मंगलवार, 15 मई 2012

शुक्रिया विधान भाई बरुआ

शुक्रिया विधान भाई बरुआ 

आपका साहस देखकर अपनी लैंगिक पहचान के संकट को लेकर जो लोग पशोपेश में अभी तलक परदे के पीछे थे वह अब सामने आरहें हैं .उनकी खामोशी टूटी है .

बकौल मुंबई के गिनती के नामचीन प्लास्टिक सर्जनों में से एक अग्रणी प्लास्टिक शल्यक डॉ अनिल टिब्रेवाला  गत दिनों उनसे     देश के अलग अलग कौनों से Gender Reassignment surgery की बाबत फोन पर पूछा गया है .यह सारी पूछताछ अपनी लैंगिक शख्शियत की पहचान के लिए जूझ रहे लोगों ने खुद आगे बढ़के की है .

हरियाणा की एक युवती ने उनसे इस पर आने वाले कुल खर्च के बाबत पूछा था .मेरे यह बतलाने पर कि मुख्य शल्य क्रिया से पहले होने   वाली सर्जरी मसेक्टोमी (Masectomy )तथा ह्यस्त्रेक्टोमी (Hysterectomy ) यानी  स्तन  और  गार्भाश्य  को  बाहर  निकालने  के  लिए  की  गई  सर्जरी  पर  ही  कुल  खर्च  ढाई  लाख  आयेगा  .मुख्य चिकित्सा इसके बाद ही शुरु की जायेगी .उसने  कहा : मैं  जल्दी  ही  मुंबई  पहुँच  रही  हूँ .

इधर मनो -रोगों के माहिर हरीश शेट्टी कहतें हैं :भविष्य में ऐसी ही सर्जरी चाहने वालों की संख्या बढती ही जायेगी  गत तीन वर्षों में इस बाबत विमर्श के लिए उनके पास पहुँचने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है . 

कोकिला बैन अम्बानी अस्पताल अँधेरी (मिम्बाई ) में फिलवक्त १५ ट्रांस -जेंडर शख्शियतें हैं .इनकी सर्जरी उपचार के विभिन्न चरणों तक पहुँच चुकी है .गत दस महीनों से यह प्रोग्रेम यहाँ ज़ारी है .तथा ऐसा महीनों की मनो -वैज्ञानिक विमर्श तथा इनकी प्रोफाइल  तैयार करने के बाद ही किया गया है .इनकी शख्शियत की पूरी पड़ताल की गई है तभी मुख्य चिकित्सा पूर्व के भी कदम उठाए गएँ हैं उससे पहले नहीं .अहि है कहना है कोकिला बैन अस्पताल के माहिरों का .

यहाँ पहला मामला मेल टू फिमेल सर्जरी(MtF) का हाथ में लिया गया है .फिमेल  टू  मेल  सर्जरी (F t M)  जून  में   शुरू  होगी  .

आलमी स्तर पर पड़ताल करने पर पता चलता है कि इस लैंगिक शख्शियत विकार की चपेट में मैलाओं के बरक्स पुरुष ज्यादा आयें हैं .

इंटर -नेशनल जर्नल आफ युरोलोजी के फरवरी ,२०१२ अंक के अनुसार अलग अलग देशों में इस लैंगिक शख्शियत पहचान विकार Gender Identity Disorder से   ग्रस्त लोगों की संख्या अलग अलग है .

मसलन नीदरलैंड में ११,९०० मर्दों में से एक मर्द तथा प्रत्येक ३०,४०० महिलाओं  के पीछे एक महिला इस विकार से ग्रस्त  हैं .

जर्मनी में १९८१-१९९० की अवधि में MtF तथा FtM ट्रांस- जेंडर     का  अनुपात   क्रमश :१:४२,०० ,तथा १:१०४,००० मिला है .यानी वहां पुरुषों में प्रत्येक ४२,०० के पीछे एक तथा महिलाओं में १०४,००० के पीछे एक ट्रांस -जेंडर  मिला है .

यही वजह है कि सर्जरी के लिए भी आगे आने वालों में मर्द ज्यादा हैं औरतों से .मर्द जो औरत बन्ना चाहतें हैं क्योंकि उनकी वर्तमान पुरुष काया में उनका मनो -भौतिक शरीर महिला का ही है .वह पुरुष होकर भी महिला हैं .

बकौल प्लास्टिक सर्जन अजय हरियानी MtF सर्जरी अपेक्षाकृत सरल होती है .वैजिनो -प्लास्टी यानी योनि -निर्माण की क्रिया शिश्न निर्माण से शल्य की दृष्टि से सरल है . हम पहले बतला चुकें हैं कि पुरुष से महिला की और अंतरण में उच्छेदित शिश्न और अन्डकोशों से ही एक यौन संवेदी योनि गढ़ी जाती है प्लास्टिक सर्जन के सधे हुए हाथों द्वारा .मूत्र नली की लम्बाई को काट छांट  के इसी योनि में समाहित किया जाता है मूत्र नली की ओपनिंग को मूत्र निकासी मार्ग को .यौन संवेदनशीलता बनाए रखी जाती है हर हाल .

8 टिप्‍पणियां:

babanpandey ने कहा…

हमेशा की तरह ... जानकारी से लबालब

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Kya kaha jaye .. Sach ko kahne ka saahas bad raha hai samaajik mein ... Badlav accept Karne lage hain samaaj mein ...
Ram Ram Ji ...

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

कभी पीड़ि‍तों के नज़रि‍ये से सोचता हूं तो दुख होता है

अजय कुमार झा ने कहा…

मौलिक एवं जानकारी से परिपूर्ण पोस्ट

Shanti Garg ने कहा…

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रोचक है सबके जीने का अन्दाज..

SM ने कहा…

yes he opened the gates for others

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

जो पीड़ित हैं उनके लिए शायद कुछ राहत भरी जानकारी साबित हो ...