गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

अब आया एंटी -बायटिक 'जेंटा -माय -सिन ' निशाने पे

अब आया एंटी -बायटिक 'जेंटा -माय -सिन ' निशाने पे .
Taking antibiotics could damage inner ear:Study/THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE ,APRIL 11,2012.
  गंभीर  संक्रमणों  के  लिए  स्तेमाल  में  लिया  जाने  वाला  एक  आम  एंटी -बाय  -टिक 'जेंटा -माय -सिन ' अंदरूनी  कान  को   नुकसानी पहुंचा कर संतुलन को क्षति  पहुंचा सकता है .एक दम  से अशक्त   कर देने वाले 'Loss of balance' की वजह बन सकता है .एक ऑस्ट्रेलियाई मेडिकल  जर्नल में  प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक़ जेंटा -माय -सिन  की एकल खुराक भी  स्थाई इम्बेलेंस का वायस (कारण ) बन सकती है .
अध्ययन में उन १०३ मरीजों का हाल बयान किया गया  है जो १९८८-2010 की अवधि में इलाज़  के लिए एक 'बेलेंस डिस -ऑर्डर्स क्लिनिक में पहुंचे थे .
ये    वो  लोग  थे जो 1975-2010 के दरमियान    अस्पताल पहुंचे थे जहां इलाज़ के बतौर उन्हें एंटी -बाय --टिक जेंटा -माय -सिन दिया गया था .
राम राम भाई !  राम राम  भाई  !राम राम भाई !
नेकदिली के भी होतें हैं जींस .
कुछ लोग मित्रवत नेक दिल और उदार होतें हैं .खुल कर मिलतें हैं जिससे भी मिलते हैं .कुछ और लोग व्यवहार के पैमाने पर बे -रुखी से मिलतें हैं .तब क्या  यह  माना  जाए  की  अच्छाई नेक -दिली के भी खानदानी बीज ,जीवन खंड होतें हैं .साथ में हो अच्छी परवरिशभी हो ,मीठे जीवन अनुभव भी , तो सोने पे सुहागा .क्योंकि शख्शियत को ढालने में सारा हाथ इन जीवन इकाइयों का ही नहीं  है .परवरिश का भी है .संग साथ का भी है .
यही लब्बोलुआब है एक ताज़ा अध्ययन का जिसके अनुसार व्यक्तिनत्व निर्धारण को जीवन इकाइयां भी प्रेरित करती हैं ,टहोका देती हैं ,कोहनी मारतीं हैं .
साइंसदानों ने दो ख़ास हारमोनों  की अभिग्राही जीवन इकाइयों  (रिसेप्टर जींस  ) के एक ख़ास संस्करण तथा व्यक्ति के मैत्री पूर्ण व्यवहार में एक अंतर्संबंध की पुष्टि की है . जिनमें इनका भिन्न संस्करण रहता है उनका व्यवहार भी जुदा रहता है .
ये हारमोन  हैं 'ऑक्सीटोसिन 'और 'वैसो -प्रेसिन'.पूर्व के अध्ययनों में भी इन दोनों का सम्बन्ध व्यक्ति की अच्छाई ,मिलन- सारिता ,अच्छे आचरण से जोड़ा गया है .
जर्नल 'साइकोलोजिकल साइंस' में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है .
साइंसदानों के मुताबिक़ अगर आप में ऐसी जीवन इकाइयां मौजूद हैं जो इन हारमोन अभिग्राहियों  का एक ख़ास संस्करण आपको मुहैया करवा देतीं हैं तब इस बात की संभावना बढ़ जाती है की आपका व्यवहार मित्रवत होगा ,मीठा होगा .बरक्स उनके जिनमें  ऐसी जीवन इकाइयां हैं जो इन हारमोन अभिग्राहियों का जुदा किस्म का संस्करण मुहैया  करवातीं हैं .
अलबत्ता आदमी सिर्फ अपने जीवन खण्डों का ज़मा जोड़ नहीं है .व्यक्तित्व निर्धारण में उसकी परवरिश और निजी अनुभवों का भी हाथ होता है .ये दोनों घटक मिलकर ही तय करतें हैं वह मिलन सार होगा या समाज विरोधी ,एंटी -सोशल .एलिमेंट .शरीफ होगा या बदमाश .
राम राम भाई !  राम राम भाई !   राम राम भाई !
अभिनव प्रोद्योगिकी का एक और हासिल .:नेचुरल ओरिफिस सर्जरी .
Now , a scar -free op that removes your appendix via mouth/THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE ,APRIL 11,2012,P17.
हो  सकता  है आप यकीन न करें  ,अविश्वाश से भरे रहें लेकिन साइंसदानों ने कहा है अब  किसी मरीज़ की अपेंडिक्स को मुख ,गुदा (मलाशय ,)या फिर योनी मार्ग से भी निकाल बाहर किया जा सकेगा .इसे' नेचुरल ओरिफिस सर्जरी' कहा जा रहा है ,साफ़ सुथरी बे -दाग सर्जरी कहा जा रहा है जिसमें उत्तर या पूर्व शल्य कर्म पीड़ा भी कम रहती है ,कमतर और एक  दम  से छोटा चीरा लगाना पड़ता है ,संक्रमण का ख़तरा भी कमतर रहता है .योरोप और अमरीका भर में अब तक  कोई हज़ार मरीज़ इसका   फायदा   ले   चुकें   हैं   .
इस नायाब शल्य कर्म में कहीं से चमड़ी को चीरा लगाने के बजाय शरीर के ईश्वर प्रदत्त देह मार्गों का स्तेमाल किया जाता है .यह नेचुरल ओरिफिस मूत्र मार्ग भी हो सकता है ,योनी या मलाशय भी .यही देह के आंतरिक राज मार्ग हैं हाई वेज़ हैं जिनका स्तेमाल खराब हो चुके या दुखदाई अंगों को काट कूट कर टुकडा टुकडा निकाल बाहर करने में ,या फिर दुरुस्ती के लिए किया जाता है .
नतीजे परम्परा गत सर्जरी से बेहतर ही कहे जा सकतें हैं कई मायनों में क्योंकि  यहाँ संक्रमण के मौके बहुत कम रह जातें हैं ,  चीरे भी आकार में बहुत छोटे और संख्या में कम लगाने पडतें हैं यही कहना है आमाशय और आंत्रक्षेत्र (उदर और आँतों की  माहिरा गैस्ट्रो -एंटेरो -लोजिस्ट )डॉ .जुलियन टारे का .आप इम्पीरियक कोलिज लन्दन में काम कर रहीं   हैं . 
आप इसे इंट्रा   - एब्डोमिनल   सर्जरी का एक और शिखर  बतलातीं   हैं  की होल सर्जरी के बाद . 
सर्जन के साधनों में इस सर्जरी में मात्र एक एंडोस्कोप होता है जिसके दूसरे छोर पर एक नन्ना कैमरा लगा होता है ,कुछ और नन्ने औज़ार भी होतें हैं ,इन्हें  समुचित  ओरिफिस( देह द्वार)    से प्रवेश  दिलवाया   जाता है .
गाल -ब्लेडर (पित्ताशय )को निकालने के लिए सर्जन एक एंडोस्कोप (केथीटर सी महीन ट्यूब,जिसके आखिर में एक कैमरा लगा होता है ) मुख द्वार से प्रवेश दिलवाता है .एक नन्ने से ब्लेड का स्तेमाल अमाशय में चीरा लगाने के लिए करता है .अब उसकी पहुँच पित्ताशय तक हो जाती है .एक नन्ने गुबारे को फुलाके इस चीरे का आकार बढाया जाता है .पित्ताशय के ऐसे छोटे छोटे टुकड़े कर दिए जातें हैं जो इंडो -स्कोप में फिट आ जाएँ और निकाल बाहर कर दिए जाएँ .
लेबल :अभिनव प्रोद्योगिकी का एक और शिखर :नेचुरल ओरिफिस सर्जरी ..एंडोस्कोप ,इन्सिजन ,इन्फेक्शन .
राम राम भाई !  राम राम भाई !   राम राम भाई !
नुश्खे सेहत के :
रुई की फाये  से ताज़ा तराशे काटे गए नीम्बू का रस कील -मुंहासों से पैदा दाग धब्बों पर लागाइये .चमड़ी ली लुनाई बढ़ने के साथ दाग धब्बे भी जाते रहेंगे .
तैलीय बालों की स्वामिनी महिलायें बारहा अपनी केश क्यारी को  न सँवारे .बार बार कंघी करने से खोपड़ी  ,सिर की खाल और ज्यादा तेल छोडती है .

8 टिप्‍पणियां:

यादें....ashok saluja . ने कहा…

वीरू भाई राम-राम ...पंछी अपने नीड़ में आया या नही !क्या-क्या समझा जाते हो ..अपनी तो मंद-बुद्धि चकरा जाती है ...चलो खुश रहो|
हमें तुम से है प्यार कितना ..ये हम नही जानते ..
मगर ........???

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

जेंटा-माय-सिन् का इस्तेमाल धडल्ले से होता हुआ देखने में आ रहा है!....तौबा!....बहुत उपयुक्त पोस्ट!....आभार!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वीरुभाई जी , जेंटामाइसिन ओटो टोक्सिक होता है , यह सभी जानते हैं । लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हमेशा नुकसान करता है । बस ध्यान रखना पड़ता है कि डोज़ ज्यादा न हो और किडनी रोग में डोज़ कम रहे । वैसे गंभीर रोगों में भी इसका इस्तेमाल बखूबी किया जाता है ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

राम राम भाई! उपयोगी पोस्ट...शुक्रिया

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ||

बहुत बहुत आभार ||

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इतनी बासी तरह की दवाइयों को भारत में पता नहीं किस मजबूरी में चलाया जाता है।

मनोज कुमार ने कहा…

आपके रिसर्च से हमारी जानकारी में लगातार वृद्धि हो रही है।

Arvind Mishra ने कहा…

नवीनतम औषधि -चिकित्सा जानकारियाँ !आभार!