छोड़ हटो मिष्ठान का, यह दारुण उन्माद |
यह दारुण उन्माद, खाद्य से इसे हटाओ |
भाँति-भाँति के रोग, देह से दूर भगाओ |
तली-भुनी नमकीन, घटाओ जरा मसाला |
रहो कार्य में लीन, देख कर गटक निवाला ||

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

आपकी इस पस्तुति पर पुरानी बात याद आ रही है:
अति का भला न बोलना, अति कि भली न चुप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप.
आप अपनी उत्कृष्ट प्रविष्टियों को डाईजेस्ट करने का समय कम दिया करते हैं.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

तब तो बच कर रहना होगा..