सोमवार, 27 जून 2011

संबंधों के रंग .

जंगल जानवर और आदमी एक उत्तरोत्तर विकास यात्रा है .आपके आसपास भी कुछ लोग ऐसे होंगें आदमी की शक्ल में जिनके पास अस्तित्व कोष तो है ,लेकिन अभी आदमियत का समंध कोष नहीं है .उनके लिए सम्बन्ध बस एक सूचना है जैसे कोई बतलाये यह आपका भाई है लेकिन सम्बन्ध का भावन नहीं है उनके पास सम्बन्ध एक सूचना मात्र है ।
दरअसल सम्ब्नब्ध कोष न होने से सम्बन्ध की अभी इन्हें पहचान ही नहीं है ।
पशुओं में गाय भावना प्रधान है .सम्बन्ध का भावन है उसके पास .गाय रंभाती है और अपने बच्चे के लिए दूध स्रावित करने लगती है .हाथी भी सम्बन्ध कोष को समझतें हैं .मनुष्य की धीर -गंभीर प्रवृत्ति का प्रतीक हैं ।
बन्दर मनुष्य के विनोदी और चंचल स्वभाव का प्रतीक है ।
लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो इन ज्ञात पशु रूपों से मनुष्य रूप में नहीं आये हैं .पशुओं के इससे निचले रूप से सम्बद्ध रहें हैं पूर्व जन्म में .पशु के भी वह निम्नतम कोष या कोटि में रहें हैं कहीं ।
इन्हें संबंधों के रंग नहीं पता ।
तिस पर तुर्रा यह कि इनमें से कुछ खुद को कलाकार भी मानने समझने लगें हैं .नृत्यु भी अच्छा ही कर लेतें हैं .लेकिन यह नृत्य उनके अभ्यास का शिखर ज़रूर है ,भाव का नहीं .निर्भाव हैं ये लोग .जबकि भारत में कलाकार बनने से पहले आदमी बनना भी ज़रूरी है .आदमी का आदमी होना पहली पात्रता है कलाकार बनने की .जिसके पास आदमियत नहीं है वह कलाकार कैसे हो सकता है ?
आइये भूमिका से बाहर निकल आपको ऐसे ही एक निर-भाव कलाकार से मिलवातें हैं .इनकी डेब्यू -टांट (प्रथम प्रस्तुती भरतनाट्यम अन्गेत्रम की देखने हम यहाँ ,केंटन (मिशगन ) से चलकर पेंसिलवानिया के नगर फाउन्टेन -विल पहंचे .दस घंटे के लम्बे सफर के बाद ।
बतलादें आपको ये कलाकार लड़की रिश्ते में हमारे दामाद साहब की कजिन लगती है .उस नाते इनके पिता -श्री हमारे समधी हुए ।
समधी -सम -धन प्रेम भाव से मिले .मिलकर आनंद आया .पता चला समधी साहब उस दौर के एम् टेक हैं आई आई टी दिल्ली से जब यहाँ तक पहुँच के इतने ताम झाम लोगों के पास नहीं थे .न प्रशिक्षण उतना न सुविधाएं .यहाँ आकर एम् एस (मास्टर ऑफ़ साइंस )और फिर पीएच.डी और अब एक दवा निगम के डायरेक्टर हैं .समधन होम मेकर हैं ,हाउस वाइफ हैं .पुरानी फिल्मों की हीरोइन सी आकर्षक व्यक्तित्व की मालिक ।
उनके एक दोस्त भी यहाँ पधारे थे इस प्रस्तुति के लिए फिलाडेल्फिया से .एक रासायनिक निगम के निदेशक हैं .आप भी पीएच.डी हैं ।
पता चला सबसे सदा प्रेम भाव बनाए रखना आपके स्वभाव का अंग है .सहकर्मियों में से सबको नमस्ते कहना शुरू से इनकी आदत में शुमार रहा आया है .आज भी वही क्रम है ।
समधी साहब ने उस कलाकार से (अपनी बिटिया )को बतलाया हमारी बेटी और दामाद को इंगित करके ये तुम्हारे भैया -भाभी हैं .केंटन में रहतें हैं .और ये हमारे समधी हैं हमारी और मुखातिब होकर बतलाया ।
लड़की निर -भाव खड़ी रही .सूचना कोष में इस सम्बन्ध सूचना को डाला और अपने कमरे में ऊपर चली गई ।
हम नीचे बैठे तनिक देर तक सोचते रहे -संगीत तो अदब सिखाता है .हमने अमज़द अली कहाँ साहब को कई मर्तबा देखा है .एक मर्तबा रोहतक यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग की और से निमंत्रित थे .आकाशवाणी रोहतक से सेवा -निवृत्त एक बुजुर्ग गायक शाश्त्रीय संगीत के वाहन मौजूद थे ।
खान साहब ने बा -कायदा मंच पर चढ़ने से पूर्व भूत साहब की चरण वंदना की .फिर अपनी प्रस्तुति दी सरोद पर .तो यह ज़ज्बा पैदा करता है संगीत ।
हम कल का इंतज़ार करते रहे .कल प्रस्तुति थी इस सु-कन्या की .ईमानदारी से प्रस्तुति प्रथम प्रस्तुति के हिसाब से बहुत अच्छी थी लेकिन अगर भाव भी मुद्राओं और अभिनय के साथ होते ,सोने पे सुहागा होता ।
हमने देखा लड़की गुरु के अभिवादन में झुकी ज़रूर लेकिन हाथ पाँव तक न पहुंचे .

7 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

सब समय का फेर है।
अच्छी प्रस्तुति।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

.ईमानदारी से प्रस्तुति प्रथम प्रस्तुति के हिसाब से बहुत अच्छी थी लेकिन अगर भाव भी मुद्राओं और अभिनय के साथ होते ,सोने पे सुहागा होता ।

आचरण के भाव चेहरे पर भी आजाते हैं ... संबंधों पर विचारणीय लेख ..

Arvind Mishra ने कहा…

लड़की निर -भाव कड़ी रही .सूचना कोष में इस सम्बन्ध सूचना को डाला और अपने कमरे में ऊपर चली गई ।
aaj kal to robot yug hai ..aap se ek gujaarish hai tanik post likhne ke baad vartnee ko phir se jaanch kar liya karen naheen to saara maja kirkiraa ho jata hai ...
sorry transliteration is defunct!

यादें ने कहा…

वीरुभाई ,राम-राम !
आप भी कमाल हो! नए युग में पुरानी खोज...

रेखा ने कहा…

आज कल की पीढियां बहुत ज्यादा झुकना नहीं चाहती है, और यही ढंग उन्होंने बना भी लिया है.

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

ये भूत साहब कौन है जी

veerubhai ने कहा…

संदीप भाई भूत साहब आकाशवाणी रोहतक में स्टाफ आर्टिस्ट थे .चंद रागों की विशेष प्रस्तुति के लिए इन्हें जाना जाता रहा है .उस वक्त ये साठ के पार थे सेवा निवृत्त थे .शाल और अंग वस्त्र अमज़द अली खान साहब ने इनके चरण स्पर्श करने के बाद इन्हें पहराया था .इस मौके पर भूत साहब को सम्मानित किया गया था आकाशवाणी में लम्बी सेवा अवधि के बाद .खान साहब के दोनों पुत्र यान और अमां ने ही अपनी प्रस्तुतियां दी थीं.स्थान था यूनिवर्सिटी कोलिज रोहतक ऑडिटोरियम .