शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

क्या पल्लवित कर रहें हैं हम ?एक अशिष्ट, ऐन्ठू ,अख्खड़ पौध ?

क्या पल्लवित कर रहें हैं हम ?एक अशिष्ट, ऐन्ठू ,अख्खड़ पौध ?

Are we raising a generation of rude brats?

एक ब्रितानी अध्ययन  के अनुसार अब 18-34 साला युवजन अपने पड़ोसियों को विश  करेंगे ,उन्हें हेलो या

प्रणाम कहेंगे ,अपने से बड़े को आता देख दरवाज़ा खोलेंगे इसकी संभावना लगातार चुकने लगी है .कमतर

हो रहें हैं ऐसे मौके .

आपके यहाँ कोई कारीगर कार्यरत है ये उसे चाय का एक गर्म प्याला देने में भी संकोच बरतेंगे .बड़े दिन के

मौके पर पोस्टमेन को बख्शीश भी न देंगें कितने ही .जबकि ये बातें सामन्य शिष्टाचार का अंग रही आईं हैं .
शिष्टाचार के शब्द इनके मुख से नहीं फूटते .

सामान्य शिष्टाचार की बातें इनमें 23%कमतर देखि गईं हैं इन्हीं के 55 साला बुजर्गों के बरक्स .

इन युवजनों में  से 35 %ने अपने पड़ोसियों की धड़ल्ले से अनदेखी की जबकि 55साला लोगों में से सिर्फ

15% ही ऐसा करते मिले .

तब क्या गोरों का भद्र लोक आखिरी साँसें ले रहा है छीज़ रहा है ?

इन युवजनों में किसी महिला या अपने से उम्र में बड़े व्यक्ति के आगमन पर उठकर दरवाज़ा खोलने की

संभावना भी 18%कमतर रही ,जन परिवहन के साधनों में सफर करते हुए अपनी सीट किसी गर्भवती

महिला के लिए छोड़ के खड़े होने की संभावना  भी इनमें 17% कम तथा किसी उम्र दराज़ के लिए अपनी

सीट छोड़ने की 12%कमतर देखी  गई .

जबकि 55साला 83%लोगों ने कहा वह अपने यहाँ काम करने वाले मिस्त्री को चाय का प्याला ज़रूर पेश

करेंगें .सर्वे के दौरान युवजनों में से आधे ने ही ऐसा करने की हामी भरी .

सर्वे YouGov ने 1000 बालिगों पर RatedPeople.com के लिए किया था .

पीढ़ियों के अंतराल के साथ बख्शीश देने का रिवाज़ भी कम हो चला है .युव- जनों की दूधवाले को बख्शीश

देने की संभावना सर्वे में 41 %कम मिली वहीँ बड़े दिन (ईसा के जन्म दिन पर )पोस्टमेन को बख्शीश देने

की संभावना भी युवजनों में 36%कम देखने में आई .

जबकि 55साला लोगों में से आज भी कमसे कम आधे लोग नाई को टिप ज़रूर देते हैं वहीँ 18-34 साला

युवजन ऐसा 30%ही करते हैं .

बात साफ़ है समाज अधिकाधिक स्व :केन्द्रित और स्वार्थी होता जा रहा है .



सेहत :Want to shed those kilos ?Ditch the booze

क्या आपकी तौल में एक ख़ास खुराक लेने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़

रहा है ?हो सकता है इसकी वजह आपके द्वारा रोज़ ली जाने वाली ड्रिंक ही बन रही हो .जानिएगा कि एक

पिंट लाजर बीयर में चोकलेट के तीन बिस्किट के बराबर केलोरीज़ ठुकी रहती हैं .

वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के अनुसार ड्रिंक्स में मौजूद केलोरीज़ के प्रति ला -परवाह बने रहना आपकी तौल के

डाईटइंग के बावजूद भी कम न होने की वजह रह सकती है .

ड्रिंक्स :प्रति सप्ताह ली जाने वाली ड्रिंक्स की संख्या कम कर दीजिए तौल में फर्क पड़  जाएगा .डाईटइंग

कामयाब रहेगी तौल कम करने में .डाईटइंग को ना -कामयाब बनाता है एल्कोहल का सेवन .सारी कवायद

बे -कार जाती है ऐसे में .

वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के अनुसार धूम्रपान के बाद एल्कोहल का सेवन ही सबसे बड़ा जोखिम तत्व सिद्ध

होता है .ओवरवेट रहना इस जोखिम का शीर्ष बिंदु बन जाता है .

रोजाना एक पिंट बीयर का सेवन करने वालों के लिए लीवर कैंसर तथा बाउल कैंसर के खतरे का वजन भी

20%बढ़ जाता है .

अखबार डेली मेल ने इस खबर को प्रकाशित किया है .

युनाईटिड किंडम में हर बरस दर्ज़ होने  वाले 20,000 कैंसर रोग समूह के मामलों का सम्बन्ध एल्कोहल के

नियमित सेवन  से ही

जोड़ा गया है .


Diabetics at risk of heart attack :

युनाइटिड किंडम से प्रकाशित एक रिपोर्ट  के अनुसार मधुमेह से ग्रस्त चले आये लोगों के लिए दिल के दौरे

के खतरे का वजन सामन्य आबादी के बरक्स करीब करीब 50 %बढ़ा हुआ रहता है .

यह खतरा सिर्फ मधुमेह के जीवन शैली संस्करण सेकेंडरी डायबिटीज से ग्रस्त रहने वालों के लिए ही नहीं

प्राइमरि डायबिटीज(बचपन से ही  इस रोग की चपेट में आये लोगों ) से ग्रस्त रहने वालों के लिए भी

उच्चतर बना रहता है .

Myth busted :Smoking can't relieve stress

महज़ मिथ है यह सोच कि धूम्रपान से मानसिक दवाब ,स्ट्रेस कम होता है 

यथार्थ यह है धूम्रपान छोड़ने से बे -चैनी ,एङ्ग्जायटी का स्तर कमतर होता 

है 

ब्रितानी शोध कर्ताओं ने अपने एक अध्ययन में तकरीबन 500 धूम्रपान करने वालों का एङ्गज़ायटी स्तर

पता लगाया .धूम्रपान छोड़ने की कोशिश से पहले और अध्ययन के बाद ऐसी कोशिश करने के बाद सफल

या फिर असफल रहने पर सभी का बे -चैनी का स्तर मापा गया .

पता चला मिथ ,जनविश्वास, के विपरीत निकोटिन एक तनाव कम करने वाले एजेंट की भूमिका में न

होकर

तनाव बढ़ाने  वाले अभिकर्मक

की भूमिका में

था .

पांच में से एक धूम्रपानी ने बतलाया वह धूम्रपान तनाव से तालमेल बिठाने की एक टेक ,सहारे के रूप में

करते हैं . इन सभी ने नेशनल हेल्थ सर्विस स्मोकिंग सिज़ेशन प्रोग्रेम में शिरकत की .इसके तहत स्मोकिग

से पार पाने के लिए ,निजात पाने के लिए ,दूर रहने के लिए सभी को निकोटिन पेचिज दिए गए .

सभी ने दोमाही एपोइन्टमेंट के तहत अध्ययन में शिरकत की .इस प्रोग्रेम में भाग लेते हुए

छ : माह के बाद 68 प्रतिभागी अभी भी धूम्रपान से बचे हुए थे .इनका बे -चैनी का स्तर मापा गया .जो पहले

से कम निकला .

जो प्रतिभागी धूम्रपान छोड़ने में ना -कामयाब रहे उनका एंगजायटी स्तर पहले के बरक्स बढ़ा हुआ पाया

गया .

ब्रिटिश जर्नल आफ साइकियेट्री में इस अध्ययन के नतीजे प्रकाशित हुए हैं जिन्हें अखबार डेली मेल ने भी

छापा है .







8 टिप्‍पणियां:

smt. Ajit Gupta ने कहा…

हमने जब से भोगवाद को अपनाया है तब से ही परिवार समाप्‍त हुए हैं और व्‍यक्तिवाद ने जगह बना ली है। इसीकारण शिष्‍टता समाप्‍त होती जा रही है।

अरुन शर्मा "अनंत" ने कहा…

आदरणीय वीरेंद्र सर नमस्कार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, एक ऐसा सार्थक विषय और मुद्दा उठाया है आपने सत प्रतिशत सत्य, अनेक-२ धन्यवाद, सादर

Anita (अनिता) ने कहा…

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ सर !
सार्थक पोस्ट !
शिष्टाचार का पालन काफ़ी कुछ घर के माहौल पर भी निर्भर करता है ! बच्चे जो देखते हैं, अक्सर वही करते हैं...!
रही बात आल्कोहॉल व सिगरेट की... तो ये दोनों ही चीज़ें नुकसान ही करतीं हैं !
और.. हाइपरटेंशन से ज़्यादा डायबिटीज़ घातक होती है ! अगर दोनों ही बीमारी किसी को हों... फिर तो बहुत ही सावधानी की ज़रूरत होती है !
~सादर !!!

Anita ने कहा…

गनीमत है अभी भारत में यह अवस्था नहीं आई है..यहाँ अब भी दूधवाला भैया होता है और रिक्शावाला अंकल भी...

Madan Mohan Saxena ने कहा…

You have written a very nice beautiful presentation.'s Pretty creative. Many congratulations to you

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच का आपने, हम घर में काम करने वाले हर व्यक्ति का घर के सदस्य जैसे ही देखभाल करते थे। न जाने क्या हो गया है हमको।

Arvind Mishra ने कहा…

शिष्टाचार से लेकर आरोग्याचार .. क्या बात है?

madhu singh ने कहा…

शिष्टाचार के मर्यादा हनन को देखते ही JAYEEYE,SIR APNA HATHELI ME CHUPATE JAYEEYE ,BEHATAREEN SIR JI