सोमवार, 14 मई 2012

होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?

होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?कैसे काम करती है और क्या कुछ खतरे भी हो सकतें हैं इसके इस्तेमाल से ?

वैक्सीन या टीके की दवा एक जैविक नुस्खा है एक 'Biological preparation ' है .ख़ास बीमारियों से बचाव के लिए ख़ास टीके तैयार किये जाते हैं . यह व्यक्ति की रोग -प्रतिरोधन क्षमता इम्युनिटी को बढातें हैं .

इनमे मौजूद रहता है एक सक्रिय क्रियाशील अभिकर्मक ,एक एक्टिव एजेंट यह बीमारी पैदा करने वाली सूक्ष्म जैविक आवयविक संगठन  (सूक्ष्म जीव ,रोगकारक ) Microorganism का ही प्रति रूप होता है .अकसर यह रोग पैदा करने वाले माइक्रोब्स के कमज़ोर रूप(weakened form) या मृत रूप(killed form ) से ही तैयार किया जाता है .

जोखिम

कभी कभार ही  ऐसा होता है कि माइक्रोब की यह कम्ज़ोरिकृत(बोदी ) किस्म  virulent  form  यानी        एक दम से खतरनाक किस्म में तबदील हो जाती है .ऐसा टीके के व्यक्ति  के शरीर में पहुँचने के बाद भी हो सकता है पहले भी .

अब यदि माइक्रोब्स सक्रिय हो उठे तो वही रोग व्यक्क्ति को उग्र रूप हो अपनी चपेट में भी ले सकता है .उसी बीमारी के लक्षण व्यक्ति में प्रगट हो सकते हैं जिससे बचाव के लिए दवा का टीका दिया गया है .अकसर ऐसा होने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग ही जाता है .अलावा इसके वैक्सीन एक अनियत्रित प्र्त्युर्जात्मक प्रतिक्रया (uncontrolled chain reaction)भी करवा सकती है .
तीन महीने की मेघा देवकरी की अभी हाल ही मैं मुंबई   में ओरल  पोलियो  वेक्सीन  (poliyo drops )और Hepatitis -B तथा DTP के  टीके     लगने के केवल दस घंटे के बाद ही हो    गई . .

बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है कि   उसकी   मौत  की वजह ये टीके ही बने हों .हो   सकता  है पहले  से  ही कोई  पेचीला  पन  कोई  जटिलता किसी  मेडिकल कंडीशन की चली आ रही  हो  टीके लगने के बाद आये बुखार ने उसे और खराब कर दिया हो .

जांच के लिए टीके के तमाम साम्पिल्स कसौली भेजे गएँ हैं .मेघा के साथ आठ और बच्चों  को यही टीके लगे थे .सभी बाकी बच्चे ठीक ठाक हैं .अलबत्ता उस बैच नंबर के सभी टीके इस्तेमाल से बाहर कर दिए गए हैं .

९५,००० लोगों को DPT वेक्सीन  तथा ओरल पोलियो वेक्सीन की १६९ खुराकें दी गई थीं .कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं है बकौल डॉ  अरुण बामने ,BMC JOINT EXECUTIVE HEALTH OFFICER.

कैसे  काम  करती  हैं  वेक्सीनें ?

टीके शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को उद्दीपन प्रदान कर घुपैठिये रोग कारक को पहचान कर नष्ट कर डालने की कूव्वत  प्रदान करते हैं .ताकत देते हैं .फोरिन बॉडी को शिनाख्त कर मार डालने की .

आइन्दा के लिए याद रखने की भी उसकी भेषभूषा आदि .
बस एक बार टीका लग जाए फिर शरीर प्रोटीन कोट पहचानने लगता है आतताई विषाणु का और बस अपने अश्त्र शश्त्र ,तमाम  किस्म की  मारक कोशाओं के साथ प्रतिरक्षा तंत्र आत् ताई  रोगकारकों पर धावा बोलके उन्हें ठिकाने लगा देता है .और इस प्रकार इन्हें कोशाओं में प्रवेश लेने से रोक देता है .प्रतिरक्षा तंत्र अब  संक्रमित  कोशाओं को  भी  पहचानके   नष्ट  कर  डालता  है .

किन चीज़ों से तैयार किया जाता है टीका क्या क्या घटक हो सकतें हैं वैक्सीन के ?

इनमे शामिल हो सकतें हैं चिकिन एम्ब्रियो ,भेड़ कोशायें ,मंकी ब्लड कल्चर आदि .

Hepatitis -B  वैक्सीन  में ह्यूमेन री -कोम्बिनेंट ड़ी. एन. ए. घटक शामिल रहता है . यही वह अकेला घटक है जिसकी कभी रिएक्शन नहीं होती आजकल ह्यूमेन इंसुलिन री -कोम्बिनेनेट ड़ी एन ए टेक्नोलोजी  से ही तैयार की जाती है .

17 टिप्‍पणियां:

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही अच्छी और विस्तृत जानकारी..
आभार :-)

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वैक्सीन से अक्सर कोई हानि नहीं होती । माइल्ड साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जो नेग्लिजिबल होते हैं । मृत्यु कभी सुना नहीं । पोलिओ वैक्सीन से मृत्यु अक्सर अफवाह होती है ।

आपने अच्छी तरह से वैक्सीन के बारे में बताया है ।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

टीका पर करते सटीक, टीका टिप्पण आप |
लोहा लोहे से कटे, कटे विकट संताप |

कटे विकट संताप, सूक्ष्म विश्लेषण करते |
नकारात्मक पक्ष, सावधानी भी धरते |

टीका पर रख ध्यान, करे ना जीवन फीका |
रविकर करे सचेत, समझ कर लेना टीका ||

SM ने कहा…

विस्तृत जानकारी
useful information

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी!

SHEKHAR GEMINI ने कहा…

" Hepatitis -B वैक्सीन में ह्यूमेन री -कोम्बिनेंट ड़ी. एन. ए. घटक शामिल रहता है . यही वह अकेला घटक है जिसकी कभी रिएक्शन नहीं होती आजकल ह्यूमेन इंसुलिन री -कोम्बिनेनेट ड़ी एन ए टेक्नोलोजी से ही तैयार की जाती है ."

यदि ऐसा है तो फिर कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस क्यूँ डेवलप हो जाती है...?

mahendra verma ने कहा…

वैक्सीन के बारे में अच्छी जानकारी, कुछ तो अन्जानी थीं।

veerubhai ने कहा…

sir ,Inssulin resistance is a cellular level phenomenon that prevents insulin from from exerting its effect on glucose metabolism.

Insulin resistance is diminution in the response of the body's tissues to insulin ,so that higher concentrations of serum insulin are required to maintain normal circulating glucose levels .Eventually the islet cells can no longer produce adequate amounts of insulin for effective glucose lowering ,resulting in hyperglycaemia .Insulin resistance is one of the risk factors for cardiovaiscular disease.n

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत काम की जानकारी रही।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

कुछ लोगों में बोवाइन इंसुलिन के विरुद्ध एंटीबोड़ीज बनने से इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है । साथ ही इंजेक्शन साईट पर इन्फ्लामेशन होने लगता है । लेकिन रिकोम्बिनेंट इंसुलिन का स्ट्रक्चर प्राकृतिक इंसुलिन जैसा होने से ये साइड इफेक्ट्स ख़त्म हो जाते हैं । इसलिए आजकल ह्युमन इंसुलिन का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है । यह बाकि वेक्सिन्स पर भी लागु होता है जैसे रेबीज इमुनोग्लोबुलिन । लेकिन ह्युमन वैक्सीन महँगी होती हैं इसलिए इनका इस्तेमाल सोच समझ कर करना पड़ता है ।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

संग्रहणीय जानकारी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी ...आभार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अच्छी जानकारी इन टेक्नीकल बातों की ... बहुत उपयोगी ...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

त्वरित टिप्पणी से सजा, मित्रों चर्चा-मंच |
छल-छंदी रविकर करे, फिर से नया प्रपंच ||

बुधवारीय चर्चा-मंच
charchamanch.blogspot.in

veerubhai ने कहा…

शुक्रिया नवीन भाई .मुबारक परिवार दिवस .ग़ज़ल कार से मिलवाने के लिए आपका दोनों का आभार .

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत ही काम की जानकारी देता आलेख...
सादर आभार सर.

Sushil ने कहा…

सार्थक !