रविवार, 29 अप्रैल 2012

परीक्षा से पहले तमाम रात जागकर पढने का मतलब

एक बार और सारे पाठ्यक्रम को परीक्षा से पहले दोहराने के लिए अक्सर छात्र रात रात भर जागतें हैं .लेकिन क्या इसका फायदा भी है 
?कहीं ऐसा तो नहीं की अगली सुबह सब कुछ गुड गोबर हो जाए एक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाए और याद किया याद ही न आये एन वक्त पर परीक्षा की घडी में ?


स्कूल  आफ लाइफ साइंसिज़ जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने अपने एक अध्ययन में यह खुलासा किया है कि दिन भर में पढ़ी याद की गई सूचना को इस तरह रूपांतरित करने में कि वह मौके पर दिमाग को याद आ सके संगठित   करके  रखने  में नींद एक विधाई   भूमिका   निभाती   है .

लेकिन रात भर नींद से  महरूम   रहने   पर ऐसा हो ही यह कतई  ज़रूरी  नहीं है .हो सकता  है आप  पढ़ी याद की गई सामिग्री  का  बहुत  कम  अंश  ही याद रख  पायें  .

अपने प्रयोगों में डॉ .सुशील झा ने पाया कि जो चूहे एक काम को सीखने के फ़ौरन बाद छ :घंटा नींद से महरूम रखे गए वे अगले दिन उसी काम को दोहरा नहीं सके .

जबकी चूहों  के जिस समूह ने नींद भर सोया था ,पर्याप्त नींद ले ली थी  उन्हें वह काम याद रहा .

लेब अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या पाठ सीखने की क्रिया ,लर्निंग सोने के अंदाज़ ,स्लीप पैट्रन को भी तबदील करती है ? 

बिला शक यदि  आपने किसी तरह का प्रशिक्षण लिया है ,आपने कोई लर्निंग का ढंग सीखा है तब आप अधिक सोयेंगे .

ज़ाहिर है आप थकके नहीं सोयें हैं ,याददाश्त को पुख्ता, पक्का करने के लिए  ,प्राप्त प्रशिक्षण के तहत सोयें हैं .


अलावा  इसके नींद हमारे दिमाग की प्रोटीन  संश्लेषण करने वाली  मशीनरी  ,प्राविधि  को सक्रीय कर देती है .इसका फायदा याददाश्त को पक्का करने में मिलता है .

अलावा  इसके नींद दिमागी विकास में सहायक सिद्ध होती है .यही वजह है कि शिशु ज्यादा सोतें हैं क्योंकि इस दरमियान दिमागी विकास की रफ़्तार सर्वाधिक होती है .डॉ झा अशोशियेट प्रोफ़ेसर हैं न्यूरो -साइंसिज़  विभाग में .आप स्कूल को लाइफ साइंसिज़ से जुड़ें हैं . 


परीक्षा से पहले तमाम रात जागकर पढने का मतलब सहायक ही हो यह ज़रूरी नहीं है .


9 टिप्‍पणियां:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बढ़िया पोस्ट। सही है यह आकलन। नींद जरूरी है। अब सो जाता हूँ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

परीक्षा के पहले सदा है आश्वस्त होकर सोता रहा हूँ..

Shah Nawaz ने कहा…

बिलकुल सही कहा आपने...

वैसे हम तो कभी भी एक दिन पहले देर रात तक नहीं पढ़े..... वैसे भी जो पूरे साल ना पढ़ पाया हो वोह एक रात में क्या और कितना पढ़ लेगा.... और जिसने पूरे साल मेहनत की है उसे इस तरह आखिरी रात में इतनी ज्यादा मेहनत करने की ज़रूरत पढेगी भी नहीं....

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वीरुभाई जी , हमने भी रात १२ बजे के बाद अक्सर कभी पढाई नहीं की .
परीक्षा से पहले दिन शाम को ही किताब बंद कर देते थे .

नींद का पूरा होना अत्यंत आवश्यक है .

कुमार राधारमण ने कहा…

वास्तु कहता है कि रात में सिर्फ उल्लू जगते हैं!

Sunitamohan ने कहा…

bahut umda aalekh.........magar exam se pahle der raat tak padhe bina raha nahi jata,,,bhale hi sath-sath ye bhi lagta rahta hai ki sab bhoola sa jaa raha hai.....!

Anita ने कहा…

सार्थक पोस्ट !

रविकर फैजाबादी ने कहा…

शोभा चर्चा-मंच की, बढ़ा रहे हैं आप |
प्रस्तुति अपनी देखिये, करे संग आलाप ||
मंगलवारीय चर्चामंच ||

charchamanch.blogspot.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी जानकारी .... हमारा वक़्त तो निकल गया ...