गुरुवार, 17 मई 2012

कैसे करता है हिफाज़त नवजात की माँ का दूध

कैसे करता है हिफाज़त नवजात की माँ का दूध 

Revealed :How mum's milk protects newborn/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA MUMBAI ,MAY 16,2012 P19

माँ  के  दूध का वह प्रमुख घटक है Oligosaccharides जो शिशुओं की हिफाज़त  करता है . .यह केवल माँ के दूध में ही पाया जाता  है .किसी फार्मूला मिल्क में नहीं .

कैसे करता है यह तत्व शिशु की हिफाज़त ?


यह तत्व ऐसे वसीय अम्ल तैयार करता है जो नवजात की आँतों का पोषण करतें  हैं . .उससे  दोश्त जीवाणु पैदा करवाता है आलिगो -सेक -राइड्स .इसका पूरा नाम है 'Human Milk Oligosaccharides(HMO).इस  प्रकार  फौरी  तौर  पर  यह  नवजात की हिफाज़त नुकसान पहुंचाने वाले जीवाणुओं को नष्ट करके  करवाता है .साथ ही यह नवजात के रोग शरीर प्रति -रोधी -तंत्र को मजबूत करता चलता है .नतीज़न शिशु चिरकालिक फ़ूड एलर्जीज़ (खाद्य )प्रत्यूर्जता ) तथा दमा (Asthama) आदि  से बचा रहता है .

इस अध्ययन को University of Illinois के शोध कर्ताओं ने संपन्न किया है .बकौल इनके एक लिटर ह्यूमेन ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद रहता है ७-१२ ग्रेम तक HMO.हालाकि इन सुगर मोलिक्युल्स (HMO) की सांद्रता स्तन दूध में उच्चतर बनी रहती है प्रोटीनों के बरक्स लेकिन शिशुओं में यह कैसे काम करता है ठीक ठीक इसका प्रकार्य आदिनांक अनुमेय ही बना हुआ था .ठीक से बूझा नहीं जा सका था .

साइंसदानों की रूचि यह जान लेने में थी कि फार्मूला मिल्क पर आश्रित शिशु क्या खोते रहें हैं क्या कुछ नहीं मिल पाता है उन्हें फार्मूला मिल्क से .

दरअसल HMO HUMAN MILK का FIBRE है  . खाद्य रेशा है .क्योंकि माहिरों के अनुसार हमारे पास इन यौगिकों को तोड़ने वाले किण्वक (एंजाइम्स )नहीं है .ये बड़ी आँतों में पहुँच जाते हैं जहां जीवाणु इन्हें पचा जाते हैं .

कौतुक का विषय यह जान लेना था कि नवजात की आँतों का विकास कैसे होता है और इन यौगिकों की इसके विकास में भूमिका क्या रहती है .उन शिशुओं के मामले में जिनका पोषण स्तन पान से ही होता है .ऐसा इसलिए क्योंकि फार्मूला मिल्क पर पलने वाले शिशुओं की आँतों में जुदा किस्म के जीवाणु मिलते हैं .

यही कहना Sharon Donovan  का .आप Nutrition and Health के  प्रोफ़ेसर  हैं  .

अध्ययन Journal of Nutrition में प्रकाशित हुआ है .पता चला है HMO SHORT CHAIN FATTY ACIDS का एक पैट्रन बनाता है जो शिशु की उम्र के बढ़ने के साथ तब्दील हो जाता है .  


(१)गैस से फूले पेट से गैस की निकासी के लिए सौंफ की चाय इस्तेमाल करके देखें .तरीका बड़ा आसान है .सौंफ को बारीक  कूट लें बस इसके ऊपर से उबलता हुआ पानी डालें .सौंफ छलनी में भी ले सकतें हैं ऊपर से उबलता हुआ पानी डालें .हरी सौंफ को कूट कर उबाल भी   सकतें हैं .सौंफ का पूरा ही पादप उपयोगी होता है .इसकी पत्तियाँ और बीज रसोई पकाने में मसाले के तौर पर और बेस से सब्जी भी बनती है . 

(२)पाइन -एपिल में मौजूद रहतें हैं प्रो -बायोटिक्स यानी शरीर के दोश्त जीवाणु जैसे लैक्तो -बेसिलस ,अन्य सूक्ष्म जैविक संगठन (माइक्रो -ओर्गेनिज्म )या सूक्ष्म जीव.  कई खाद्यों में आजकल इन्हें अलग से मिलाया जाता है जैसे दही में अन्य सम्पूरकों में .लेकिन अनानास में ये प्रो -बायोटिक्स कुदरती तौर पर मौजूद रहतें हैं .

हमारे आंत्र क्षेत्र (intestinal bacteria) में मौजूद दोश्त बेक्टीरिया का पुनर -भरण ,आपूरण करता है यह उपयोगी स्वादिष्ट फल .

(३) शरीर में प्रवेश लेने के बाद शहद हाड्रोजन पर -ऑक्साइड निसृत करता है रिलीज़ करता है .अपनी अम्लीयता से संयुक्त होकर यह जीवाणुओं को नष्ट कर देता है .

(४)घर का टूथ पेस्ट :आधा कप बेकिंग सोडा (खाना सोडा )लेकर इसमें बस एक बूँद पेपर मिन्ट(मिन्ट )के सत की डालकर पेस्ट बनालें .बस घर का टूथ पेस्ट तैयार है .

(५)निर्जलीकरण से राहत के लिए :अकसर दस्त लगने पर शरीर में पानी की कमी बेशी हो जाती है .लोगों को मुगालता है दस्त के बाद पानी ही नहीं पीना चाहिए .बेशक पानी में संतरे का जूस मिलाकर पीयें बॉडी एकदम से चार्ज होगी .

(६)आडू विटामिन सी का एक बेहतरीन स्रोत है .यह फल हमारे रोग प्रति -रक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करता है .

(७)फोड़े फुंसी की पकन में राहत के लिए :एक बर्तन में दूध उबालें .अब इस उबलते हुए दूध में कद्दूकस करते हुए प्याज मिलाते जाएँ .इसी मिश्र को एक संक्रमित मवाद पड़े फोड़े पर लगाएं .

एक बात और यकीन करें इसी प्रकार प्याज की खीर तैयार हो जाती है बस इसे थोड़ा सा और देर तक मंदी आंच पर पकातें रहें और धीरे धीरे प्याज कद्दूकस करके मिलाते जाएँ चीनी या गुड मिलाके खाएं .मधुमेह के मरीज़ सुगर फ्री मिलाएं .एक बार आजमायें .

(८)ताज़ी तोड़ा नया दूधिया गोला :कोकोनट ताज़ा ताज़ा लो गले -केमीक इंडेक्स लिए रहता है .यह अग्नाशय के स्ट्रेस को कम करता है और इस प्रकार मधुमेह में लाभ पहुंचाता है .

(९)विटामिन के  -२ पार्किन्संस डिजीज (सिंड्रोम )में राहत पहुंचाता है .इस बीमारी में ठवन  बिगड़ जाता है .पेशिया लोच खोके कठोर हो जातीं हैं चलना फिरना स्थगित हो जाता है एक और लक्षण है त्रेमर्स यानी आंगिक कंप .

(१०)नैनो सिल्वर कपड़ों को निर्गंध बनाए रह सकता है :मौजे ,टी शर्ट्स ,सूती वस्त्रों को जीवाणुओं से दूर रख सकता है नैनो सिल्वर जो फुट ओडर बेद ओडर की वजह बनतें हैं .

अब एक ऐसा नैनो सिल्वर आधारित सूक्ष्म जीव रोधी एंटी -माइक्रो -बियल एजेंट हाज़िर है जो सूती वस्त्रों के रेशों में चला आता है .

बायो -डिफेन्स में भी इसका इस्तेमाल हो सकता मसलन नर्व एजेंटों को उदासीन बनाने में इसे आजमाया जा सकता है .

(११)NEW SMART MATERIAL CAN HEAL YOUR BONES  

        Using a hydrogel with a biomolecule called BMP-2 ,A  protein that makes bones grow ,researchers can now aid in the creation of new bone tissue  in both humans and animals .The treatment may be available within 10 yrs.

एक ऐसा प्रोटीन साइंसदानों के हाथ लगा है BMP-२ जिसे एक जलीय जेल के साथ इस्तेमाल करने से नए अश्थी ऊतक पैदा हो सकतें हैं यह अश्थियों की बढ़वार में मददगार सिद्ध होगा . 



12 टिप्‍पणियां:

Reena Maurya ने कहा…

माओ के लिए उपयोगी जानकारी
रोचक पोस्ट :-)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नवजात बच्चे की सुरक्षा केलिए महत्त्व पूर्ण जानकारी ...
नुस्खे भी बहुत अच्छे दिये हैं ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति की योजना बड़ी व्यापक है..

SM ने कहा…

breast milk is good and necessary for babies.
nice post

Maheshwari kaneri ने कहा…

माताओ के लिएबहुत उपयोगी जानकारी..आभार वीरु जी..

रविकर फैजाबादी ने कहा…

आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

--

शुक्रवारीय चर्चा मंच |

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत उपयोगी प्रस्तुति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया...!
बहुत उपयोगी!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

पूरी पोस्ट ज्ञानवर्धक है...आभार

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

bahut upyogi ....sabke liye...

सदा ने कहा…

ज्ञानवर्धक प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

Sushil ने कहा…

सार्थक !