रविवार, 18 अगस्त 2013

भ्रमरगीत से एक पद और विलग जनि मानो उधौ प्यारे , यह मथुरा की काजर कोठरि , जेहिं आवत तेहिं कारे।

भ्रमरगीत से एक पद और 


विलग जनि मानो उधौ प्यारे ,

यह मथुरा की काजर कोठरि ,

जेहिं आवत तेहिं कारे।

तुम कारे ,सुफलक सुत  कारे ,

कारे मधुप भंवारे।

तिन के संग अधिक छवि उपजत ,

कमल नैन मनियारे ,

रै यमुना ज्यों पखारे ,

तागुन श्याम भई कालिंदी ,

सूर श्याम गुण न्यारे।

व्याख्या :प्रसंग है जब उद्धव गोपियों के पास निर्गुण ब्रह्म की उपासना का सन्देश लेकर पहुंचे तो गोपियों ने

उनका इस  प्रकार उपहास उड़ाया। उनका सब ज्ञान हवा हो गया। गोपियाँ उद्धव से कहतीं हैं :

प्रिय उद्धव! तुम हमारी बात का बुरा मत मानना हम तो अनपढ़ गोपियाँ हैं पर हमें  तो लगता है यह मथुरा

काजल की कोठरी है जो भी उधर से आता है वह काला ही होता है। तन भी काला दिल भी काला। सब कुछ

काला ही काला होता है उसका । तुम भी ज्ञान की ही बातें कर रहे हो हमारे पास जितने भी मथुरा से संदेशे

लेकर आये हैं

उनमें से कोई गोरा आया हो तो कह देना। तुम भी काले हो और वह अकरूर (सुफलक सुत )आया था वह भी

काला ही था।  और ये  भवंरा भी जो हरजाई सा घूम रहा है जो ऐसा लगता है हमारी बातें सुन रहा है यह भी

निपट काला है। ये भी उधर से ही आया है।

अरे तुम सब कालों का जो शिरोमणि है जिसकी कमल जैसी आँखें हैं ऐसे लगता है जैसे मणि वाला काला सर्प

हो। उसी की डसी हुई हम जैसे तैसे अपने जीवन को संभाल रही हैं। तुम आपस में सारे काले काले इकठ्ठे हो

जाते हो तू सुन्दरता और  भी बढ़ जाती है। तुम बुरा न मानना हमारी बातों का। गोपियाँ व्यंग्य बाण चलाये जा

रही हैं। उपालम्भ पे उपालम्भ किये जा रहीं हैं। उद्धव हतप्रभ हैं।

तुम सबको देखकर ऐसा लगता है जैसे सबको नील के मटके में डुबो के निकाला हो और फिर गोरा करने के

लिए यमुना में धौ दिया हो। तुम तो गोरे फिर भी  नहीं हुए यमुना ही काली हो गई। तुम्हारी कालिख नहीं उतरी

यमुना

काली ज़रूर हो गई।

अरे !कालों तुम्हारी तो लीला ही निराली है। काले पे तो कोई रंग चढ़ता नहीं है। तुम पे तो किसी का असर  होगा

नहीं। तुम्हें यमुना को क्या साफ़ करना था।


ॐ शान्ति।

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Posted: 17 Aug 2013 10:03 PM PDT
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Murli Video



  • Audio Murli Hindi
    http://www.bkdrluhar.com/00-Murlis/Murli%20Podcast/Hindi%20Full%20Murli-18.08.2013.mp3
    Hindi Murli
    18-08-13 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा” रिवाइज:16-04-77 मधुबन
    ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता
    वरदान:- देह-अभिमान के त्याग द्वारा सदा स्वमान में स्थित रहने वाले सम्मानधारी भव
    जो बच्चे इस एक जन्म में देह-अभिमान का त्याग कर स्वमान में स्थित रहते हैं, उन्हें इस त्याग के रिटर्न में भाग्यविधाता बाप द्वारा सारे कल्प के लिए सम्मानधारी बनने का भाग्य प्राप्त हो जाता है। आधाकल्प प्रजा द्वारा सम्मान प्राप्त होता है, आधाकल्प भक्तों द्वारा सम्मान प्राप्त करते हो और इस समय संगम पर तो स्वयं भगवान अपने स्वमानधारी बच्चों को सम्मान देते हैं। स्वमान और सम्मान दोनों का आपस में बहुत गहरा संबंध है।
    स्लोगन:- हर कदम में बाप की, ब्राह्मण परिवार की दुआयें लेते रहो तो सदा आगे बढ़ते रहेंगे।
  • Audio Murli English
    http://www.bkdrluhar.com/00-Murlis/Murli%20Podcast%20-%20English/English%20Full%20Murli-18.08.2013.mp3
    English Murli
    The divinity and uniqueness of Brahmin life.
    Blessing: May you be a respected one who remains constantly stable in your self-respect by renouncing body consciousness.
    Children who renounce body consciousness in this one birth and remain stable in their self-respect, receive in return from the Father, the Bestower of Fortune, the fortune of being one who is respected throughout the whole cycle. For half the cycle you receive respect from your subjects and for half the cycle you receive respect from your devotees and, at this time, at the confluence age, God Himself gives respect to His respected children. Self-respect and being respected have a very deep connection.
    Slogan: Continue to take blessings from the Father and the Brahmin family at every step and you will continue to move constantly forward.
  • Hinglish Murli

    18 – 08 – 13 Pratah : Murli Om Shanti Avyakt – Baapdada” Revised : 16 – 04 – 77 Madhuban
    Brahman Janm Ki Divyata Aur Alokikta
    Vardan : – Deh – Abhiman Ke Tyaag Dwara Sada Swaman Mei Stith Rahne Wale Sammandhari Bhav
    Jho Bacche Is Ek Janm Mei Deh – Abhiman Ka Tyaag Kar Swaman Mei Stith Rahte Hai, Unhe Is Tyaag Ke Return Mei Bhagyavidhata Baap Dwara Saare Kalp Ke Liye Sammandhari Banne Ka Bhagya Prapt Ho Jata Hai. Adhakalp Praja Dwara Samman Prapt Hota Hai, Adhakalp Bhakto Dwara Samman Prapt Karte Ho Aur Is Samay Sangam Par Toh Swayam Bhagwan Apne Swamandhari Baccho Ko Samman Dete Hai. Swaman Aur Samman Dono Ka Aapas Mei Bahut Gehra Sambandh Hai.
    Slogan : – Har Kadam Mei Baap Ki, Brahman Parivar Ki Duaye Lete Raho Toh Sada Aage badhte Rahenge.


  1. Madhuban Murli LIVE - 18/8/2013 (7.05am to 8.05am IST) - YouTube

    www.youtube.com/watch?v=t1KIanYMUDk

    2 hours ago - Uploaded by Madhuban Murli Brahma Kumaris
    Murli is the real Nectar for Enlightenment, Empowerment of Self (Soul). Murli is the source of income which ...

4 टिप्‍पणियां:

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

भक्ति रस की बहुत ही सुंदर श्रंखला, शुभकामनाएं.

रामराम.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

भक्ति रस से ओत प्रोत सुंदर सृजन लाजबाब प्रस्तुति,,,
RECENT POST : सुलझाया नही जाता.

कालीपद प्रसाद ने कहा…

भक्ति रस ओतप्रोत बहुत सुन्दर रचना
atest post नए मेहमान

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेम मद छाके, पद परत कहाँ के कहाँ...