मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

याद रखना चाहतें हैं देखे गए सपने को ?

राम राम भाई !याद  रखना चाहतें हैं देखे गए सपने को ?
अक्सर एक रात में आदमी ४-६ खाब देखता है .फिर भी आपने  ऐसे  कई  लोग   देखे  होंगे  जो   कहतें हैं : हमें खाब (ख़्वाब )आते ही नहीं .एक बात आपने और देखी   होगी जब आपका ब्लेडर (मूत्राशय )भर जाता है तब  सोते सोते आपकी आपसे आप आँख खुल जाती है ,उस समय आप अक्सर खाब ही देख रहे होतें हैं बेशक .टॉयलेट जाके आप दोबारा सो भी जाते हैं .खाब भी फिर चालु हो सकता है .इसकी जगह नया खाब भी ले सकता है .
दरअसल खाब दो किस्म  के होते हैं .
कामयाब खाब  ( सक्सेसफुल ड्रीम्स ).;कामयाब खाब सोकर उठने पर या आँख खुलने पर याद नहीं रहते .
असफल या ना -कामयाब ख़्वाब .:ना -कामयाब खाब याद रह जाते हैं .जब नींद में खलल पड़ जाती है . खाब टूट जाता है .आप कह उठते हैं सत्या नाश -इत्ता बढ़िया खाब देख रहा था ,जगा दिया आपने .
जो हो लोग देखे गए खाबों को याद करने की जी तोड़ कोशिश करतें हैं .खाब हैं की स्मृति  में लौटके आते ही नहीं हैं .
साइंसदान कहते आयें हैं :विटामिन     बी     ६ जो आम तौर पर मांस ,मोटे अनाजों ,मेवों ,केला और तरकारियों में पाया जाता है देखे गए ख़्वाबों को स्मृति में लाने में मददगार सिद्ध होता है .लेकिन इसके साक्ष्य अब  हाथ आयें हैं .पहली मर्तबा .
हाल ही में २००२ में सम्पान एक अध्ययन सुर्ख़ियों में आया है इसके अनुसार इस बात के साक्ष्य सामने आयें हैं जो उक्त धारणा को पुनर्बलित करतें हैं की विटामिन बी ६ का नियमित सेवन देखे गए ख़्वाबों  को याद करने में मददगार साबित होता है .
सन्दर्भ -सामिग्री :Vitamin B 6 helps recall dreams/THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE ,APRIL 10 ,2012 P13. !
राम राम भाई !   राम राम भाई !   राम राम भाई !
 ज्यादा जोखिम  रहता है मोटो के लिए एक्स रेज़ का .
'Obese people are more prone to X -ray hazards'/THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE ,APRIL 9,2012/P11.
सी  टी स्केनों  में प्रयुक्त एक्स रे के खतरे ओबीस (मोटे ताज़े ,हट्टे कटते )लोगों के लिए ज्यादा रहतें हैं .वह ज्यादा असर ग्रस्त होतें हैं एक्स रेज़ से .क्योंकि इनके मामले में रोग निदान के लिए विकिरण विज्ञान के माहिर रेडियो -लोजिस्ट को विकिरण की बड़ी डोज़ देने पड़ती है .तब कहीं जाके प्राप्त होता है वांछित पूरा ब्योरा बनिस्पत साधारण कद भार  वाले लोगों के .
अब क्योंकि सी .टी . स्केन सीधे सीधे शरीर के अंदरूनी अंगों पर विकिरण की ज्यादा बौछार बौछार करता है इसलिए मोटे लोगों को नुकसानी का ख़तरा  भी ज्यादा रहता है .
ओबीस लोगों के मामले ६२ %ज्यादा   डोज़ डालनी पड़ती है एक्स रेज़ की शरीर -अंगों पर बरक्स तंदरुस्त लोगों के .
न्युयोर्क     के  Rensselaer Polytechnic Institute के रिसर्चरों ने यह अध्ययन संपन्न किया है .
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !
नुश्खे सेहत के :
आंवला क्रोमियम से भरपूर है .इसका सेवन उन कोशिकाओं को उत्तेजन प्रदान करता है जो इंसुलिन स्राव करतीं हैं .
Indian gooseberry (Amla) is rich in chromium .It stimulates the cells that secrete insulin.
राजमा का सेवन ज़रूरी अमीनों अम्ल मुहैया करवा देता है .इन आवशयक अमीनों अम्लों से हमारे रोग प्रति -रक्षा तंत्र को दुरुस्त रखने में बड़ी मदद मिलती है .
Kidney beans  provide essential amino acids that help maintain a healthy immune system.




12 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

काश की ऐसा हो --हम कोई ख्वाब देखें , सुबह उठें --एक गोली खाएं और सब याद आ जाये :)
दिलचस्प जानकारी .

यादें....ashok saluja . ने कहा…

खुली आँखों से सपने देखने पर ...
दिमाग उनको पूरी करने में मदद करता है ...?
वीरू भाई जी राम-राम !

मनोज कुमार ने कहा…

हम तो बहुत खाब देखते हैं। और सोते हुए में बोलते भी हैं। पर कुछ याद नहीं रहता। इसकी कोई व्याख्या मिले तो बताइएगा।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट कृति |
बुधवारीय चर्चा-
मस्त प्रस्तुति ||

charchamanch.blogspot.com

babanpandey ने कहा…

मुझे कई बार रातों में कविता के भाव सपनों में आते है .. मैं write them as soon as leaving my bed...//

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पता नहीं क्यों पर रात के ख्वाबों ने नाता तोड़ रखा है।

veerubhai ने कहा…

मनोज जी ,प्रवीण जी ,आप लोग सपने देखतें हैं .यकीन मानिए रोज़ देखतें हैं लेकिन वे कामयाब खाब हैं .जो सपने याद रह जातें हैं वे अबोर्ट हो जातें हैं असफल खाब होतें हैं .खाब बहरूपिया बनके आतें हैं हमारी नींद की हिफाज़त करतें हैं .खाब टूटना नींद में खलल है और याद न रहना चैन की बंशी .बजाना है .

सतीश सक्सेना ने कहा…

आप भी आ गए सपनों को लेकर ...
बढ़िया जानकारी जो हमें याद रहेगी !
राम राम वीरू भाई

रचना दीक्षित ने कहा…

सपनों की दुनिया की जानकारी बहुत दिलचस्प रही.

smt. Ajit Gupta ने कहा…

ख्‍वाबों के बारे में अच्‍छी जानकारी दी है आपने।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

टपने की कोशिश कई, सपने में बेकार |
बाधित करती रास्ता, हुई हार पर हार |

हुई हार पर हार, राह में कांटे ठोकर |
टूट हार का सूत्र, बोलती सजनी जोकर |

छट-पट करती देह, भीग सपने में अपने |
फोड़ी मटकी लात, मिला तब भी ना टपने ||

रविकर फैजाबादी ने कहा…

आज शुक्रवार
चर्चा मंच पर
आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति ||

charchamanch.blogspot.com