शुक्रवार, 4 मई 2012

स्कूल में चरस और गांजा ,भुगतोगे भाई, खामियाजा

स्कूल में चरस और गांजा ,भुगतोगे  भाई, खामियाजा
मौज में आने और बे  -चैनी भगाने के लिए आज पहले से कहीं ज्यादा किशोर किशोरियां भांग एवं चरस जैसे नशीले (एवं प्रतिबंधित ) पदार्थों का धड़ल्ले से सेवन कर रहें हैं .क्या अजीब इत्तेफाक है भारतीय पादप सन से रस्सी भी बनती है और भांग और चरस जैसे नशीले व्युत्पाद भी जिनका चोरी छिपे खूब गलत इस्तेमाल होता है .

मनोरोगविदों की माने तो स्वप्न नगरी मुंबई के किशोर किशोरियों  में गत दो बरसों में इन नशीले पदार्थों का व्यसन पहले की तुलना में ५०-७५% तक बढ़ गया है .रईस ही नहीं मध्यमवर्गीय परिवारों के किशोर वृन्द भी अब इन नशीले पदार्थों की गिरिफ्त में आरहें हैं .आगे जाके ये शौक जो लत के करीब पहुँच रहा है क्या गुल खिलाएगा इस  अबोध भीड़ को नहीं मालूम .इस खुराफाती उन्मादी छवि सचेत उम्र में  समझाना भी बहुत मुश्किल है .जहां हमजोलियों का भी निरंतर दवाब बना रहता है .आन बान और शान के लिए महाजन फेक्टर ज़रूरी है .कूल समझा जा रहा है इस शौक को .

प्रतियोगिताओं से पहले इस लत में वृद्धि देखी जा रही है .

मजेदार बात यह है ये प्रतिबंधित पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं स्कूल के आसपास पान की दूकानों पर .होम डिलीवरी भी की जा रही है .भांग की प्रजाति के एक पौधे से प्राप्त पदार्थ कैनाबिस को तो बजट ड्रग कहा जा रहा है क्योंकि इसका अवैध  सौदा सस्ते में पट जाता है.

खिलाड़ियों में भी इसका चलन दिनानुदिन स्कूल परिसर में बढ़ रहा है .एड्रीनेलिन दौड़ने लगता है नसों में इन पदार्थों के सेवन के बाद .शरीर पर जैसे चाबुक सा पड़ता रहता है इन पदार्थों का और जैसे वह आराम करना भूल जाता है .प्रदर्शन प्रदर्शन और बस प्रदर्शन की होड़ जो करादे सो कम .इन पीढियो को नहीं कोई गम .चिंता  का  विषय   होना  चाहिए  गत  जनवरी  में  संपन्न  नेशनल स्कूल गेम्स में ११ प्रतिभागी डोप टेस्ट में पोजिटिव पाए गए थे .

शरीर को बेहद की उत्तेजना और ऊर्जा से भर देते हैं ये पदार्थ इतनी ऊर्जा को शरीर की पेशियाँ संभाल नहीं पातीं हैं .दिमाग कोई सोफ्ट वेयर नहीं दे पाता है  पेशियों को .नतीजा होता है स्नायुविक तथा यौन सम्बन्धी जटिलताएं .लड़कों की छातियाँ लड़कियों की तरह बढ़ने लगतीं हैं लड़कियों का मासिक चक्र अव्यवस्थित हो जाता है .

कौन- कौन से पदार्थों का सेवन किया जा रहा है और क्या हैं इनके पार्श्व प्रभाव इसकी चर्चा अगली पोस्ट में .अभी के लिए इतना ही .खुदा हाफ़िज़ .

सन्दर्भ -सामिग्री :-More teens use marijuana to feel good ,kill anxiety

75% Rise In Cases Over Past 2 Years : Psychiatrists /TIMES CITY /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 4 ,2012 ,P4


कुछ भी से सबकुछ तक...  पठन से सूचना तक...  सूचना से मनन तक...  मनन से तर्क ( कार्य-कारण निष्पादन ) तक...  तर्क से विज्ञान तक... और ( यदि संभव हो तो ) –  विज्ञान से ज्ञान, सम्पूर्ण ज्ञान तक...

शुक्रवार, 4 मई 2012


उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

बहुत तेज़ नहीं आराम आराम से ही  आनंद पूर्वक व्यायाम स्वरूप दौड़ो .कोई ज्यादा नहीं बा -मुश्किल १-३  घंटा सप्ताह भर में .

फायदे :
(१)धीमे धीमे दौड़ने से ऑक्सीजन की खपत बढती है .

(२)इंसुलिन संवेद्यता (Insulin sensitivity )में  इजाफा   होता   है  .

(3)लिपिड  प्रोफाइल  (SERUM CHOLESTEROL, HDL CHOLESTEROL, VLDL  CHOLESTEROL , LDL CHOLESTEROL , LDL /HDL RATIO , TOTAL CHOLESTROL/HDL)में मान्य अर्थों में सुधार आता है .
(४)रक्त चाप कम होता है .

(५)प्लेटलेट का परस्पर झुण्ड बनाना कम होता है .

(६)अश्थी घनत्व (हड्डियों के घनत्व )में सुधार आता है .

(७)दिल अच्छी तरह से अपना काम अन्जान्म देता है .

(८)इम्यून फंक्शन सुधरता है .

(९)Fibrinolytic  activity बढ़ जाती है .

(१०)  मोटापा कम होता है .

(११)Inflammation markers की  संख्या  कम  हो  जाती  है  .

(१२)मनोविज्ञान
 बेहतर हो जाता है .

(१३) उम्र दराज़ होता है जोगर .

योरोपीय हृदय संघ के मुताबिक़ नियमित जोगिंग करने वाले मर्दों की उम्र में औसतन ६.२ और महिलाओं के मामले में ५.६ साल का इजाफा हो जाता है .दौड़ना  भी आनंद के लिए बस एक से लेकर ढाई घंटा पूरा हफ्ता मिलाकर .

कोपेनहेगन हार्ट स्टडी के प्रणेता Peter Schnohr कहतें     हैं नियमित   जोगिंग   उम्र   दराज़  बनाती  है  व्यक्ति  को  ,कम  मेहनत  और  फल  ज्यादा  मिलता  है  .कम खर्च (केलोरी )बाला नशीं  .वाला फलसफा हैं यहाँ .
मोडरेट ब्जोगिंग करने वालों में मृत्यु दर कमतर रहती है बरक्स उनके जो जोगिंग नहीं करते और उनकी तुलना में भी जो जिम में घंटों खपाते हैं .हाड तोड़ कसरत करते रहतें हैं .

जो लोग  मेरी  तरह  हलके  से भी  दौड़  नहीं सकते  उनके लिए भी एक अच्छी खबर डॉ अशोक सेठ लेकर आयें हैं -बकौल आपके तेज़ कदमी करना भी उतना ही मुफीद है सेहत के लिए जितना कि जोगिंग .आप  भारतीय हृदय सोशायती के मुखिया हैं .

डॉ अशोक के शब्दों में सप्ताह में पांच दिन ४० मिनिट का मझौले दर्जे का व्यायाम प्रयाप्त रहता है .इससे  मधुमेह ,मोटापे ,उच्च रक्त चाप की ओर ले जाने वाला जोखिक कम होता है .

इस ४० मिनिट में पांच पांच मिनिट का वार्म अप ओर कूल डाउन समय भी शामिल है .है न वही बात हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा ही चोखा .

सन्दर्भ सामिग्री :-'Jog every morning to add 5 more yrs to life'
 1-3 Hrs Per Week Delivers Optimum Benefits: Study/  TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA  ,MUMBAI ,MAY 4 ,2012 P 11 Column 6,7,८

FIBRINOLYTIC /FIBRINOLYSIS:
      It is the destruction of fibrin and blood clots.

Marker:It is a device or substance used to indicate or mark something .

Inflammation : A Swelling , redness ,heat and pain produced in an area of the body as a reaction to injury or infection .


स्पर्म (शुक्र )को ओवम (अंडाणु ,डिम्ब )से मिलवाने वाली दोस्त है यह जीन

Gene find to boost fertility treatments

vital For Sperm -Egg Binding/THE TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 2,2012,P15

साइंसदानों  ने  एक  ऐसी  दोस्त  जीन  का  पता  लगाया  है  जो  स्पर्म को ओवम (फिमेल एग )से मिलवाएगी .यही वह जीन है जो एक प्रोटीन PDILT तैयार करवाती है .समझा जाता है यह जीवन इकाई परखनली गर्भाधान की कामयाबी की दर एक दम से बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगी .इससे निस्संतान दम्पतियों के जीवन  में आशा की किरण फूट सकती है .. 

अपनी इस अभिनव शोध के तहत Durham University के  साइंसदानों ने पता लगाया है कि जब इस जीवन इकाई को नर चूहों में अभिव्यक्त होने से रोक दिया जाता है ,इसे स्विच ऑफ़ कर दिया जाता है तब इनके  स्पर्म  .के  ओवम से मिलन मनाने के मौके ,निषेचन करवाने की दर गिर के ३% ही रह जाती है जब कि इसे अभिव्यक्ति की पूरी छूट मिलने पर यह दर बढ़के ८०% से भी ज्यादा  हो जाती है .

यह पहला मौक़ा जब इस प्रकार की  किसी जीवन इकाई को गर्भाधान से जोड़    के देखा जा रहा     है .

शोध के अगुवा साइंसदान Adam Benham के  अनुसार  यह  जीवन  इकाई वाया Oviduct शुक्र  को अपने   लक्ष्य डिम्ब  तक ले  जाके  दोनों  का  परस्पर  बंध  बनवाने  में विधाई  भूमिका  निभाती  है .

यही क्रिया तो निषेचन के लिए ज़रूरी होती  है .ये प्रोटीन लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक सोफ्ट वेयर मुहैया करवाती है ,पथ प्रदर्शक बनके आती है शुक्र के लिए .सारथी बन जाती है यह पार्थ का .हालाकि यह रिसर्च अभी अपने आरंभिक चरण में ही है लेकिन उम्मीद का एक नया सवेरा संतान हीन दम्पतियों के लिए इसके आगोश में छिपा दिखाई देता है . 

5 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

(1)

शुभ लक्षण त्रि-लघु समझ, गला जांघ अंगुष्ठ ।

ये छोटे गुणवान के, तन-मन उनके पुष्ट ।

पिला रहे जा'पानी ।

खोवे व्यर्थ जवानी ।

प्राकृतिक संरचना खोती, अति रोग घेरते दुष्ट ।।

(2)

आनंदम आनंदम आनंदम, ढूंढ रहे सब सुख संगम ।

मिथ्या जीत की आदत ऐसी, सहना कठिन होता है गम ।

दारू चरस या ड्रग गांजा ।

चचा भतीजा मामा भांजा ।

मद-मस्ती की हेरोइन माता, हुक्का चिलम बाप का दम ।।

SM ने कहा…

lack of awareness
is also one of the reason for drugs
nice post

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नशे की लत चिंता का विषय है .... अच्छी जानकारी मिली

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

स्थिति बड़ी विकट है ..... ऐसी लत तो जीवन ही ले लेती है .....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कृत्रिमता प्राकृतिकता को कुंद कर देती है।