सोमवार, 6 जून 2011

लघु कथा :कुत्ता और राजनीति .(गुरुशिष्य संवाद ).

लघु कथा :कुत्ता और राजनीति (शिष्य गुरु संवाद )
लेखक :डॉ .नन्द लाल मेहता "वागीश "डी .लिट ।
शब्दालोक ,१२१८ ,सेकटर -४ ,अर्बन एस्टेट ,
गुडगाँव -१२२-००१ ,०१२४-४०-७७-२१८ ।
शिष्य :गुरूजी !कुत्तों के बारे में कुछ ज्ञान दीजिये .ये कुत्ते कितने प्रकार के होतें हैं ?
गुरूजी :शाश्त्र में कहा गया है कि रंग रूप आकार प्रकार और चेष्टा प्रहार की दृष्टि से कुत्तों की अनेक कोटियाँ हैं ।
शिष्य :गुरूजी !साधारण भाषा में समझाइये ।
गुरूजी :सामान्य रूप से कुत्ते तीन प्रकार के हैं :-पालतू कुत्ते ,गली के कुत्ते और जंगली कुत्ते .ये पशु कुत्ते कहे गएँ हैं .पर इधर कुत्तों का एक और प्रकार भी जुड़ गया है ,शाश्त्र में इसकी कोई चर्चा नहीं है ।
शिष्य (आश्चर्य !):वह कौन सा गुरूजी ?
गुरूजी :ये "आदमी -कुत्ता" है .राजनीति की देन है .इसलिए इसे राजनीतिक कुत्ता कहतें हैं ।
शिष्य :गुरूजी पशु कुत्ते और राजनीतिक कुत्ते में क्या फर्क है ?
गुरूजी :पशु कुत्ता एक वक्त में एक काम करता है .वह या तो भौंकता है या फिर पूंछ हिलाता है .दोनों काम एक साथ नहीं कर सकता ।
शिष्य :पर मेरी रूचि तो राजनीतिक कुत्ते के बारे में जानने की है ।
गुरूजी :प्रिय शिष्य ,पशु कुत्ते की अपेक्षा राजनीतिक कुत्ते में कौशल अधिक होता है .वह भौंकने और पूंछ हिलाने का दुष्कर काम एक साथ कर सकता है ।
शिष्य :सो कैसे ,गुरूजी (आश्चर्य से )?
गुरूजी :वो ऐसे कि उसकी पूंछ मालिक की ओर रहती है और मुंह विरोधी की ओर .विरोधी पर भौंकने के साथ -साथ वह मालिक के लिए पूंछ भी हिलाता रहता है ।
शिष्य :मैं धन्य हुआ गुरूजी !इतना कहकर शिष्य ने मौन धारण कर लिया ।
प्रस्तुति एवं सहभावी :वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई ).

1 टिप्पणी:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

नमस्कार जी
राजनीतिक कुत्ता तो बडा चालू है,


एक छोटा का अनुरोध है कि एक दिन में एक ही पोस्ट/लेख आने दो? कई-कई पोस्ट आने से दर्शक सभी नहीं पढते है, सबसे पहले वाली पोस्ट का महत्व ज्यादा रहता है"