रविवार, 1 अप्रैल 2012

नुश्खे सेहत के :

नुश्खे सेहत के :
रंग बिरंगे अनेकरूपा नारी से कुमुदनी के फूल न सिर्फ मन को ही मोहते हैं हमारे नर्वस सिस्टम (स्नायुविक तन्त्र ) को भी शांत करते हैं .यह जादू है इनकी सुवास  का सौरभ का खुशबू का जो दिल की धडकनों की खोई हुई लय-  ताल का विनियमन करती है .रेग्युलेट करती है हार्ट बीट को कुमुदनी के फूलों की मनभावन सुगंध .
The scent of lilies calms the nervous system and regulates heart beat .
गुलाब  के बीज विटामिन ए,बी ३,सी ,डी,तथा ई का बेहतरीन स्रोत हैं .इनसे तैयार चाय मूत्राशय के संक्रमण के अलावा अतिसार से भी बचाव करती है .
Rose hips (fruit of a rose plant )are an excellent source of vitamins A,B3,C,D and  E. Brewed to form tea ,they are good for bladder infections and diarrhoea.
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !
नुश्खे सेहत के :सनस्ट्रोक से राहत के लिए दो से तीन ग्लास छाछ (शीत ,मठ्ठा या बटर मिल्क )नित्य पियें .
गंभीर सनस्ट्रोक के मामले में प्याज का अर्क हलके हलके मरीज़ के   हाथ की हथेलियों और पैर के तलुवे पर मलें .
HEALTH TIPS:
  To cure sunstroke ,drink two to three glasses of buttermilk a day .
For severe sunstroke ,rub onion juice  on the palms and soles of the patient.

मूर्ख दिवस ,२०१२.


तैयारी पूरी है एक अल्ज़ाइमर्स टीके की .

तैयारी पूरी है एक अल्ज़ाइमर्स टीके की .
Vaccine against Alzheimer's on the anvil?/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,BANGALORE P23.,MARCH 31,2012.
विज्ञानियों को इस बात का इल्म हुआ है ,कौन सी प्रोटीन उत्परिवर्तित होकर अल्जाइ -मर्स   रोग की नींव रखती है याददाश्त क्षय की वजह बनती है और इसी के साथ इसके खिलाफ एक असरकारी टीका बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है .साइंसदानों के मुताबिक़ यह टीका न सिर्फ अल्जाइमर्स का इलाज़ बन सकता इस आमफ़हम डिमेंशिया का बचावी टीका भी साबित हो सकता है रोग के शुरूआती चरण में यह इसके बढ़ने को एक दम से रोक भी सकता है .
अल्जाइमर्स के लिए कुसूरवार एक ताऊ प्रोटीन को लक्षित करके काम किया जा रहा है इस  टीके पर .
क्यों और कब यह मित्र प्रोटीन खराब प्रोटीन में तब्दील हो याददाश्त क्षय की वजह बन जाती है .जहां याददाश्त निर्माण में यह प्रतिभागी की भूमिका में मेहनत करती आई है दिमाग के प्रकार्य में इसका साझा रहता है ,वहीँ उत्परिवर्तित अवस्था में यह दुश्मन की भूमिका में आ जाती है .यह खराब प्रोटीन का रूप धरके दिमागी कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है .इसीलिए तो अल्जाइमर्स को एक न्यूरो -डि-जेन -रेटिव डिजीज अप -विकासी रोग कहा जाता है .जिसमे दिमाग का साइज़ ही सिकुड़ जाता है .
गौर तलब है इस रोग को पनपने में कोई दस साल लगजातें हैं यही वह विंडो पीरियड है जब यह मित्रवत ताऊ प्रोटीन शत्रुता पूर्ण रुख ले लेती है . जल्दी शिनाख्त का मतलब है इसके बढ़ने पर लगाम और इसका पुख्ता इलाज़ .करेगा यह टीका .

मूर्ख दिवस ,२०१२.


.कैंसर एन -साइकलो -पीडिया रखेगा नै दवाओं की नींव .

कैंसर एन -साइकलो -पीडिया रखेगा नै दवाओं की नींव .
ज़रा सोचिये कैंसर रोग समूह पर  अद्यतन हुए काम की जानकारी माहिरों और आम जन के लिए समान रूप से कितनी कारगर हो सकती है .
कितना रोचक हो सकता है यह जानना ,सैंकड़ों कैंसर कोशायें कैसे अनुक्रिया करतीं हैं कैसा और कैसे रेस्पोंड  करती है कैंसर एजेंट्स के प्रति .और वह भी सब एक महाग्रंथ की मार्फ़त . 
अब एक मरीज़ के जीनोम के अनुरूप पूरे उसके जीन रचाव ,जीवन इकाइयों के नैन -नक्श के अनुरूप व्यक्ति विशेष के अनुरूप ख़ास कैंसर रोधी दवाएं निकट भविष्य में बनाई जा सकेंगी .,ऐसी उम्मीद बंध चली है इस एक सन्दर्भ ग्रन्थ के सहज सुलभ हो जाने से .
अब कैंसर के इलाज़ के लिए एक से एक नै दवाओं के निर्माण का रास्ता खुल गया है .टेलर मेड दवाएं सिर्फ आपके लिए तैयार की जा सकेगी आपकी जीन -कद -काठी के अनुरूप .आपकी शख्शियत के अनुरूप .
कैंसर अन्वेषण की दिशा में इतना भर हुआ है अब तक ,प्रयोगशाला में कुछेक कैंसर कोशायें तैयार कर ली गईं हैं .इसका फायदा यह हुआ है कुछ नै ईजाद की गई दवाओं के असर की कैंसर मरीजों पर असर की पड़ताल की जा सकी है .अब एक साथ दुनिया भर  में फैले कैंसर संस्थानों के माहिरों और रिसर्चरों ने एक साथ दो पर्चे विज्ञापित किये हैं इनमें सैंकड़ों कैंसर सेल लाइंस की इत्तला दी गई है .
इस काम में कैम्ब्रिज के नजदीक स्थित 'wellcome Trust Sanger Institute 'की  एक टीम के अलावा अन्यान्य संस्थानों के माहिरों का योगदान रहा है .
टीम ने ६०० से ज्यादा सेल लाइंस की स्क्रीनिंग की है .इन पर तकरीबन १३० अलग अलग किस्म की दवाओं के पड़ने वाले असर की पड़ताल की है . इस प्रकार ड्रग सेंसिटिविटी से सम्बद्ध जेनेटिक सिग्नेचर्स की शिनाख्त भी कर ली गई है .अभी मिलने वाले संकेतों से मरीजों का बहुत भला हो सकता है .इसी के साथ साथ बच्चों में होने वाले एक विरल अश्थी कैंसर की जानकारी भी मिली है .उस पर पड़ने वाले दवाओं के असर की भी .
एक ही जगह पर व्यापक आकड़ों का नेट वर्क पहली दफा उपलब्ध हुआ है माहिरों  को .कौन सी सेल लाइन बेहद सेंसिटिव है और इस सेंसिटिविटी की आखिर वजह क्या है यह भी इल्म हुआ है .
राम राम भाई !   राम राम भाई !   राम राम भाई !
नुश्खे सेहत के :
ओरेंज बेल पेपर (नारंगी रंग की शिमला मिर्च जिसे अमरीका में बेल पेपर कहा जाता है ):
'zeaxanthin' का सर्वोत्तम स्रोत है बेल पेपर .यही वह तत्व है जो सफ़ेद मोतिया बिन्द (केटेरेक्ट)और उम्र दराज़ लोगों के रोग, मेक्युलर दिजेंरेशन से बचाए रह सकता है .
पीली और लाल रंग की बेल पेपर :विटामिन -सी ,Capsaicin तथा फ़्लेवोनोइद्स का भण्डार लिए हुए हैं .एक तरफ यह तत्व खून का थक्का बनना  मुल्तवी रखतें हैं दूसरी तरफ हृदय एवं दिमागी  दौरों (ब्रेन अटैक )से बचाव करतें हैं . राम राम भाई !
डिप्रेशन का समाधान 'इलेक्ट्रो -एक्यु -पंक्चर '?
अवसाद के समाधान के लिए इनदिनों एक्यु -पंक्चर में प्रयुक्त सुइयों को आवेशित कर स्तेमाल किया जा रहा है .समझा जाता है इससे इस परम्परा गत प्राविधि की प्रभाव -शीलता ,प्रभ -विष्णुता असर -कारिता बढ़ जाती है .होन्ग कोंग में संपन्न एक अध्ययन से यही संकेत मिलें हैं .स्कूल ऑफ़ चाइनीज़ मेडिसन ,होन्ग कोंग विश्व -विद्यालय के रिसर्चरों ने इस संशोधित प्राविधि 'इलेक्ट्रो -एक्यु -पंक्चर 'की आजमाइशें  की हैं .
कुल ७३ प्रतिभागियों के सर के सात अलग अलग एक्यु -प्रेशर पॉइंट्स को इस प्राविधि से उत्तेजन प्रदान किया गया था .गत सात सालों में यह अनेक बार अवसाद की चपेट में चले आये थे .
सन्दर्भ -सामिग्री :New way to treat depression /TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,BANGALORE ,P15,MAR30,2012..
राम राम भाई ! राम राम भाई !  राम राम भाई !

रविवार, 1 अप्रैल 2012


ये कथन की भंगिमा नहीं आपराधिक मामला है .

ये कथन की भंगिमा नहीं आपराधिक मामला है .
फेस बुक पर इन दिनों तकनीक के कुछ निकृष्ठ तम नमूने देखने में आरहें हैं .मोर्फ्स (मोर्फिंग )फटोशॉप आदि का स्तेमाल करके एक तरफ मनमोहन -सोनिया को अशोभन दैहिक मुद्रा (मैथुनी )में तो ठीक उनके सामने लालू -मायावती को इसी दैहिक भंगिमा में दिखलाया गया है .
बेशक सोनिया  गाँधी लोगों की पहली पसंद नहीं है और न ही मनमोहन सिंह जी जिन्हें लोग हिकारत की नजर से रीढ़ विहीन रोबोट मानने लगें हैं .
लेकिन राजनितिक गिरावट और नापसंदगी का न तो यह स्वीकृत तरीका  है और न ही इसे कथन की भंगिमा या कोई प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति कहा जा सकता है .
इस आदमी की जिसने यह आकृतियाँ परोसीं हैंआकृति विज्ञान गढ़ा है डॉक्टर किया है  खुद की मैथुनी क्षमताओं की जांच होनी चाहिए .
यह सब इस और इस प्रजाति के कई और होमियो -सेपियंस की रुग्णमानसिकता का प्रक्षेपण है .अधुनातन प्रोद्योगिकी का एब्यूज तो है ही .ऐसे तमाम व्यक्तियों (शातिरों )का इलाज़ होना चाहिए .
यह (इस तरह का प्रदर्शन नाम चीन लोगों का भले वह शुभंकर न हों )सीधे -सीधे आपराधिक मामला बनता है .साइबर क्राइम के दायरे में आता है .इसकी जांच होनी चाहिए .इस दिग -दर्शन में न तो कोई कथ्य है न कथन की मुद्रा है .विकृत मनो -विज्ञान है .हम एक चिठ्ठाकार के नाते ऐसे गोबर गणेशों का सरयू तट पर तर्पण करतें हैं .लेकिन इसकी और ऐसे और मामलों की आड़ में फेस बुक जैसे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की मांग और उसका समर्थन नहीं कर सकते .फेस बुक का अपना लोक तंत्र है .उकील साहब जो अलापें सो अलापें .
गौर तलब है 'नारी 'ब्लॉग पर भी आज यह मामला उठाया गया है .

21 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गुलाब गुणकारी और गुणाकारी, दोनों ही है।

Reena Maurya ने कहा…

bahut hi acchi jankari..
badhiya post hai...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 2-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वैसे उम्र के एक दौर में कुछ कुछ भूल जाना अच्छा नहीं होता क्या ...
वैसे ही पूछ रहा हूँ .. मूर्ख दिवस है न इसलिए ...
राम राम भाई ...

रविकर ने कहा…

आभार वीरू भाई |
गर्मी बढ़ी है |
प्रयाप्त पानी पीने के बाद भी
पेशाब की मात्रi कम होती जा रही है |

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत उपयोगी और रोचक जानकारी...आभार

veerubhai ने कहा…

दिगंबर नासवा साहब कुछ कुछ तो कभी कभार भूलना कोई बात नहीं लेकिन हालिया बातों का एक दम से भूल जाना ,ब्रेक फास कर लिया और आप पूछ रहें हैं ब्रेकफास में आज क्या मिलेगा .बाहर निकलकर आप घर का रास्ता ही भूल रहें हैं यह लक्षण है रोग का .प्रेसिडेंट रीगन के सिरहाने रोग की अंतिम प्रावस्था में नैंसी रीगन बैठी रहतीं थीं और रीगन महोदय को यह मालूम ही नहीं था यह महिला कौन है यह है अल -जाई -मर्स.शोर्ट टर्म मेमोरी लोस इसका पहला लक्षण है .

veerubhai ने कहा…

२-३ लीटर पानी पीये लेकिन एक साथ नहीं .हर घंटा दो बाद ग्लास दो ग्लास पानी पीते रहें .चार्जिंग करते रहें बॉडी की .पानी से पेट भरा रहेगा तो तौल भी कम होगी .
ऊपर कृपया ब्रेकफास को ब्रेकफास्ट लिखा जाना था .

डॉ टी एस दराल ने कहा…

फूलों की याद दिला दी फ़ूल दिवस पर !
हमें तो एक बरसा हो गया था फूलों को देखे हुए । फिर एक दिन ---।

veerubhai ने कहा…

२-३ लीटर पानी पीये दिन भर में लेकिन एक साथ नहीं .हर घंटा दो बाद ग्लास दो ग्लास पानी पीते रहें .चार्जिंग करते रहें बॉडी की .पानी से पेट भरा रहेगा तो तौल भी कम होगी .

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

वाह!..कुमुदिनी के मन मोह लेने वाले फूल!...बहुत बढ़िया जानकारी!

babanpandey ने कहा…

tulsi ke beej ke baare me to padha tha... magar jaana ki ...गुलाब के बीज विटामिन ए,बी ३,सी ,डी,तथा ई का बेहतरीन स्रोत हैं .इनसे तैयार चाय मूत्राशय के संक्रमण के अलावा अतिसार से भी बचाव करती है...//
ram ramm bhai

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Aise baate bhoolna achha nahi ... Khatarnaak bimaari hai ye to ....

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी!

Rajesh Kumari ने कहा…

लेकिन राजनितिक गिरावट और नापसंदगी का न तो यह स्वीकृत तरीका है और न ही इसे कथन की भंगिमा या कोई प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति कहा जा सकता है .
इस आदमी की जिसने यह आकृतियाँ परोसीं हैंआकृति विज्ञान गढ़ा है डॉक्टर किया है खुद की मैथुनी क्षमताओं की जांच होनी चाहिए .
यह सब इस और इस प्रजाति के कई और होमियो -सेपियंस की रुग्णमानसिकता का प्रक्षेपण है .अधुनातन प्रोद्योगिकी का एब्यूज तो है ही .ऐसे तमाम व्यक्तियों (शातिरों )का इलाज़ होना चाहिए ....bilku sahi kaha hai aapne poorntah sahmat hoon.gulaab aur lily ke vishay me achchi jankari di.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

bahut hee gyanvardhak jaankari...pharmacy ke chatron ke liye behad u[ykpgi hai...es blog ko ab ham log apne sanstha ke blog se jodne wale hain taki hazaron bacchon ko gyan vardha jaankari bina bhatke mil jaaya kare...ais ho jaane par aapko soochit karoonga

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

अरे...! लगता है मेरी टीप स्पैम में चली गयी...
सादर अनुरोध निकालने का...
सादर.

रचना दीक्षित ने कहा…

फूलों से इलाज़ और नुस्खे काफी उपयोगी हैं.

आभार.

veerubhai ने कहा…

एस एम् हबीब भाई स्पैम से काफी माल निकला लेकिन लगता है कुछ को स्पैम ही लील गया .

veerubhai ने कहा…

एकदम सही कहा सर... इस प्रकार के कृत्य न केवल अनुचित हैं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के मद्देनजर अशोभनीय और निंदनीय भी... ऐसे ही उदाहरणों को लेकर समस्त अंतर्जालीय अभिव्यक्तियाँ निशाने पर आ जाती हैं... सादर. ये कथन की भंगिमा नहीं आपराधिक मामला है . पर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib')

रविवार, 1 अप्रैल 2012
ये कथन की भंगिमा नहीं आपराधिक मामला है .
http://veerubhai1947.blogspot.in/

इस पोस्ट में मिली है हबीब साहब यह टिपण्णी .शुक्रिया .

Bhagat Singh Panthi ने कहा…

लाभदायक जानकारी धन्यवाद