शनिवार, 10 अगस्त 2013

दान ,अनुदान और खानदानी -गान

10th August 2013 Murli

449
Murli Pdfs

Murli Video

  • Audio Murli Hindi
    00:00
    00:00

    Hindi Murli
    मुरली सार:- “मीठे बच्चे – तुम अभी टिवाटे पर खड़े हो, एक तरफ है दु:खधाम, दूसरे तरफ है शान्तिधाम और तीसरे तरफ है सुखधाम, अब जज करो हमें किधर जाना है?”
    प्रश्न:- किस निश्चय के आधार पर तुम बच्चे सदा हार्षित रह सकते हो?
    उत्तर:- सबसे पहला निश्चय चाहिए कि हम किसके बने हैं! बाप का बनने में कोई वेद-शास्त्र आदि पुस्तकें पढ़ने की दरकार नहीं है। दूसरा निश्चय चाहिए कि हमारा कुल सबसे श्रेष्ठ देवता कुल है – इस स्मृति से सारा चक्र याद आ जायेगा। बाप और चक्र की स्मृति में रहने वाले सदा हार्षित रहेंगे।
    गीत:- किसी ने अपना बनाके मुझको……
    धारणा के लिए मुख्य सार:-
    1) सार्विस का शौक रखना है। बीमारी में भी बाप की याद में रहना है और दूसरों को भी याद दिलाना है। मुख से ज्ञान दान करते रहना है।
    2) पक्का मातेला बनना है अर्थात् एक बाप की ही याद में रहना है। सवेरे-सवेरे उठ विचार सागर मंथन करना है। दूसरा कोई भी याद न आये।
    वरदान:- पहाड़ जैसी बात को भी एक बाबा शब्द की स्मृति द्वारा रूई बनाने वाले सहजयोगी भव
    सहजयोगी बनने के लिए एक शब्द याद रखो – “मेरा बाबा” बस। कोई भी बात आ जाए, हिमालय पहाड़ से भी बड़ी हो लेकिन बाबा कहा और पहाड़ रूई बन जायेगा। राई भी थोड़ी मजबूत, कड़क होती है, रूई नर्म और हल्की होती है। तो कितनी भी बड़ी बात रूई समान हल्की हो जायेगी। दुनिया वाले देखेंगे तो कहेंगे यह कैसे होगा और आप कहेंगे यह ऐसे होगा। बाबा कहा और बुद्धि में टच होगा कि ऐसे करो तो सहज हो जायेगा। यही सहजयोगी जीवन है।
    स्लोगन:- प्यार के सागर में लवलीन रहो तो सदा समीप, समान और सम्पन्न भव के वरदानी बन जायेंगे।

10 टिप्‍पणियां:

arvind mishra ने कहा…

दान और अनुदान का फर्क बतलाईये वीरू भाई! तुलसी और खानखाना का संवाद तो रोचक रहा!

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

अगर समर्थ लोग आत्मप्रसंसा के उद्देश्य से दान करते हैं तो कहा जाता है कि इसका कोई पुण्यफल उनको नहीं मिलता है. आपने सही लिखा है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दान को आसक्ति कम करने के लिये उपयोग करना था, लोग अभिमान बढ़ाने के लिये किये जा रहे हैं।

Anupama Tripathi ने कहा…


दान की महिमा तभी है जब एक हाथ दे दूसरे को खबर न हो। वरना दान की महिमा कम हो जाती है।

सार्थक कथन ...
इसीलिए ईश्वर प्रदत्त दान वरदान हो जाता है !
ज्ञानवर्धक आलेख के लिए बहुत आभार ।

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी यह रचना आज शनिवार (10-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बड़ा बड़ा दान तो आजकाल बड़े हाथ मारने वाले ही करते हैं ,उनको पुण्य नहीं नाम चाहिए
latest post नेताजी सुनिए !!!
latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बेहद सटीक और सुंदर.

रामराम.

Vasundhara.pandey Pandey ने कहा…

सुन्दर और सच !!

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (11-08-2013) के चर्चा मंच 1334 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सटीक ज्ञानवर्धक आलेख के लिए आपका आभार ।

RECENT POST : जिन्दगी.