बुधवार, 4 अप्रैल 2012

चावल एक्स्ट्रा वाईट और ब्राउन ,मिथ और यथार्थ .

चावल एक्स्ट्रा वाईट और ब्राउन ,मिथ और यथार्थ .
चावल चीनियों का दैनिक आहार है (हर बार के )हर प्रहर के  भोजन में भले वह नाश्ता ही हो चावल की मौजूदगी एक नियम है अपवाद नहीं .यानी चीनी चावल ज़मके खाते हैं और चाव से खाते हैं और फिर भी ज्यादातर चीनी छरहरे पतले दुबले बने रहतें हैं .बहुत कमज़ोर भी नहीं देखे जाते .दूसरी तरफ भारत में चावल के ऊपर ऊँगलियाँ उठने लगीं हैं .हिन्दुस्तानी मुटियाने लगें हैं इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता .बारहा कहा जा रहा है चावल की जगह गेंहू बरता जाए या फिर कमसे कम सफ़ेद खासकर अतिरिक्त दूधिया /सफ़ेद चावलतो न ही खाया जाए इस  की जगह कमसे कम ब्राउन राईस खाया जाए नित्य प्रति के भोजन में
लेकिन क्या यह सोच सही है .पोषण और पाचन की दृष्टि से सही है ?आइये देखतें हैं क्या कहते हैं खेल पुष्टिकर तत्वों के माहिर 'स्पोर्ट्स न्युत्रिनिष्ट '.
TWICE AS RICE/ Regular rice is much maligned and is fast being dropped in favour of its unpolished avtar .But are the charges valid ?Sports nutritionist Rujuta Diwekar seprates the grain from the husk/Bngalore Mirror/YOU/April 3,2012/p20
बकौल माहिरों के चावल की जगह गेंहू को देना कोई अकलमंदी नहीं है इसका सीधा सीधा मतलब यह होगा आप अब तक प्राप्त अमीनो अम्लोंमे कटौती कर रहें हैं .यही वह कच्चा माल है जो प्रोटीन और विटामिन बी का आधार बनता है इनके निर्माण का रास्ता साफ़ करता है .बेशक ब्राउन राईस रेशा बहुल है ,(Husk और Bran दोनों हैं इसमें ).चोकर और भूसी से भरा है ब्राउन राईस .भले हमें रेशे चाहिए रफेज चाहिए लेकिन यदि चोकर और भूसी जितना हम पचा सकते हैं जितना पचाने की हममें ताकत है सामर्थ्य है उससे कहीं ज्यादा है तो यह अपच और कब्ज़ की भी वजह बन सकती है .अतिसार में भी अतिरिक्त रफेज से बचना होगा .
बेशक दूसरे छोर पर अतिरिक्त रूप से साफ़ शफ्फाक नेताओं की अतिरिक्त सफ़ेद खादी सा (दादरी की खादी सा ,दादरी मायावती वाली )चमकदार चावल भी बढ़िया नहीं कहा जाएगा .
अब ऐसे में एक ही रास्ता है चावल को उतना ही पोलिश किया जाए क़ि उसके पोषक तत्व बने रहें .पुष्टिकर तत्वों का क्षय नहो .प्रोटीन विटामिन बी और रेशे नष्ट न होने पायें ,बने रहें .थोड़ा ब्राउनिश या रेडिश भले दिखे कहीं कहीं से .आपने देखा होगा ऐसा चितकबरा चावल .भले सतह की भूसी हटादें लेकिन इसके ब्राउन रेड स्ट्रेंस (स्थूल अंश )बने रहें .
इस रेड राईस या हेंड पोलिश्ड राईस में मौजूद प्रोटीन शरीर अच्छे से ज़ज्ब कर लेता है ब्राउन राईस से प्राप्त प्रोटीन के बरक्स .
यह पकता भी जल्दी है पचता भी शीघ्रता से है ब्राउन राईस की बनिस्पत .पाचित अंश के विसर्जन में भी आसानी रहती है .
It is easy to digest ,easy to absorb ,easy to assimilate proteins from and easier on your excretory system.
किसान इसी अंदाज़ में चावल का सेवन करता है .आयुर्वेद में चावल आधारित खुराक कई इलाजों का पथ्य  है .शरीर में कई बेलेंसिज़(वात/पित्त /कफ में से कोई ,अन्य अनेक  ) को दुरुस्त करती है चावल आधारित खुराक .
दाल भात एक पुष्टिकर आहार है इससे तमाम अमीनो अम्लों की प्राप्ति हो जाती है .विटामिन  और  खनिज  भी  अछूते  नहीं  रहते  .वसा के जलने में जलाने में चावल मददगार रहता है .
यह कमाल होता है एक ख़ास अमीनो अम्ल 'Methionine 'का जिसका चावल में प्राचुर्य है (प्रचुरता में मौजूद रहता है मिथियो -नीन/मिथियो -नाइन चावल में ).
यकृत में फेट को ठिकाने लगाने मोबिलाइज़  करने में इस अमीनो अम्ल की महती भूमिका रहती है .इसप्रकार अति -आवशयक अमीनों अम्ल मिथियोनाइन चावल मुहैया करवा देता है .दूसरा अमीनों अम्ल है टाय्रोसीन(Tyrosine)जो स्ट्रेस के मौकों पर आवश्यक अमीनों अम्लों की  तरह ज़रूरी होता है .चावल इसकी भी आपूर्ति करवाता है .
गौर तलब है मधुमेह ग्रस्त लोगों को भी इन प्रोटीनों की दरकार रहती है .
चावल इनके लिए भी ज़रूरी है .शाकाहारी लोगों में इन दोनों की अपनी भूमिका एक दूसरे से कम नहीं है .इसलिए बुराई चावल खाने में नहीं है हमारी इस अवधारणा में है क़ि फलां चीज़ हमारे लिए अच्छी है और हम एक अति की ओर चले आते हैं उस चीज़ के स्तेमाल में . चावल हमारी इसी अवधारणा के तहत आयेगा .
दाल भात आप धीरे धीरे खाते हैं जो यह सुनिश्चित करता है आप ठीक मात्रा में खा रहें हैं .
चर्बी जलाने  की ,अपचयन को सही रफ़तार देने की  यही कुंजी है .सही पाचन ओर सेहत का यही आधार बनता है आप धीरे धीरे खाएं सही मात्रा में खाएं .
भारत ओर चीन में इसे (चावल को) शुभ क्या शुभंकर माना जाता है .शुभ अवसरों पर हल्दी चावल से टीका किया जाता है .पितरों को पिंड दान में भी कई जगह चावल का आटा  दिया जाता है .समझा जाता शरीर छोड़ने के बाद यह आत्मा का भोजन बनता है .फिर जीते जी हम क्यों इसे अपनी सनक के तहत निशाने पे ले रहें हैं .अमुक चावल ही अच्छा है अमुक बेकार . बहु गृह प्रवेश करते वक्त चावल से भरा पात्र पैर के अगूंठे के टहोके से लुड्काती है  जो चावल से भरा होता है .प्रतीक यही है घर धन धान्य से भरा रहे पोषण युक्त रहे .मायके से विदा के समय वह पीछे की ओर धान फैंकती है .भाव है जो आपने दिया वह मैं लौटा रहीं हूँ .लेना देना सब खत्म . अब मैं पराये घर की हूँ .कहतें हैं धान पीछे की ओर फैंका जाता है तब अन्यत्र (यहाँ उसके नए घर सुसराल )पनपता है .अब उसका नया घर धन धान्य से भरपूर रहना है .
राम राम भाई ! राम राम भाई !  राम राम भाई !
  

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

नुश्खे सेहत के :

नुश्खे सेहत के :
शू बाईट ,जूता -चप्पल के काटने पर :शू बाईट से राहत के लिए चावल का आटा पानी में घोलके लेप लगाए उस जगह पर और जब यह लेही (पेस्ट )सूख जाए इसे ताज़े पानी से धौ  डाले .
पैरों में गोखरू (कोर्न )होने पर पाइन -एपिल का एक गूदे दार पीस तराशकर गूदे की तरफ से  कोर्न का टुकड़ा बांधकर सो जाए .रात भर इसे बंधा रहने दें .
HEALTH TIPS:
(1) On a shoe -bite ,apply a thick paste of powdered rice and water .Wash off after it dries.
(2)To cure a corn ,cut a piece of pineapple ,with some flesh intact .Place  the fruit side against the corn and bandage overnight.
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !


मूढ़ भांपने वाली कारें .अभिनव प्रोद्योगिकी की नै परवाज़ है आपके चित्त को पढके अपना रंग बदलने वाली कारें .इसका श्रेय  जाता है एक फ्रांसीसी कार निर्माता Peugeot को .
'Peugeot RCZ 'एक रिएक्टिव पैंट का स्तेमाल करती है .बस यही रासायनिक प्रतिक्रया प्रदर्शित करने वाला पैंट अपने मालिक (ड्राइवर )के मिजाज़ को ताड़ कर अपना रंग तब्दील करलेता है .साइको -क्रोमाटिक है यह पैंट .(साइको माने चित्त और क्रोमा माने कलर ,रंग .).रंग बदलके यह मिजाज़ पुरसी कर सकती है मालिक की जैसा मूड वैसा रंग .सुख, दुःख ,ख़ुशी गमी सभी से संगत एक वर्ण मौजूद है यहाँ .दरअसल इस कार के स्टीयरिंग वील में  ताप टोहकों(हीट सेन्सर्स) को समेकित किया गया है ,शामिल किया गया है.बस यह टोहक ड्राइवर का बॉडी टेम्प्रेचर (शरीर के तापमान )और हृदगति को ताड़ लेतें हैं .और इसी के अनुरूप कार का बाहरी रंग रोगन ,रंग रूप बदलने लगता है .
दरअसल यह कमाल नैनो -प्रोद्योगिकी का है .यह करिश्मा आणविक धरातल पर घटित हो रहा है .साइको -क्रोमाटिक ,मूढ़ संवेदी पैंट की बाहरी पर्त अपना आणविक लिवास ,आणविक पैरहन बदल लेती है अलग अलग बॉडी तापमानों यानी शरीर से उत्सर्जित तरंग के अनुरूप .
हम जानतें हैं हमारा शरीर हरेक तापमानों पर हीट वेव (अवरक्त विकिरण )उत्सर्जित भी करता रहता है अवशोषित भी .और आखिर कार  एक गतिशील अल्पकालिक  तापीय संतुलन  बनाता है जो अब बदला और तब बदला .
बस यही मूढ़ भांपू पैंट ड्राइवर के संवेगों का ही प्रक्षेपण करता है अपनी परतों का रंग बदलके मालिक के मिजाज़ के अनुरूप .
अभी हमारे एक सम्मानीय चिठ्ठाकार बन्धु एक सिरीज़ चलायें हैं अपने ब्लॉग पर(

Tuesday, 27 March 2012


पुराण कथाओं में झलकता है भविष्य(1)-मन से चालित विमान सौभ!

 http://mishraarvind.blogspot.in/)

जिसमें सोचने वाली मशीनों का ज़िक्र है पौराणिक ग्रन्थों में .तो ज़नाब कल की कल्पना ही आज का यथार्थ है .कल्पना के नए क्षितिज तोड़ों अनागत की कटिंग एज टेक्नोलोजी की नींव रख्खो .
हालाकि इस प्रोद्योगिकी के अपने संभावित नुकसानात और दुरोपयोग हैं  .अपराध तत्व अभी तो अपराध करके भागते समय कार के नंबर(नम्बर प्लेट गियर से जोड़कर ) ही बदलता चलता है यहाँ तो कार ही निरंतर रंग बदलेगी नेताओं से .
राम राम भाई !  राम राम भाई ! राम राम भाई !

सोमवार, 3 अप्रैल 2012


तार जुड़े हैं डिप्रेशन के फास्ट फ़ूड से .

तार जुड़े हैं डिप्रेशन के फास्ट फ़ूड से .
Eating fast food linked to depression/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,BANGALORE  ,APRIL 2,2012,P15.
चिकनाई  सने तुरंता भोजन फास्ट या कबाड़िया भोजन से बचने छिटकने की एक वजह और सामने आगई है .साइंसदानों के मुताबिक़  जंक फ़ूड से जुड़े हैं अवसाद के तार .
विज्ञान पत्रिका पब्लिक हेल्थ न्यूट्रीशन में प्रकाशित हुआ है यह अभिनव अध्ययन .
Univesity of Las Palmas de Gran Canaria एवं ग्रानाडा विश्वविद्यालय के रिसर्चरों के मुताबिक़ केक ,  Croissants ,डोनट्स ,बर्जर्स तथा पीज़ा(पिज्जा ,पीत्सा )जैसे खाद्यों का सेवन अवसाद की ओर ले जासकता है .अवसाद की नव्ज़ इन खाद्यों के सेवन से जुडी हुई है .
इन का चस्का जिन्हें लगा हुआ है ऐसे लोगों के अवसाद ग्रस्त होने के मौके ५१ %बढ़ जातें हैं बरक्स उनके जो इनसे बचे रहतें हैं .दूर छिटकतें हैं .

और यह ख़तरा उसी अनुपात में बढ़ता जाता है जिस अनुपात में इस तुरता भोजन का सेवन बढ़ता जाता है .अध्ययन    के अगुवा साइंसदान   अल्मुदें  सांचेज़  -विल्लेगास का यही कहना है .
पता यह भी  चला  है फास्ट फ़ूड के  चंगुल में फंसे रहने वाले लोग न सिर्फ छड़े छटांक (सिंगिल )होते हैं ,ढीले ढाले लेस एक्टिव भी होतें हैं .इनकी खान पान की आदतें भी अस्वास्थ्यकर रहतीं हैं .सिगरेट नोशी भी इनमें देखने को ज्यादा मिलती है  तथा सप्ताह में काम भी यह ४५ घंटों से ज्यादा देर तक करतें हैं .
अध्ययन में रिसर्चरों ने कुल मिलाकर ८९६४ लोगों की खान पान की आदतों और दैनिकी का जायज़ा पूरे छ :माह तक लिया था .इनमे से बाकायदा ४९३ लोगों में अवसाद की रोगनिदानिक पुष्टि हुई या फिर इन्होनें अवसाद रोधी दवाएं लेनी शुरू कर दीं थी .
क्या है Croissants ?
Croissant is a piece of baked dough or pastry shaped into a cresent ,usually moist ,flaky and very rich in fat ,ori
 

4 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अधिक पॉलिश कर देने से उसके पौष्टिक तत्व निकल जाते हैं। चावल खा कर भी मेहनत की जाये तो शरीर ठीक रहता है।

Arvind Mishra ने कहा…

वीरूभाई चावल वाली पोस्ट जायकेदार है -बाकी को नहीं पढ़ पाया -आप एक ही पोस्ट में कैसे कई कई पोस्ट कर लेते हैं -यह टेक्नीक जरा मुझे भी बताईयेगा मैं तो चाहूं तो भी न कर पाऊं!

dheerendra ने कहा…

बहुत बढ़िया रोचक उपयोगी ,सुंदर बेहतरीन पोस्ट,....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

पालिश करत कबाड़ा, बदल पालिसी मील ।

पौष्टिकता टिकती रहे, छिलके उतने छील ।

छिलके उतने छील, छिलाती जैसे पब्लिक ।

असहनीय संताप, नहीं सत्ता के माफिक ।

पर भूखा पा जाय, अगर कुछ मोटा-माड़ा ।

नहीं भूख से मौत, करे ना व्यर्थ कबाड़ा ।।