गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

नेकदिली के भी होतें हैं जींस .

नेकदिली के भी होतें हैं जींस .
कुछ लोग मित्रवत नेक दिल और उदार होतें हैं .खुल कर मिलतें हैं जिससे भी मिलते हैं .कुछ और लोग व्यवहार के पैमाने पर बे -रुखी से मिलतें हैं .तब क्या  यह  माना  जाए  की  अच्छाई नेक -दिली के भी खानदानी बीज ,जीवन खंड होतें हैं .साथ में हो अच्छी परवरिशभी हो ,मीठे जीवन अनुभव भी , तो सोने पे सुहागा .क्योंकि शख्शियत को ढालने में सारा हाथ इन जीवन इकाइयों का ही नहीं  है .परवरिश का भी है .संग साथ का भी है .
यही लब्बोलुआब है एक ताज़ा अध्ययन का जिसके अनुसार व्यक्तिनत्व निर्धारण को जीवन इकाइयां भी प्रेरित करती हैं ,टहोका देती हैं ,कोहनी मारतीं हैं .
साइंसदानों ने दो ख़ास हारमोनों  की अभिग्राही जीवन इकाइयों  (रिसेप्टर जींस  ) के एक ख़ास संस्करण तथा व्यक्ति के मैत्री पूर्ण व्यवहार में एक अंतर्संबंध की पुष्टि की है . जिनमें इनका भिन्न संस्करण रहता है उनका व्यवहार भी जुदा रहता है .
ये हारमोन  हैं 'ऑक्सीटोसिन 'और 'वैसो -प्रेसिन'.पूर्व के अध्ययनों में भी इन दोनों का सम्बन्ध व्यक्ति की अच्छाई ,मिलन- सारिता ,अच्छे आचरण से जोड़ा गया है .
जर्नल 'साइकोलोजिकल साइंस' में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है .
साइंसदानों के मुताबिक़ अगर आप में ऐसी जीवन इकाइयां मौजूद हैं जो इन हारमोन अभिग्राहियों  का एक ख़ास संस्करण आपको मुहैया करवा देतीं हैं तब इस बात की संभावना बढ़ जाती है की आपका व्यवहार मित्रवत होगा ,मीठा होगा .बरक्स उनके जिनमें  ऐसी जीवन इकाइयां हैं जो इन हारमोन अभिग्राहियों का जुदा किस्म का संस्करण मुहैया  करवातीं हैं .
अलबत्ता आदमी सिर्फ अपने जीवन खण्डों का ज़मा जोड़ नहीं है .व्यक्तित्व निर्धारण में उसकी परवरिश और निजी अनुभवों का भी हाथ होता है .ये दोनों घटक मिलकर ही तय करतें हैं वह मिलन सार होगा या समाज विरोधी ,एंटी -सोशल .एलिमेंट .शरीफ होगा या बदमाश .

5 टिप्‍पणियां:

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

व्यक्तित्व निर्धारण में,व्यक्ति की परवरिश और निजी अनुभवों का भी हाथ होता है!

...बहुत उपयोगी लेख!....आभार!

कुमार राधारमण ने कहा…

निश्चय ही,मनुष्य रक्त,अस्थि और मज्जा का योग नहीं है। विज्ञान इसे जितनी जल्दी स्वीकार ले,अच्छा है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अच्छाई के लिये भी नक़ल की पुर्ची।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति |

Anita ने कहा…

रोचक पोस्ट !